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बाढ़ से आठ गांवों को खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jul 2016 10:19 PM IST
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खेतों में घुसा बाढ़ का पानी
- फोटो : amarujala
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तराई व नेपाल के पहाड़ों पर भारी बारिश से घाघरा नदी का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ा है। इसके चलते महसी तहसील क्षेत्र में नदी में उफान के हालात बन गए हैं। रविवार रात से 80 बीघा खेत नदी में समा चुके हैं। इसके साथ ही बाढ़ का पानी आठ गांवों को घिरने लगा है।
इससे ग्रामीण दहशत में हैं। नदी की कटान भी जारी है। जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए बाढ़ चौकियों को सतर्क किया गया है। राजस्वकर्मियों को क्षेत्र की निगरानी की हिदायत दी गई है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज 41 सेंटीमीटर दूर है।
जिले में दो दिन हुई भारी बरसात और नेपाल के पहाड़ों पर निरंतर बारिश होने से घाघरा नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश साहनी के मुताबिक नदी का जलस्तर सोमवार दोपहर बाद 105.656 मीटर रिकॉर्ड किया गया जबकि खतरे का निशान 106.07 मीटर है।
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नदी खतरे के निशान से महज 41 सेंटीमीटर दूर है। जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि हो रही है। महसी तहसील क्षेत्र में नदी के उफनाने से रविवार रात से 80 बीघा से अधिक खेत पानी में समा चुके हैं।
बाढ़ का पानी ग्राम मंगलपुरवा, पिपरा, पिपरी, जरमापुर, टेपरी, गोलागंज, कायमपुर की तरफ बढ़ रहा है। जलस्तर में वृद्धि की इस स्थिति में मंगलवार तक आबादी में पानी घुसने की आशंका जताई जा रही है। इससे आठ गांवों के अस्तित्व को खतरा बढ़ गया है। हालात को देखते हुए ग्रामीण दहशत में हैं।
अभी तक ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के उपाय भी नहीं किये गये हैं। पानी बढ़ने और नदी के उफनाने की सूचना ग्रामीणों द्वारा तहसील को देने के बावजूद राहत व बचाव कार्य शून्य है। एसडीएम एसपी शुक्ला का कहना है कि अभी नेपाल से पानी नहीं छोड़ा गया है।
इसके बाद ही स्थिति बिगड़ने की आशंका है। बेलहा-बेहरौली तटबंध पर स्थित सभी बाढ़ चौकियों को सतर्क किया गया है। बाढ़ पीड़ितों के कैंप लगाए जाने के लिए जमीन का इंतजाम किया गया है।
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इससे ग्रामीण दहशत में हैं। नदी की कटान भी जारी है। जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए बाढ़ चौकियों को सतर्क किया गया है। राजस्वकर्मियों को क्षेत्र की निगरानी की हिदायत दी गई है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज 41 सेंटीमीटर दूर है।
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जिले में दो दिन हुई भारी बरसात और नेपाल के पहाड़ों पर निरंतर बारिश होने से घाघरा नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश साहनी के मुताबिक नदी का जलस्तर सोमवार दोपहर बाद 105.656 मीटर रिकॉर्ड किया गया जबकि खतरे का निशान 106.07 मीटर है।
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नदी खतरे के निशान से महज 41 सेंटीमीटर दूर है। जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि हो रही है। महसी तहसील क्षेत्र में नदी के उफनाने से रविवार रात से 80 बीघा से अधिक खेत पानी में समा चुके हैं।
बाढ़ का पानी ग्राम मंगलपुरवा, पिपरा, पिपरी, जरमापुर, टेपरी, गोलागंज, कायमपुर की तरफ बढ़ रहा है। जलस्तर में वृद्धि की इस स्थिति में मंगलवार तक आबादी में पानी घुसने की आशंका जताई जा रही है। इससे आठ गांवों के अस्तित्व को खतरा बढ़ गया है। हालात को देखते हुए ग्रामीण दहशत में हैं।
अभी तक ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के उपाय भी नहीं किये गये हैं। पानी बढ़ने और नदी के उफनाने की सूचना ग्रामीणों द्वारा तहसील को देने के बावजूद राहत व बचाव कार्य शून्य है। एसडीएम एसपी शुक्ला का कहना है कि अभी नेपाल से पानी नहीं छोड़ा गया है।
इसके बाद ही स्थिति बिगड़ने की आशंका है। बेलहा-बेहरौली तटबंध पर स्थित सभी बाढ़ चौकियों को सतर्क किया गया है। बाढ़ पीड़ितों के कैंप लगाए जाने के लिए जमीन का इंतजाम किया गया है।