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बाबा साहब ने दलितों को एकजुट होकर लड़ना सिखाया: प्रो. इंदू
Updated Mon, 09 Apr 2018 12:16 AM IST
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विशुनपुरा। बाबा साहेब ने दलितों को एकजुट होकर लड़ना सिखाया। जब बाबा साहेब विदेश से शिक्षा ग्रहण कर लौटे, उस वक्त देश में दलितों के साथ अत्याचार चरम पर था। दलितों को बैठने और थूकने तक पर पाबंदी थी। सामन्तवादी ताकतें दलितों को कुएं और तालाबों में पानी तक नहीं लेने देती थीं। आंबेडकर ने पानी के सार्वजनिक संसाधनों को समाज के सभी तबकों के लिए सुलभ कराने की लड़ाई लड़ी। उन्होंने अछूतों को भी मंदिरों में प्रवेश करने का अधिकार दिलाया और समाज से छुआछूत खत्म करने के लिए जीवन भर लड़ते रहे। यह बातें बीएचयू की प्रोफेसर इंदु चौधरी ने नगरा थाना क्षेत्र के करनी गांव में रविवार को आंबेडकर जयंती पखवारा के अवसर पर आयोजित बहुजन महासम्मेलन में कही।
उन्होंने कहा कि आंबेडकर शिक्षा पर बहुत जोर देते थे। उनका कहना था कि शिक्षा ही समाज में समानता ला सकती है। जब मनुष्य शिक्षित हो जाता है तब उसमें विवेक और सोचने की शक्ति पैदा हो जाती है। तब वह न खुद अत्याचार सहन कर सकता है और न ही दूसरों पर अत्याचार होते देख सकता है। बाबा साहेब ने दलितों को वह सारे मौलिक अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ी, जिसे दलितों को सख्त जरूरत थी और वह समाज में सम्मानजनक तरीके से जी सकता है। कहा कि मैं और मेरे पति इतना तनख्वाह पाते हैं कि आराम की जिंदगी जी सकते हैं, लेकिन अपने समाज के लोगों को जागरूक करने के लिए हम लोग निकल पड़े हैं। जब आपलोग जागरूक हो जाएंगे तो आपका अधिकार आपसे कोई नहीं छीन सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग माँ-बाप को जीते जी पानी तक नहीं पिलाते हैं और मरने के बाद न जाने क्या क्या करते हैं। दलित समाज के लोगों को आंबेडकर द्वारा बताए हुए रास्ते पर चलते हुए एकजुट और संगठित होकर आगे बढ़ने की जरूरत है। इसके पूर्व समिति के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद, प्रेमशंकर, वृजेश आदि ने श्रीमती चौधरी का स्वागत किया। इस मौके पर डॉ. रामदयाल जोशी, अल्पना चौधरी, शारदा चौधरी, राघवेंद्र आजाद, सुनील आदर्श, हृदयानंद, शुभम आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता सत्यदेव दास व संचालन राकेश मास्टर ने किया।
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उन्होंने कहा कि आंबेडकर शिक्षा पर बहुत जोर देते थे। उनका कहना था कि शिक्षा ही समाज में समानता ला सकती है। जब मनुष्य शिक्षित हो जाता है तब उसमें विवेक और सोचने की शक्ति पैदा हो जाती है। तब वह न खुद अत्याचार सहन कर सकता है और न ही दूसरों पर अत्याचार होते देख सकता है। बाबा साहेब ने दलितों को वह सारे मौलिक अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ी, जिसे दलितों को सख्त जरूरत थी और वह समाज में सम्मानजनक तरीके से जी सकता है। कहा कि मैं और मेरे पति इतना तनख्वाह पाते हैं कि आराम की जिंदगी जी सकते हैं, लेकिन अपने समाज के लोगों को जागरूक करने के लिए हम लोग निकल पड़े हैं। जब आपलोग जागरूक हो जाएंगे तो आपका अधिकार आपसे कोई नहीं छीन सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग माँ-बाप को जीते जी पानी तक नहीं पिलाते हैं और मरने के बाद न जाने क्या क्या करते हैं। दलित समाज के लोगों को आंबेडकर द्वारा बताए हुए रास्ते पर चलते हुए एकजुट और संगठित होकर आगे बढ़ने की जरूरत है। इसके पूर्व समिति के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद, प्रेमशंकर, वृजेश आदि ने श्रीमती चौधरी का स्वागत किया। इस मौके पर डॉ. रामदयाल जोशी, अल्पना चौधरी, शारदा चौधरी, राघवेंद्र आजाद, सुनील आदर्श, हृदयानंद, शुभम आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता सत्यदेव दास व संचालन राकेश मास्टर ने किया।
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