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कॉन्वेंट स्कूल को मात दे रहा परिषदीय विद्यालय
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फखरपुर के प्राथमिक विद्यालय सरसठ बिटौरा में आयोजित योग शिविर में योगाभ्यास करते बच्चे।
- फोटो : BAHRAICH
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बौंडी (बहराइच)। प्रदेश सरकार की ओर से संचालित सरकारी परिषदीय स्कूलों का नाम सुनते ही लोगों के जेहन में एक ही बात आती है कि इन विद्यालयों में पठन-पाठन में लापरवाही बरती जाती है। प्रदेश के सीएम ने भी सत्ता की कमान संभालते ही इन स्कूलों की बदहाली को स्वीकार करते हुए इनके स्तर को बेहतर बनाने के प्रयास की बात कही, लेकिन हम आपको जिले के एक ऐसे प्राथमिक विद्यालय की हकीकत से रूबरू करा रहे हैं, जिसे जानने के बाद आपके मन में इन सरकारी विद्यालयों व उनमें शिक्षा देने वाले शिक्षकों के बारे में बनी नकारात्मक सोच अपने आप ही बदलने के लिए मजबूर कर देगी।
इस विद्यालय में पठन-पाठन का कार्य देखकर आप खुद कहने को विवश हो जाएंगे कि शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन का दौर जारी है। यहां के प्रभारी प्रधान शिक्षक इन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने के लिए जी जान से लगे हैं। विद्यालय में पढ़ने वाले इन बच्चों की पढ़ने की दक्षता को देखकर कॉन्वेंट स्कूल के बच्चे भी पीछे रह जाएंगे।
फखरपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सरसठ बिटौरा में 278 बच्चे पढ़ते हैं।। यह विद्यालय पूरे क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट शिक्षण व्यवस्था के लिए जाना जाता है। उच्च पदों पर विराजमान अभिभावक भी इसमें अपने बच्चों को प्रवेश दिलाने को लालायित रहते हैं। यह सब हो सका है प्राथमिक विद्यालय में तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक अवधेश कुमार झा की मेहनत और कुछ नया करने के जुनून से। उन्होंने अन्य प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को भी प्रेरित किया और यहां की शिक्षण व्यवस्था चमक गई। व्यवस्था परिवर्तन के लिए अवधेश कुमार झा ने काफी मेहनत की है। जनपद के अन्य शिक्षक भी इनसे प्रेरणा ले रहे हैं।
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18 नवंबर 2015 को प्रधान शिक्षक के रूप में प्राथमिक विद्यालय सरसठ बिटौरा में उनकी तैनाती हुई। उन्होंने सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों के भ्रम को तोड़ने व व्यवस्था परिवर्तन की ठान ली और इसी में अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया। इस स्कूल में जब उनकी तैनाती हुई तो महज 10-15 बच्चे भी पढ़ने नहीं आते थे। अवधेश कुमार झा ने स्कूल की तस्वीर बदलने की ठान ली। गांव के लोगों और अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरुक किया। विद्यालय में नामांकन बढ़ाने के साथ बच्चों की उपस्थिति के लिए कई अनूठे नवाचार किए। जिसका परिणाम यह हुआ कि प्रतिदिन औसतन 85 फीसदी बच्चे पूरी ड्रेस में उपस्थित रहते हैं।
संख्या बढ़ाने के साथ उन्हें बेहतर शिक्षा देने के लिए भी लगातार प्रयासरत रहे। आज विद्यालय में 278 छात्र हैं। इन सभी छात्रों पढ़ाई में कॉन्वेन्ट स्कूल के बच्चों को पीछे छोड़ दिया है। सभी छात्र अंग्रेजी, हिंदी व गणित विषयों में औरों की अपेक्षा काफी तेज हैं। विद्यालय में हिंदी और अंग्रेजी दोनों में परीक्षाएं होती हैं। यहां पर आधुनिक व्हाइट बोर्ड, ग्रीन बोर्ड की भी व्यवस्था है। स्वच्छता व पर्यावरण को लेकर भी उन्होंने काफी कुछ किया। विद्यालय परिसर पूरी तरह से साफ-सुथरा है और तरह-तरह के फूल व पौधे लहलहा रहे हैं। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के लिये पहले योगा व पीटी को उन्होंने प्रार्थना सभा में शामिल किया। योग में प्रभारी प्रधान शिक्षक अवधेश कुमार झा द्वारा बच्चों को पद्मासन, भ्रामरी, शीतली, हास्यासन, भ्रष्तिका, सूर्य नमस्कार समेत कई आसनों को सिखाया जाता है।
