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सियासत के लिए तय हो योग्यता
अमर उजाला/बहराइच
Updated Tue, 24 Jan 2017 11:49 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सियासत का स्तर काफी गिर गया है। अपराधी और अयोग्य लोगों को राजनीतिक दल बढ़-चढ़कर टिकट दे रहे हैं। यह प्रवृत्ति घातक है। सियासत के लिए योग्यता तय हो। अंगूठा टेक रहनुमा नहीं चाहिए। यह कहना है जिले के युवाओं और प्रोफेसनल्स का।
अमर उजाला फोकस ग्रुप के तहत किसान पीजी कॉलेज में मंगलवार को परिचर्चा का आयोजन हुआ तो सभी ने एक स्वर से कहा कि हमारा जन प्रतिनिधि स्वच्छ, ईमानदार छवि का होने के साथ ही पढ़ा-लिखा होना चाहिए। अयोग्य उम्मीदवार न तो क्षेत्र को विकास कर सकता है और न ही सदन में समस्याएं उठा सकता है। प्रलोभन देने वाले उम्मीदवार से भी बचने की जरूरत है। पिछड़े तराई क्षेत्र में रोजगार के संसाधनों की कमी को पूरा करने वाला नुमाइंदा चाहिए।
किसान पीजी कॉलेज में आयोजित फोकस ग्रुप में छात्रों, युवाओं व प्रोफेसनल्स को आमंत्रित कर हमारा नेता कैसा हो, मुद्दे पर राय जानी गई तो सभी ने बेबाकी से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। आजादी के बाद से अब तक जनप्रतिनिधियों से मिली उपेक्षा सभी के चेहरों पर झलक रही थी।
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कुछ लोगों ने तराई को पिछड़ेपन से उबारने के लिए योग्य उम्मीदवार की वकालत की तो कुछ ने कहा कि प्रतिवर्ष स्कूल, कॉलेजों से शिक्षित होकर निकल रहे बेरोजगारों के लिए रोजगार का सृजन करने वाले नुमाइंदे की जरूरत है।
ऐसा जनप्रतिनिधि चाहिए जो अंगूठा टेक न हो। बेरोजगारों को रोजगारी बना सके। रोजगार के नए संसाधनों को विकसित करे। साथ ही शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए काम करने के साथ ही आम आदमी की समस्याओं को भी नजरंदाज न करे।
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अमर उजाला फोकस ग्रुप के तहत किसान पीजी कॉलेज में मंगलवार को परिचर्चा का आयोजन हुआ तो सभी ने एक स्वर से कहा कि हमारा जन प्रतिनिधि स्वच्छ, ईमानदार छवि का होने के साथ ही पढ़ा-लिखा होना चाहिए। अयोग्य उम्मीदवार न तो क्षेत्र को विकास कर सकता है और न ही सदन में समस्याएं उठा सकता है। प्रलोभन देने वाले उम्मीदवार से भी बचने की जरूरत है। पिछड़े तराई क्षेत्र में रोजगार के संसाधनों की कमी को पूरा करने वाला नुमाइंदा चाहिए।
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किसान पीजी कॉलेज में आयोजित फोकस ग्रुप में छात्रों, युवाओं व प्रोफेसनल्स को आमंत्रित कर हमारा नेता कैसा हो, मुद्दे पर राय जानी गई तो सभी ने बेबाकी से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। आजादी के बाद से अब तक जनप्रतिनिधियों से मिली उपेक्षा सभी के चेहरों पर झलक रही थी।
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कुछ लोगों ने तराई को पिछड़ेपन से उबारने के लिए योग्य उम्मीदवार की वकालत की तो कुछ ने कहा कि प्रतिवर्ष स्कूल, कॉलेजों से शिक्षित होकर निकल रहे बेरोजगारों के लिए रोजगार का सृजन करने वाले नुमाइंदे की जरूरत है।
ऐसा जनप्रतिनिधि चाहिए जो अंगूठा टेक न हो। बेरोजगारों को रोजगारी बना सके। रोजगार के नए संसाधनों को विकसित करे। साथ ही शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए काम करने के साथ ही आम आदमी की समस्याओं को भी नजरंदाज न करे।