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Bahraich News: कोर्ट को गुमराह कर कागजों में शुरू करा दिया ट्रॉमा सेंटर
Tue, 06 May 2025 12:21 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Tue, 06 May 2025 12:21 AM IST
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बहराइच के चांदपुरा स्थित ट्राॅमा सेंटर।
बहराइच। शहर के चांदपुरा में ट्रॉमा सेंटर संचालन के नाम पर स्वास्थ्य विभाग हाईकोर्ट को भी गुमराह कर रहा है। एक पीआईएल के जवाब में विभाग ने कोर्ट में हलफनामा देकर संचालन का दावा तो जरूर कर दिया, लेकिन मौके पर यह केवल कागजों में ही चल रहा है। इसलिए अब भी दुर्घटना के समय घायलों को मेडिकल कॉलेज की आपातकाल सेवा में ही पहुंचाया जा रहा है। वहां गंभीर होने पर मरीजों को लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया जा रहा है।
जिले के पुराने मलेरिया अस्पताल परिसर में वर्ष 2016 में ट्रॉमा सेंटर की नींव रखी गई थी। यह 2019 में बनकर तैयार हुआ और 2020 में स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया। 40 बेड के ट्रॉमा सेंटर में इलाज की सारी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन इलाज करने वाला कोई नहीं था। इस पर एक संस्था ने हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की थी। इसी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने रातों रात छह अप्रैल को ट्रॉमा सेंटर बहराइच के लिए छह चिकित्सकों के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती करते हुए कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दिया कि ट्रॉमा सेंटर का संचालन कर दिया गया है। लेकिन मौके पर स्थिति एकदम अलग है। यहां सोमवार को निर्माण के ही अधूरे कार्य को पूरा कराया जा रहा था। इसलिए इस आदेश के एक माह पूरे होने पर भी यहां न तो किसी घायल को भर्ती किया गया और न ही यहां अभी तक किसी प्रकार का ऑपरेशन ही हो पाया। चिकित्सक कब आते हैं, कब जाते हैं, किसी को मालूम नहीं। कागजों पर संचालित होने वाले ट्रॉमा सेंटर के बावजूद दुर्घटना के घायलों को मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में ही लाया जा रहा है। वहां हालत में सुधार न होने के कारण उन्हें ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर किया जा रहा है।
सृजित पद भी नहीं भरे गए
ट्रॉमा सेंटर में कुल 61 पद सृजित किए गए थे। इनमें दो जनरल सर्जन, दो आर्थोपेडिक सर्जन, 15 नर्स, छह इमरजेंसी डॉक्टर और नौ मल्टी टास्क वर्कर सहित अन्य शामिल हैं। इनमें से केवल 27 लोगों की तैनाती हुई है। इसमें तीन ईएमओ, एक आर्थोपेडिक सर्जन व एक जनरल सर्जन के साथ पैरामेडिकल स्टाफ शामिल है।
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निर्माण में खर्च हुए तीन करोड़
ट्रॉमा सेंटर के निर्माण पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। कई वर्ष से कार्य पूरा होने का दावा करने के बाद भी यहां सेवाएं शुरू नहीं हो पाईं। अब जब हाईकोर्ट भी इस मामले को संज्ञान में ले चुका है तो वहां कागजों का खेल चल रहा है।
साफ-सफाई हो रही है। एक दो दिन में पूरी तरह से ट्रॉमा सेंटर शुरू हो जाएगा। -डाॅ. संजय शर्मा, सीएमओ
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जिले के पुराने मलेरिया अस्पताल परिसर में वर्ष 2016 में ट्रॉमा सेंटर की नींव रखी गई थी। यह 2019 में बनकर तैयार हुआ और 2020 में स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया। 40 बेड के ट्रॉमा सेंटर में इलाज की सारी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन इलाज करने वाला कोई नहीं था। इस पर एक संस्था ने हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की थी। इसी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने रातों रात छह अप्रैल को ट्रॉमा सेंटर बहराइच के लिए छह चिकित्सकों के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती करते हुए कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दिया कि ट्रॉमा सेंटर का संचालन कर दिया गया है। लेकिन मौके पर स्थिति एकदम अलग है। यहां सोमवार को निर्माण के ही अधूरे कार्य को पूरा कराया जा रहा था। इसलिए इस आदेश के एक माह पूरे होने पर भी यहां न तो किसी घायल को भर्ती किया गया और न ही यहां अभी तक किसी प्रकार का ऑपरेशन ही हो पाया। चिकित्सक कब आते हैं, कब जाते हैं, किसी को मालूम नहीं। कागजों पर संचालित होने वाले ट्रॉमा सेंटर के बावजूद दुर्घटना के घायलों को मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में ही लाया जा रहा है। वहां हालत में सुधार न होने के कारण उन्हें ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर किया जा रहा है।
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सृजित पद भी नहीं भरे गए
ट्रॉमा सेंटर में कुल 61 पद सृजित किए गए थे। इनमें दो जनरल सर्जन, दो आर्थोपेडिक सर्जन, 15 नर्स, छह इमरजेंसी डॉक्टर और नौ मल्टी टास्क वर्कर सहित अन्य शामिल हैं। इनमें से केवल 27 लोगों की तैनाती हुई है। इसमें तीन ईएमओ, एक आर्थोपेडिक सर्जन व एक जनरल सर्जन के साथ पैरामेडिकल स्टाफ शामिल है।
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निर्माण में खर्च हुए तीन करोड़
ट्रॉमा सेंटर के निर्माण पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। कई वर्ष से कार्य पूरा होने का दावा करने के बाद भी यहां सेवाएं शुरू नहीं हो पाईं। अब जब हाईकोर्ट भी इस मामले को संज्ञान में ले चुका है तो वहां कागजों का खेल चल रहा है।
साफ-सफाई हो रही है। एक दो दिन में पूरी तरह से ट्रॉमा सेंटर शुरू हो जाएगा। -डाॅ. संजय शर्मा, सीएमओ