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पीड़ितों को नहीं मिला खाद्यान्न
अमर उजाला/बहराइच
Updated Mon, 08 May 2017 11:51 PM IST
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अाग लगने से जले मकान
- फोटो : अमर उजाला
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नवाबगंज के फुलटेकरा गांव में अग्निपीड़ितों का हाल जानने के लिए सांसद, जिलाधिकारी व एसपी पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को तिरपाल दिया, लेकिन आग से सब कुछ गंवा चुके ग्रामीणों को अभी तक तहसील प्रशासन और कोई सहायता नहीं मुहैया करा सका है, जिससे सभी पीड़ित खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। ग्रामीण दाने-दाने को मोहताज हैं। वे जिला प्रशासन पर हीलाहवाली बरतने का आरोप लगा रहे हैं।
नवाबगंज विकास खंड के फुलटेकरा गांव में शनिवार देर रात अज्ञात कारणों से आग लग गई, जिसमें 200 से अधिक ग्रामीणों के मकान जलकर राख हो गए थे। सोमवार को सांसद सावित्रीबाईफुले, जिलाधिकारी अजयदीप सिंह, एसपी सुनील सक्सेना, थानाध्यक्ष सूरज प्रसाद, तहसीलदार घनश्याम आदि अधिकारियों ने पहुंचकर मुआयना किया। सांसद ने कुछ पीड़ितों को तिरपाल बांटे।
वहीं दो दिन से 200 से अधिक घरों के 1200 लोग खुले आसमान तले रहने को मजबूर हैं। ग्रामीण लल्लू, विश्राम, मदनलाल, जल्ल, साबितराम, छोटे, रामाधार का कहना कि ग्रामीण भूख प्यास से परेशान हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उनकी सारी संपत्ति जलकर राख हो गई है। लेकिन जिला प्रशासन सिर्फ अभी तक प्लास्टिक पन्नी ही दे पाया है। ज्यादातर पीड़ित ग्रामीण खुले आसमान के नीचे दो दिनों से रह रहे हैं।
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इसके अलावा गांव के बाहर बने विद्यालय में शरण लिए हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनको रहने के लिए छत, खाने के लिए अनाज व पीने के लिए पानी की जरूरत है। लेकिन प्रशासन इस पर ध्यान न देकर दौरा कर रहा है। सभी ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है।
फुलटेकरा गांव में हुए अग्निकांड में वृद्ध छोटे और वृद्धा प्यारा देवी झुलस गए थे। अग्निकांड में कई मवेशी भी झुलसे थे। लेकिन गांव में अभी तक इलाज के कोई समुचित इंतजाम नहीं किए गए हैं। पशु चिकित्सा विभाग और स्वास्थ्य महकमे की कोई टीम भी गांव तक नहीं पहुंची है।
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नवाबगंज विकास खंड के फुलटेकरा गांव में शनिवार देर रात अज्ञात कारणों से आग लग गई, जिसमें 200 से अधिक ग्रामीणों के मकान जलकर राख हो गए थे। सोमवार को सांसद सावित्रीबाईफुले, जिलाधिकारी अजयदीप सिंह, एसपी सुनील सक्सेना, थानाध्यक्ष सूरज प्रसाद, तहसीलदार घनश्याम आदि अधिकारियों ने पहुंचकर मुआयना किया। सांसद ने कुछ पीड़ितों को तिरपाल बांटे।
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वहीं दो दिन से 200 से अधिक घरों के 1200 लोग खुले आसमान तले रहने को मजबूर हैं। ग्रामीण लल्लू, विश्राम, मदनलाल, जल्ल, साबितराम, छोटे, रामाधार का कहना कि ग्रामीण भूख प्यास से परेशान हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उनकी सारी संपत्ति जलकर राख हो गई है। लेकिन जिला प्रशासन सिर्फ अभी तक प्लास्टिक पन्नी ही दे पाया है। ज्यादातर पीड़ित ग्रामीण खुले आसमान के नीचे दो दिनों से रह रहे हैं।
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इसके अलावा गांव के बाहर बने विद्यालय में शरण लिए हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनको रहने के लिए छत, खाने के लिए अनाज व पीने के लिए पानी की जरूरत है। लेकिन प्रशासन इस पर ध्यान न देकर दौरा कर रहा है। सभी ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है।
फुलटेकरा गांव में हुए अग्निकांड में वृद्ध छोटे और वृद्धा प्यारा देवी झुलस गए थे। अग्निकांड में कई मवेशी भी झुलसे थे। लेकिन गांव में अभी तक इलाज के कोई समुचित इंतजाम नहीं किए गए हैं। पशु चिकित्सा विभाग और स्वास्थ्य महकमे की कोई टीम भी गांव तक नहीं पहुंची है।