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Ballia News: गरज-चमक व तेज हवा के झमाझम बारिश से 30 मिनट तक ठहरा रहा यातायात
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अचानक हुई बारिश में भींगते हुए अपने गंतव्य को जाती महिलाएं।संवाद
बलिया। जिले में दो दिनों से बारिश का दौर जारी है। बुधवार की शाम करीब तीन बजे तेज हवा संग गरज व चमक के साथ झमाझम बारिश होने से मौसम खुशनुमा हो गया। इससे लोगों को ठंड का एहसास होने लगा है। शहर क्षेत्र में तेज बारिश के दौरान लगभग 30 मिनट तक आवागमन ठप हो गया।
बारिश की वजह से शहर के कई प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होने से यातायात पर भी असर पड़ा। कदम चौराहा एनएच-31 पर सड़क पर पानी जमा होने से करीब एक घंटे जाम की स्थिति रही, जिससे लोगों को दिक्कतों को सामना करना पड़ा। शाम लगभग तीन बजे के आसपास अचानक आसमान में काले बादल मंडराने लगे। इसके बाद गरज व चमक होने लगी। लगभग दस मिनट तक यह दौर चलने से लोग सहमे रहे। उसके बाद शहर सहित आसपास के इलाकों में झमाझम बारिश हुई। हवाओं के साथ हुए बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। बारिश के माल्देपुर से कदम चौराहा तक जगह-जगह पानी जमा हो गया। वहीं, आवास विकास कालोनी, आनंद नगर, राम दहिमपुरम, टैगोरनगर में पानी जमा हो गया। जीराबस्ती रोडवेज वर्कशाप में जलभराव से स्थिति दयनीय हो गई है।
बुधवार को अधिकतम तापमान 31 व न्यूनतम 23.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया । मंगलवार को अधिकतम तापमान 32 व न्यूनतम 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई थी।इस प्रकाश एक डिग्री अधिकतम व 3 डिग्री न्यूनतम तापमान में आई गिरावट। मौसम विशेषज्ञ प्रो. सुरेश सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को आसमान में बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है।
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अगेती धान पर मंडराया संकट, बालियों वाली फसल को हो सकता है नुकसानपूर। मौसम में अचानक बदलाव के बाद क्षेत्र में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हुई। बारिश से तापमान सामान्य हो गया और लोगों को गर्मी से राहत मिली, लेकिन अगेती धान की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। अगेती धान में बालियां निकल चुकी हैं। ऐसे में लगातार या तेज बारिश होने पर फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
बालियां निकलने के बाद धान की फसल बारिश के प्रति संवेदनशील हो जाती है। तेज बारिश होने पर बालियों में लगे दानों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। मौसम में बदलाव के साथ किसानों को पिछले वर्ष आए चक्रवाती तूफान की याद सताने लगी है। उस दौरान तेज बारिश के कारण धान की खड़ी फसल को काफी नुकसान हुआ था। किसानों का कहना है कि फिलहाल हुई बारिश से मौसम सुहाना हुआ है और धान की फसल को तत्काल कोई खास नुकसान नहीं है, लेकिन यदि तेज बारिश लगातार हुई तो बालियों वाली धान की फसल प्रभावित हो सकती है।
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बारिश की वजह से शहर के कई प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होने से यातायात पर भी असर पड़ा। कदम चौराहा एनएच-31 पर सड़क पर पानी जमा होने से करीब एक घंटे जाम की स्थिति रही, जिससे लोगों को दिक्कतों को सामना करना पड़ा। शाम लगभग तीन बजे के आसपास अचानक आसमान में काले बादल मंडराने लगे। इसके बाद गरज व चमक होने लगी। लगभग दस मिनट तक यह दौर चलने से लोग सहमे रहे। उसके बाद शहर सहित आसपास के इलाकों में झमाझम बारिश हुई। हवाओं के साथ हुए बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। बारिश के माल्देपुर से कदम चौराहा तक जगह-जगह पानी जमा हो गया। वहीं, आवास विकास कालोनी, आनंद नगर, राम दहिमपुरम, टैगोरनगर में पानी जमा हो गया। जीराबस्ती रोडवेज वर्कशाप में जलभराव से स्थिति दयनीय हो गई है।
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बुधवार को अधिकतम तापमान 31 व न्यूनतम 23.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया । मंगलवार को अधिकतम तापमान 32 व न्यूनतम 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई थी।इस प्रकाश एक डिग्री अधिकतम व 3 डिग्री न्यूनतम तापमान में आई गिरावट। मौसम विशेषज्ञ प्रो. सुरेश सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को आसमान में बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है।
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अगेती धान पर मंडराया संकट, बालियों वाली फसल को हो सकता है नुकसानपूर। मौसम में अचानक बदलाव के बाद क्षेत्र में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हुई। बारिश से तापमान सामान्य हो गया और लोगों को गर्मी से राहत मिली, लेकिन अगेती धान की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। अगेती धान में बालियां निकल चुकी हैं। ऐसे में लगातार या तेज बारिश होने पर फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
बालियां निकलने के बाद धान की फसल बारिश के प्रति संवेदनशील हो जाती है। तेज बारिश होने पर बालियों में लगे दानों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। मौसम में बदलाव के साथ किसानों को पिछले वर्ष आए चक्रवाती तूफान की याद सताने लगी है। उस दौरान तेज बारिश के कारण धान की खड़ी फसल को काफी नुकसान हुआ था। किसानों का कहना है कि फिलहाल हुई बारिश से मौसम सुहाना हुआ है और धान की फसल को तत्काल कोई खास नुकसान नहीं है, लेकिन यदि तेज बारिश लगातार हुई तो बालियों वाली धान की फसल प्रभावित हो सकती है।