योग के बाद बच्चों को प्रार्थना, सामान्य ज्ञान व शरीर की साफ सफाई की विशेषताओं के साथ-साथ बीमारी से बचाव के बारे में बताया जाता है। विद्यालय का अपना पुस्तकालय व खेल के आधुनिक संसाधन भी है। विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक अवधेश कुमार झा, सहायक शिक्षक आनंद कुमार शुक्ला भी तैनात हैं। नियमित विद्यालय आना, साफ कपड़ों के साथ पूरे ड्रेस में कतारबद्व होकर योगा में ध्यान लगाना भी यहां पढ़ने वाले बच्चों की दिनचर्या में शामिल हो गया है।
विद्यालय में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को प्रधान शिक्षक अवधेश कुमार झा कॉपियों से लेकर जरूरत के लगभग सभी सामानों को अपने वेतन के पैसों से लाकर पूरा करते हैं। इस विद्यालय के पठनीय वातावरण व बच्चों के अच्छे प्रदर्शन के कारण पहले तो अपने विकास क्षेत्र के आदर्श विद्यालय में चयन हुआ। उसके बाद इसका चयन अंग्रेजी माध्यम के लिए भी हो गया है। अवधेश कुमार झा कहते हैं कि परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षक प्रशिक्षित व योग्य हैं, अगर वह थोड़ी सी मेहनत करें तो प्राथमिक शिक्षा की पूरी तस्वीर बदल जाएगी।
कॉन्वेंट से कटवाए नाम
शिक्षक अवधेश कुमार झा गांव में घूमकर लोगों से संपर्क करते हैं। इससे लोग काफी प्रभावित हुए और कॉन्वेंट स्कूल से अपने बच्चों का नाम कटवा लिया। जिसके बाद उनका प्रवेश प्राथमिक विद्यालय में करा लिया।
महज दो शिक्षक की तैनात
प्राथमिक विद्यालय में 278 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी प्रधान शिक्षक अवधेश कुमार झा, सहायक शिक्षक आनंद कुमार शुक्ल पर है। अध्यापकों की कमी इन शिक्षकों को भी खल रही है लेकिन इन बच्चों के भविष्य को तरासने में वे पूरी शिद्दत के साथ लगे रहते हैं।
स्कूलों को बेहतर बनाने में जुटें शिक्षक
प्राइमरी शिक्षा को और अधिक बेहतर बनाने की दिशा में सरकार नये कदम उठा रही है। कायाकल्प से संसाधनों को बढ़ाया गया है। शिक्षक अवधेश की तरह से मेहनत करें तो जरुर बदलाव नजर आएगा।
दिनेश यादव, बीएसए, बहराइच
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इस विद्यालय में पठन-पाठन का कार्य देखकर आप खुद कहने को विवश हो जाएंगे कि शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन का दौर जारी है। यहां के प्रभारी प्रधान शिक्षक इन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने के लिए जी जान से लगे हैं। विद्यालय में पढ़ने वाले इन बच्चों की पढ़ने की दक्षता को देखकर कॉन्वेंट स्कूल के बच्चे भी पीछे रह जाएंगे।
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फखरपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सरसठ बिटौरा में 278 बच्चे पढ़ते हैं।। यह विद्यालय पूरे क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट शिक्षण व्यवस्था के लिए जाना जाता है। उच्च पदों पर विराजमान अभिभावक भी इसमें अपने बच्चों को प्रवेश दिलाने को लालायित रहते हैं। यह सब हो सका है प्राथमिक विद्यालय में तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक अवधेश कुमार झा की मेहनत और कुछ नया करने के जुनून से। उन्होंने अन्य प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को भी प्रेरित किया और यहां की शिक्षण व्यवस्था चमक गई। व्यवस्था परिवर्तन के लिए अवधेश कुमार झा ने काफी मेहनत की है। जनपद के अन्य शिक्षक भी इनसे प्रेरणा ले रहे हैं।
