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Balrampur News: विषय से जोड़ने के लिए देनी चाहिए शिक्षा
Sun, 17 Dec 2023 11:07 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 17 Dec 2023 11:07 PM IST
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बलरामपुर के एमएलके पीजी कॉलेज में मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत करते प
बलरामपुर। एमएलके पीजी कॉलेज सभागार में रविवार को भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद की तरफ से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन रविवार को हुआ। संगोष्ठी में वक्ताओं ने प्राचीन भारतीय शिक्षा को वर्तमान परिदृश्य में उसकी प्रासंगिकता पर जोर दिया।
समापन समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि फैकल्टी ऑफ बीएड पूर्वांचल विश्वविद्यालय के डीन प्रो. अजय कुमार दुबे, यूपी कॉलेज वाराणसी के प्रो. रमेश धर द्विवेदी, एलबीएस पीजी कॉलेज गोंडा के प्राचार्य प्रो. आरके पांडेय व संगोष्ठी के अध्यक्ष व प्राचार्य प्रो. जेपी पाण्डेय ने किया। सेमिनार को संबोधित करते हुए अध्यक्ष प्रो. रमेश धर द्विवेदी ने कहा कि परिवर्तन ही हमारा सरंक्षण करती है। गुरु को अपने शिष्य को प्रचलित स्वरूप में शिक्षा देने के बजाय विषय से जोड़े रहने की शिक्षा दी जानी चाहिए। जागरूकता व तत्परता के आधार पर शिक्षण विधि तैयार की जानी चाहिए।
प्रो. अजय दूबे ने कहा कि सीखने के लिए नम्रता का भाव लाना चाहिए, तभी हम कोई चीज सीख सकते हैं। अच्छे कार्य को तत्काल करने की इच्छा व बुरे कार्य को टालने का प्रयास करना चाहिए। प्रो. आरके पांडेय ने कहा कि सीखने के लिए उत्सुकता और धैर्य की आवश्यक है। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को सुनने की आदत डालनी होगी, क्योंकि अच्छा श्रोता ही अच्छा वक्ता होता है। प्राचार्य प्रो. जेपी पांडेय ने सेमिनार के सफल आयोजन पर दोनों विभागों के शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि गुरु का कार्य अपने शिष्य में रुचि पैदा करे और उसे समृद्ध बनाए।
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सेमिनार के संयोजक प्रो. राघवेंद्र सिंह ने अतिथियों का स्वागत व आयोजन सचिव प्रो. श्रीप्रकाश मिश्र ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। डॉ. बसंत कुमार गुप्त ने सेमिनार की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की। समारोह का संचालन सचिव महाविद्यालय के एसोसिएट एनसीसी ऑफिसर लेफ्टिनेंट डॉ. देवेन्द्र कुमार चौहान ने किया। इस अवसर पर प्रो. तबस्सुम फरखी, प्रो. रेखा विश्वकर्मा, डॉ. दिनेश मौर्य, डॉ. राम रहीस, डॉ. अनामिका सिंह, डॉ. स्वदेश भट्ट व डॉ. बीएल गुप्त आदि रहे।
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समापन समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि फैकल्टी ऑफ बीएड पूर्वांचल विश्वविद्यालय के डीन प्रो. अजय कुमार दुबे, यूपी कॉलेज वाराणसी के प्रो. रमेश धर द्विवेदी, एलबीएस पीजी कॉलेज गोंडा के प्राचार्य प्रो. आरके पांडेय व संगोष्ठी के अध्यक्ष व प्राचार्य प्रो. जेपी पाण्डेय ने किया। सेमिनार को संबोधित करते हुए अध्यक्ष प्रो. रमेश धर द्विवेदी ने कहा कि परिवर्तन ही हमारा सरंक्षण करती है। गुरु को अपने शिष्य को प्रचलित स्वरूप में शिक्षा देने के बजाय विषय से जोड़े रहने की शिक्षा दी जानी चाहिए। जागरूकता व तत्परता के आधार पर शिक्षण विधि तैयार की जानी चाहिए।
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प्रो. अजय दूबे ने कहा कि सीखने के लिए नम्रता का भाव लाना चाहिए, तभी हम कोई चीज सीख सकते हैं। अच्छे कार्य को तत्काल करने की इच्छा व बुरे कार्य को टालने का प्रयास करना चाहिए। प्रो. आरके पांडेय ने कहा कि सीखने के लिए उत्सुकता और धैर्य की आवश्यक है। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को सुनने की आदत डालनी होगी, क्योंकि अच्छा श्रोता ही अच्छा वक्ता होता है। प्राचार्य प्रो. जेपी पांडेय ने सेमिनार के सफल आयोजन पर दोनों विभागों के शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि गुरु का कार्य अपने शिष्य में रुचि पैदा करे और उसे समृद्ध बनाए।
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सेमिनार के संयोजक प्रो. राघवेंद्र सिंह ने अतिथियों का स्वागत व आयोजन सचिव प्रो. श्रीप्रकाश मिश्र ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। डॉ. बसंत कुमार गुप्त ने सेमिनार की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की। समारोह का संचालन सचिव महाविद्यालय के एसोसिएट एनसीसी ऑफिसर लेफ्टिनेंट डॉ. देवेन्द्र कुमार चौहान ने किया। इस अवसर पर प्रो. तबस्सुम फरखी, प्रो. रेखा विश्वकर्मा, डॉ. दिनेश मौर्य, डॉ. राम रहीस, डॉ. अनामिका सिंह, डॉ. स्वदेश भट्ट व डॉ. बीएल गुप्त आदि रहे।