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Bahraich News: बघेल तालाब पर अतिक्रमण की शिकायत पर एनजीटी ने मांगा जवाब

Fri, 02 May 2025 11:38 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Fri, 02 May 2025 11:38 PM IST
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NGT sought response on complaint of encroachment on Baghel pond
पयागपुर (बहराइच)। बघेल तालाब को पर्यटन के क्षेत्र में प्रमुख रूप से देखा जाता रहा है। बघेल तालाब के आसपास काफी अतिक्रमण हो गया है। इसकी शिकायत एनजीटी से की गई थी। इस पर एनजीटी ने वन विभाग से जवाब मांगा है। पांच प्रश्न पर जवाब मांगे गए हैं। इसमें अतिक्रमण के साथ जलमग्न क्षेत्र व अब तक कराए गए विकास कार्य का ब्योरा मांगा गया है। इसके लिए डीएफओ ने एसडीएम को पत्र लिखा है।
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बहराइच वन प्रभाग के सुहेलवा वन्यजीव प्रभाग क्षेत्र के पयागपुर तहसील क्षेत्र में बघेल तालाब स्थित है। बघेल तालाब 1431 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। बघेल तालाब को प्रदेश के सबसे बड़े वेटलैंड के रूप में पहचान मिली हुई है। बघेल तालाब का मत्स्य आखेट का ठेका भी लाखों रुपये में प्रतिवर्ष मत्स्य पालन विभाग की ओर से कराया जाता है। इसके 121 हेक्टेयर में पानी भरा हुआ है, जबकि 441 हेक्टेयर का तालाब है। इसके आसपास नाला और पुनर्वास के साथ ही नवीन परती भूमि पड़ी हुई है। प्राइवेट फॉरेस्ट भी करीब 23 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। बघेल तालाब पर अतिक्रमण की शिकायत गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति राधेमोहन मिश्रा की ओर से एनजीटी को पत्र भेजकर की गई थी। इस मामले की सुनवाई एनजीटी में चल रही है। इस पर एनजीटी ने वन विभाग से जवाब तलब किया है। इसमें बघेल तालाब का राजस्व अभिलेखों के अनुसार कुल क्षेत्रफल, आसपास जलमग्न भूमि, राजस्व मानचित्र सहित, बघेल ताल पर किए गए अतिक्रमण, इस ताल से सटे जलमग्न क्षेत्र व उसका स्वामित्व, संरक्षित क्षेत्र में अब तक कराए गए विकासात्मक कार्य का ब्योरा देने को कहा गया है। इसके लिए डीएफओ अजीत सिंह ने एसडीएम पयागपुर को पत्र लिखा है।
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संरक्षण के बजाए होता है कारोबार
बघेल ताल को संरक्षित करने के लिए अभी तक कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। इसलिए पूरा क्षेत्र अव्यवस्थित है, जबकि यहां मछलियों के साथ ही प्रमुख रूप से कमल गट्टे और सिंघाड़े पैदा किए जाते हैं। इनका चोरी छिपे बड़े पैमाने पर कारोबार भी किया जाता है। वन विभाग की ओर से इसे रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए जाते हैं।
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