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18 नवंबर 2015 को प्रधान शिक्षक के रूप में प्राथमिक विद्यालय सरसठ बिटौरा में उनकी तैनाती हुई। उन्होंने सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों के भ्रम को तोड़ने व व्यवस्था परिवर्तन की ठान ली और इसी में अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया। इस स्कूल में जब उनकी तैनाती हुई तो महज 10-15 बच्चे भी पढ़ने नहीं आते थे। अवधेश कुमार झा ने स्कूल की तस्वीर बदलने की ठान ली। गांव के लोगों और अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरुक किया। विद्यालय में नामांकन बढ़ाने के साथ बच्चों की उपस्थिति के लिए कई अनूठे नवाचार किए। जिसका परिणाम यह हुआ कि प्रतिदिन औसतन 85 फीसदी बच्चे पूरी ड्रेस में उपस्थित रहते हैं।
संख्या बढ़ाने के साथ उन्हें बेहतर शिक्षा देने के लिए भी लगातार प्रयासरत रहे। आज विद्यालय में 278 छात्र हैं। इन सभी छात्रों पढ़ाई में कॉन्वेन्ट स्कूल के बच्चों को पीछे छोड़ दिया है। सभी छात्र अंग्रेजी, हिंदी व गणित विषयों में औरों की अपेक्षा काफी तेज हैं। विद्यालय में हिंदी और अंग्रेजी दोनों में परीक्षाएं होती हैं। यहां पर आधुनिक व्हाइट बोर्ड, ग्रीन बोर्ड की भी व्यवस्था है। स्वच्छता व पर्यावरण को लेकर भी उन्होंने काफी कुछ किया। विद्यालय परिसर पूरी तरह से साफ-सुथरा है और तरह-तरह के फूल व पौधे लहलहा रहे हैं। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के लिये पहले योगा व पीटी को उन्होंने प्रार्थना सभा में शामिल किया। योग में प्रभारी प्रधान शिक्षक अवधेश कुमार झा द्वारा बच्चों को पद्मासन, भ्रामरी, शीतली, हास्यासन, भ्रष्तिका, सूर्य नमस्कार समेत कई आसनों को सिखाया जाता है।
योग के बाद बच्चों को प्रार्थना, सामान्य ज्ञान व शरीर की साफ सफाई की विशेषताओं के साथ-साथ बीमारी से बचाव के बारे में बताया जाता है। विद्यालय का अपना पुस्तकालय व खेल के आधुनिक संसाधन भी है। विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक अवधेश कुमार झा, सहायक शिक्षक आनंद कुमार शुक्ला भी तैनात हैं। नियमित विद्यालय आना, साफ कपड़ों के साथ पूरे ड्रेस में कतारबद्व होकर योगा में ध्यान लगाना भी यहां पढ़ने वाले बच्चों की दिनचर्या में शामिल हो गया है।
विद्यालय में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को प्रधान शिक्षक अवधेश कुमार झा कॉपियों से लेकर जरूरत के लगभग सभी सामानों को अपने वेतन के पैसों से लाकर पूरा करते हैं। इस विद्यालय के पठनीय वातावरण व बच्चों के अच्छे प्रदर्शन के कारण पहले तो अपने विकास क्षेत्र के आदर्श विद्यालय में चयन हुआ। उसके बाद इसका चयन अंग्रेजी माध्यम के लिए भी हो गया है। अवधेश कुमार झा कहते हैं कि परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षक प्रशिक्षित व योग्य हैं, अगर वह थोड़ी सी मेहनत करें तो प्राथमिक शिक्षा की पूरी तस्वीर बदल जाएगी।
कॉन्वेंट से कटवाए नाम
शिक्षक अवधेश कुमार झा गांव में घूमकर लोगों से संपर्क करते हैं। इससे लोग काफी प्रभावित हुए और कॉन्वेंट स्कूल से अपने बच्चों का नाम कटवा लिया। जिसके बाद उनका प्रवेश प्राथमिक विद्यालय में करा लिया।
महज दो शिक्षक की तैनात
प्राथमिक विद्यालय में 278 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी प्रधान शिक्षक अवधेश कुमार झा, सहायक शिक्षक आनंद कुमार शुक्ल पर है। अध्यापकों की कमी इन शिक्षकों को भी खल रही है लेकिन इन बच्चों के भविष्य को तरासने में वे पूरी शिद्दत के साथ लगे रहते हैं।
स्कूलों को बेहतर बनाने में जुटें शिक्षक
प्राइमरी शिक्षा को और अधिक बेहतर बनाने की दिशा में सरकार नये कदम उठा रही है। कायाकल्प से संसाधनों को बढ़ाया गया है। शिक्षक अवधेश की तरह से मेहनत करें तो जरुर बदलाव नजर आएगा।
दिनेश यादव, बीएसए, बहराइच