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धर्म-जाति की राजनीति न करने वाला हो नुमाइंदा
अमर उजाला/बहराइच
Updated Sat, 21 Jan 2017 11:58 PM IST
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अमर उजाला के कार्यक्रम में जुटे युवा
- फोटो : अमर उजाला
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प्रत्येक चुनाव में जनप्रतिनिधियों से उम्मीदें होती हैं। उसी उम्मीद पर वोट करते हैं। लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि दगा दे जाते हैं। धर्म-जाति की राजनीति से परे हटकर सियासत करे। नुमाइंदा पढ़ा-लिखा हो, तभी पिछड़े जिले बहराइच का विकास संभव है। व्यावसायिक व तकनीकी शिक्षा के प्रति नुमाइंदे को संवेदनशील होना चाहिए। तभी पढ़ाई के बाद छात्र बेरोजगार न रहते हुए स्वावलंबी बन सकेंगे।
आजादी के बाद भी जिले के विकास का पहिया थमा हुआ है। फोकस ग्रुप कार्यक्रम के तहत शनिवार को जब अमर उजाला सरोकार के तहत कैंपस कार्यक्रम का आयोजन हुआ तो छात्रों व युवाओं ने स्वच्छ, ईमानदार व पढ़े-लिखे नुमाइंदे की पुरजोर वकालत की। उन्होंने बेबाकी से कहा कि हमारा जन प्रतिनिधि स्वच्छ, ईमानदार छवि का होने के साथ ही पढ़ा-लिखा होना चाहिए।
शहर के हुजूरपुर मार्ग पर स्थित गुरु कृपा डिवाइन ग्रेस स्कूल परिसर में अमर उजाला की ओर से कैंपस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें शामिल छात्र व युवाओं को जब जनप्रतिनिधि कैसा हो, के मुद्दे पर कुरेदा गया तो सभी ने बेबाकी से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया।
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छात्र व युवा बोले कि चुनाव के समय प्रत्याशी बड़े-बड़े वादे करते हैं। फिर भूल जाते हैं। ऐसे में अब मतदाताओं को भी आत्ममंथन की जरूरत है। जिससे उन्हें पांच साल उपेक्षित न रहना पड़े। कुछ लोगों ने तकनीकी व व्यवसायिक शिक्षा तो कुछ ने रोजगार और तराई को पिछड़ेपन से उबारने की वकालत की।
कहा कि रहनुमा अंगूठा टेक न हो। छात्रों, युुवाओं व बेरोजगारों की भावनाओं को समझे और उन्हें मूर्त रूप दे सके। एक स्वर से कहा कि बेदाग, ईमानदार और स्वच्छ छवि का जनप्रतिनिधि ही स्वीकार होगा।
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आजादी के बाद भी जिले के विकास का पहिया थमा हुआ है। फोकस ग्रुप कार्यक्रम के तहत शनिवार को जब अमर उजाला सरोकार के तहत कैंपस कार्यक्रम का आयोजन हुआ तो छात्रों व युवाओं ने स्वच्छ, ईमानदार व पढ़े-लिखे नुमाइंदे की पुरजोर वकालत की। उन्होंने बेबाकी से कहा कि हमारा जन प्रतिनिधि स्वच्छ, ईमानदार छवि का होने के साथ ही पढ़ा-लिखा होना चाहिए।
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शहर के हुजूरपुर मार्ग पर स्थित गुरु कृपा डिवाइन ग्रेस स्कूल परिसर में अमर उजाला की ओर से कैंपस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें शामिल छात्र व युवाओं को जब जनप्रतिनिधि कैसा हो, के मुद्दे पर कुरेदा गया तो सभी ने बेबाकी से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया।
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छात्र व युवा बोले कि चुनाव के समय प्रत्याशी बड़े-बड़े वादे करते हैं। फिर भूल जाते हैं। ऐसे में अब मतदाताओं को भी आत्ममंथन की जरूरत है। जिससे उन्हें पांच साल उपेक्षित न रहना पड़े। कुछ लोगों ने तकनीकी व व्यवसायिक शिक्षा तो कुछ ने रोजगार और तराई को पिछड़ेपन से उबारने की वकालत की।
कहा कि रहनुमा अंगूठा टेक न हो। छात्रों, युुवाओं व बेरोजगारों की भावनाओं को समझे और उन्हें मूर्त रूप दे सके। एक स्वर से कहा कि बेदाग, ईमानदार और स्वच्छ छवि का जनप्रतिनिधि ही स्वीकार होगा।