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Bahraich News: अपने कारीकोट में ग्रामीण पर्यटन का वैश्विक मॉडल
Tue, 19 Aug 2025 01:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Tue, 19 Aug 2025 01:18 AM IST
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कारीकोट गांव के किनारे जंगल में विचरण करते हिरन। -स्रोत : ग्रामीण
बहराइच। मनोरम
प्राकृतिक दृश्य, घने जंगल से घिरा, दुर्लभ वन्यजीव, पारंपरिक रहन-सहन, खान-पान...। अपने कारीकोट के ग्रामीणों ने इन्हें ही तरक्की का आधार बना लिया। होमस्टे की शुरुआत की। सीमावर्ती क्षेत्र में पर्यटन की अभिनव पहल की।
लोक संस्कृति, हस्तशिल्प व लोककला को प्रोत्साहित कर पर्यटन का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बन गया। अब 13 सितंबर को नई दिल्ली में इंडियन सबकॉन्टिनेंट रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म (आईसीआरटी) अवार्ड 2025 से गांव को सम्मानित किया जाएगा।
नेपाल सीमा से सटे छोटे से कारीकोट गांव ने अपनी धरोहर को पर्यटन से जोड़कर वैश्विक पहचान बना ली। आईसीआरटी के निर्णायक मंडल में शामिल अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने कारीकोट की पहल को जिम्मेदार पर्यटन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। अवार्ड के लिए चुनी गई संस्थाओं और गांवों को वन टू वॉच, सिल्वर और गोल्ड कैटेगरी में मान्यता दी जाएगी।
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पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कारीकोट का चयन सिर्फ एक गांव की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की गौरवगाथा है। यह अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य के करीब स्थित कारीकोट ने यह दिखा दिया कि गांव केवल कृषि तक सीमित नहीं हैं। वे सांस्कृतिक धरोहर, प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक समरसता के प्रतीक भी हो सकते हैं। प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि पर्यटन विभाग ग्रामीण पर्यटन को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है।
कारीकोट ऐसे बना सम्मान का हकदार
-होमस्टे व्यवस्था :
गांव में पर्यटकों को स्थानीय जीवन, थारू संस्कृति और ग्रामीण आतिथ्य का अनुभव देने के लिए ग्रामीणों ने अपने घर खोले।
-सीमा पर्यटन की पहल : नेपाल सीमा और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य के करीब होने का फायदा उठाकर पर्यटन को नए आयाम दिए। ग्रामीणों ने भारत-नेपाल सीमा की साझा विरासत से रूबरू कराया।
-रोजगार सृजन:
युवाओं, महिलाओं को हस्तशिल्प, भोजन और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ा गया, जिससे गांव में आर्थिक सशक्तीकरण की नई राह बनी।
-सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण : लोकनृत्य, पारंपरिक व्यंजन और हस्तशिल्प को संरक्षित किया गया। पर्यटकों तक पहुंचाकर उन्हें नया बाजार भी मिला।
इंडियन सबकॉन्टिनेंट में रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म को ऐसे समझिए
पर्यटन को इस तरह से विकसित करना जो पर्यावरण, स्थानीय समुदाय और सांस्कृतिक विरासत पर सकारात्मक प्रभाव डाले। इंडियन सबकॉन्टिनेंट में रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म का उद्देश्य पर्यटन से होने वाले नुकसान को कम करना और स्थानीय लोगों के जीवन को बेहतर बनाना। अंतरराष्ट्रीय मानक पर कारीकोट खरा उतरा है। (संवाद)
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प्राकृतिक दृश्य, घने जंगल से घिरा, दुर्लभ वन्यजीव, पारंपरिक रहन-सहन, खान-पान...। अपने कारीकोट के ग्रामीणों ने इन्हें ही तरक्की का आधार बना लिया। होमस्टे की शुरुआत की। सीमावर्ती क्षेत्र में पर्यटन की अभिनव पहल की।
लोक संस्कृति, हस्तशिल्प व लोककला को प्रोत्साहित कर पर्यटन का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बन गया। अब 13 सितंबर को नई दिल्ली में इंडियन सबकॉन्टिनेंट रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म (आईसीआरटी) अवार्ड 2025 से गांव को सम्मानित किया जाएगा।
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नेपाल सीमा से सटे छोटे से कारीकोट गांव ने अपनी धरोहर को पर्यटन से जोड़कर वैश्विक पहचान बना ली। आईसीआरटी के निर्णायक मंडल में शामिल अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने कारीकोट की पहल को जिम्मेदार पर्यटन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। अवार्ड के लिए चुनी गई संस्थाओं और गांवों को वन टू वॉच, सिल्वर और गोल्ड कैटेगरी में मान्यता दी जाएगी।
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पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कारीकोट का चयन सिर्फ एक गांव की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की गौरवगाथा है। यह अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य के करीब स्थित कारीकोट ने यह दिखा दिया कि गांव केवल कृषि तक सीमित नहीं हैं। वे सांस्कृतिक धरोहर, प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक समरसता के प्रतीक भी हो सकते हैं। प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि पर्यटन विभाग ग्रामीण पर्यटन को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है।
कारीकोट ऐसे बना सम्मान का हकदार
-होमस्टे व्यवस्था :
गांव में पर्यटकों को स्थानीय जीवन, थारू संस्कृति और ग्रामीण आतिथ्य का अनुभव देने के लिए ग्रामीणों ने अपने घर खोले।
-सीमा पर्यटन की पहल : नेपाल सीमा और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य के करीब होने का फायदा उठाकर पर्यटन को नए आयाम दिए। ग्रामीणों ने भारत-नेपाल सीमा की साझा विरासत से रूबरू कराया।
-रोजगार सृजन:
युवाओं, महिलाओं को हस्तशिल्प, भोजन और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ा गया, जिससे गांव में आर्थिक सशक्तीकरण की नई राह बनी।
-सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण : लोकनृत्य, पारंपरिक व्यंजन और हस्तशिल्प को संरक्षित किया गया। पर्यटकों तक पहुंचाकर उन्हें नया बाजार भी मिला।
इंडियन सबकॉन्टिनेंट में रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म को ऐसे समझिए
पर्यटन को इस तरह से विकसित करना जो पर्यावरण, स्थानीय समुदाय और सांस्कृतिक विरासत पर सकारात्मक प्रभाव डाले। इंडियन सबकॉन्टिनेंट में रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म का उद्देश्य पर्यटन से होने वाले नुकसान को कम करना और स्थानीय लोगों के जीवन को बेहतर बनाना। अंतरराष्ट्रीय मानक पर कारीकोट खरा उतरा है। (संवाद)