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Bahraich News: नौ साल में दूसरी बार सरयू नहर में मिला बाघ का शव
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मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट के जंगलों से होकर गुजरने वाली सरयू नहर शनिवार को नौ साल बाद फिर बाघ की मौत की गवाह बनी। मोतीपुर रेंज में हसुलिया पुल के नीचे नहर में वयस्क नर बाघ का शव पानी में उतराता मिला। सूचना पर वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की भीड़ हटाकर शव को बाहर निकलवाया।
डीएफओ अपूर्व दीक्षित के अनुसार बाघ की उम्र करीब आठ से नौ वर्ष थी। स्थानीय चिकित्सकों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। प्रारंभिक जांच में ब्लंट फोर्स ट्रॉमा यानी किसी भारी वस्तु की चोट अथवा तेज टक्कर से गंभीर आंतरिक चोट के संकेत मिले हैं। हालांकि चोट किस परिस्थिति में लगी और यही मौत की वजह बनी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। बिसरा और अन्य नमूने जांच के लिए आईवीआरआई, बरेली भेजे गए हैं। विभागीय जांच भी जारी है।
वन विभाग के अनुसार इससे पहले 30 अगस्त 2017 को ककरहा रेंज के गंगापुर के पास इसी सरयू नहर की शाखा में करीब दो वर्ष के नर बाघ का शव मिला था। उस समय बाघ की मौत में जहरीले पदार्थ के इस्तेमाल की आशंका जताई गई थी। बाद में जाल लगाने वाले एक ग्रामीण को गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि जाल में फंसने के बाद बाघ को नहर में फेंका गया होगा।
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रेंज बदली, नहर का जल तंत्र वही
नौ साल के अंतराल में घटनास्थल की रेंज जरूर बदल गई। वर्ष 2017 में बाघ का शव ककरहा रेंज में मिला था, जबकि इस बार मोतीपुर रेंज में मिला है। हालांकि दोनों घटनाएं सरयू नहर तंत्र से जुड़ी हैं। एक ही नहर की शाखा में दूसरी बार बाघ का शव मिलने से नहर और आसपास के क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही तथा निगरानी व्यवस्था भी जांच के दायरे में है।
वाहन की टक्कर समेत कई पहलुओं की जांच
प्रारंभिक जांच में वाहन की टक्कर से बाघ को गंभीर चोट लगने की आशंका है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि बाघ को चोट कहां और किन परिस्थितियों में लगी। वह किसी वाहन की चपेट में आया, नहर में गिरने से घायल हुआ या किसी अन्य कारण से गंभीर चोट लगी और बाद में शव नहर तक पहुंचा, इसका पता आईवीआरआई की जांच रिपोर्ट और विभागीय जांच के बाद ही चल सकेगा।
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डीएफओ अपूर्व दीक्षित के अनुसार बाघ की उम्र करीब आठ से नौ वर्ष थी। स्थानीय चिकित्सकों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। प्रारंभिक जांच में ब्लंट फोर्स ट्रॉमा यानी किसी भारी वस्तु की चोट अथवा तेज टक्कर से गंभीर आंतरिक चोट के संकेत मिले हैं। हालांकि चोट किस परिस्थिति में लगी और यही मौत की वजह बनी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। बिसरा और अन्य नमूने जांच के लिए आईवीआरआई, बरेली भेजे गए हैं। विभागीय जांच भी जारी है।
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वन विभाग के अनुसार इससे पहले 30 अगस्त 2017 को ककरहा रेंज के गंगापुर के पास इसी सरयू नहर की शाखा में करीब दो वर्ष के नर बाघ का शव मिला था। उस समय बाघ की मौत में जहरीले पदार्थ के इस्तेमाल की आशंका जताई गई थी। बाद में जाल लगाने वाले एक ग्रामीण को गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि जाल में फंसने के बाद बाघ को नहर में फेंका गया होगा।
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रेंज बदली, नहर का जल तंत्र वही
नौ साल के अंतराल में घटनास्थल की रेंज जरूर बदल गई। वर्ष 2017 में बाघ का शव ककरहा रेंज में मिला था, जबकि इस बार मोतीपुर रेंज में मिला है। हालांकि दोनों घटनाएं सरयू नहर तंत्र से जुड़ी हैं। एक ही नहर की शाखा में दूसरी बार बाघ का शव मिलने से नहर और आसपास के क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही तथा निगरानी व्यवस्था भी जांच के दायरे में है।
वाहन की टक्कर समेत कई पहलुओं की जांच
प्रारंभिक जांच में वाहन की टक्कर से बाघ को गंभीर चोट लगने की आशंका है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि बाघ को चोट कहां और किन परिस्थितियों में लगी। वह किसी वाहन की चपेट में आया, नहर में गिरने से घायल हुआ या किसी अन्य कारण से गंभीर चोट लगी और बाद में शव नहर तक पहुंचा, इसका पता आईवीआरआई की जांच रिपोर्ट और विभागीय जांच के बाद ही चल सकेगा।