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ुस्लिम महिला ने रक्तदान कर संवारी गर्भवती महिला और उसके शिशु की जिंदगी
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बलिया। देश में एक ओर जहां मजहबी बयार के झोंकों से कौमी एकता का ढ़ांचा धीरे-धीरे टूट रहा है,वहीं बुधवार को जिला अस्पताल परिसर स्थित ब्लड बैंक में रक्तदान कर एक महुस्लिम महिला ने न सिर्फ गर्भवती मां और उसकी कोख में पल रहे मासूम को नई जिंदगी दी। बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी संवारने का अनोखा प्रयास किया। रक्तदान करने वाली महिला की चहुंओर प्रशंसा हो रही है। हालांकि इस नेक पहल में रक्तदान का अभियान चलाने वाले अभिषेक सिंह व सागर सिंह राहुल की भी अहम भूमिका रहीं,जिनकी पहल पर यह नेक कार्य सम्पन्न हुआ।
बांसडीहरोड थाना अंतर्गत तिखमपुर निवासी मनीषा उपाध्याय पत्नी गोपाल जी उपाध्याय गर्भवती थी और वह शहर के जगदीशपुर सिथत ऐ नर्सिगिं होम में भर्ती थी। बुधवार को चिकित्सकों ने जच्चा -बच्चा की जान बचाने के लिए आपरेशन कर डिलीवरी कराने की बात कहीं। लेकिन खून की कमी मनीषा के आपरेशन में बाधक बन गया। जिससे जच्चा की हालत गंभीर होने लगी। परिजनों द्वारा काफी प्रयास करने के बावजूद मनीषा के ग्रुप का खून उपलब्ध नहीं होने पर परिजन निराश हो गये थे। इसी दौरान उन्हें किसी ने फेसबुक पर रक्दान की पहल करने वाले युवाओं के बारे किसी ने जानकारी दी। जिसके बाद परिजनों ने फेसबुक के माध्यम से अभिषेक सिंह और सागर सिंह राहुल का मोबाइल नंबर लेकर उनसे संपर्क किया और मनीषा के लिए एबी निगेटीव ग्रुप के रक्त की उपलब्धता कराने की गुजारिश की। जिसके बाद दोनों युवाओं की पहल पर शहर के गुदरीबाजार सब्जी मंडी निवासी सिमी पत्नी राजू शेख ने मनीषा के लिए खून देने को तैयार हो गई। रक्तदान की इस पहल एक तरफ जहां दो को नई जिंदगी मिली तो कौमी एकता की डोर भी मजबूत हुई।
बता दें कि वर्ष 2000 में सिमी को भी इस प्रकार की परिस्थितियों से जूझना पड़ा था। तब उसके परिजनों ने एक 7500रुपये में एक बोतल रक्त की व्यवस्था की थी। मनीषा की बात सुनते ही सिमी मे जेहन वह वाकया कौंध गया।
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बांसडीहरोड थाना अंतर्गत तिखमपुर निवासी मनीषा उपाध्याय पत्नी गोपाल जी उपाध्याय गर्भवती थी और वह शहर के जगदीशपुर सिथत ऐ नर्सिगिं होम में भर्ती थी। बुधवार को चिकित्सकों ने जच्चा -बच्चा की जान बचाने के लिए आपरेशन कर डिलीवरी कराने की बात कहीं। लेकिन खून की कमी मनीषा के आपरेशन में बाधक बन गया। जिससे जच्चा की हालत गंभीर होने लगी। परिजनों द्वारा काफी प्रयास करने के बावजूद मनीषा के ग्रुप का खून उपलब्ध नहीं होने पर परिजन निराश हो गये थे। इसी दौरान उन्हें किसी ने फेसबुक पर रक्दान की पहल करने वाले युवाओं के बारे किसी ने जानकारी दी। जिसके बाद परिजनों ने फेसबुक के माध्यम से अभिषेक सिंह और सागर सिंह राहुल का मोबाइल नंबर लेकर उनसे संपर्क किया और मनीषा के लिए एबी निगेटीव ग्रुप के रक्त की उपलब्धता कराने की गुजारिश की। जिसके बाद दोनों युवाओं की पहल पर शहर के गुदरीबाजार सब्जी मंडी निवासी सिमी पत्नी राजू शेख ने मनीषा के लिए खून देने को तैयार हो गई। रक्तदान की इस पहल एक तरफ जहां दो को नई जिंदगी मिली तो कौमी एकता की डोर भी मजबूत हुई।
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बता दें कि वर्ष 2000 में सिमी को भी इस प्रकार की परिस्थितियों से जूझना पड़ा था। तब उसके परिजनों ने एक 7500रुपये में एक बोतल रक्त की व्यवस्था की थी। मनीषा की बात सुनते ही सिमी मे जेहन वह वाकया कौंध गया।
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