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ईमानदार व पढ़ा-लिखा हो हमारा नुमाइंदा
अमर उजाला/बहराइच
Updated Fri, 20 Jan 2017 11:40 PM IST
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अमर उजाला के कार्यक्रम में जुटे युवा
- फोटो : अमर उजाला
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चुने गए रहनुमाओं से जनता ने विकास की आस संजोई थी, लेकिन वोट के बदले उसे निराशा, भ्रष्टाचार ही नसीब हुआ। शिक्षा व्यवस्था ठहरी नजर आई। बेरोजगारों की फौज बढ़ती गई। ऐसे में अब तराई के युवा साफ छवि व ईमानदार और पढ़ा-लिखा नुमाइंदा चुनने की वकालत कर रहे हैं।
अमर उजाला के फोकस ग्रुप कार्यक्रम में शुक्रवार को परिचर्चा का आयोजन हुआ तो सभी ने बेबाकी से कहा कि हमारा जन प्रतिनिधि स्वच्छ, ईमानदार छवि का होने के साथ ही पढ़ा-लिखा होना चाहिए और जो तराई में रोजगार के संसाधनों का सृजन कर सके।
नानपारा नगर पालिका परिषद के सभागार में अमर उजाला फोकस ग्रुप कार्यक्रम में शामिल युवाओं व पहली बार मतदान करने जा रहे छात्र-छात्राओं को जब बेरोजगारी के मुद्दे पर कुरेदा गया तो सभी ने बेबाकी से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया।
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आजादी के बाद से अब तक जनप्रतिनिधियों से मिली उपेक्षा की पीड़ा सभी के चेहरों पर झलक रही थी। कुछ युवाओं ने तराई को पिछड़ेपन से उबारने की वकालत की तो कुछ ने कहा कि प्रतिवर्ष स्कूल, कॉलेजों से शिक्षित होकर निकल रहे बेरोजगारों के लिए रोजगार का सृजन करने वाले नुमाइंदे की जरूरत है।
ऐसा जनप्रतिनिधि चाहिए जो अंगूठा टेक न हो। बेरोजगारों की भावनाओं को समझे। शिक्षा को बढ़ावा दे। सभी ने एक स्वर से कहा कि बेदाग, ईमानदार और स्वच्छ छवि का जनप्रतिनिधि ही हमें स्वीकार है। कोरे आश्वासन देने वाला जनप्रतिनिधि नहीं चाहिए।
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अमर उजाला के फोकस ग्रुप कार्यक्रम में शुक्रवार को परिचर्चा का आयोजन हुआ तो सभी ने बेबाकी से कहा कि हमारा जन प्रतिनिधि स्वच्छ, ईमानदार छवि का होने के साथ ही पढ़ा-लिखा होना चाहिए और जो तराई में रोजगार के संसाधनों का सृजन कर सके।
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नानपारा नगर पालिका परिषद के सभागार में अमर उजाला फोकस ग्रुप कार्यक्रम में शामिल युवाओं व पहली बार मतदान करने जा रहे छात्र-छात्राओं को जब बेरोजगारी के मुद्दे पर कुरेदा गया तो सभी ने बेबाकी से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया।
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आजादी के बाद से अब तक जनप्रतिनिधियों से मिली उपेक्षा की पीड़ा सभी के चेहरों पर झलक रही थी। कुछ युवाओं ने तराई को पिछड़ेपन से उबारने की वकालत की तो कुछ ने कहा कि प्रतिवर्ष स्कूल, कॉलेजों से शिक्षित होकर निकल रहे बेरोजगारों के लिए रोजगार का सृजन करने वाले नुमाइंदे की जरूरत है।
ऐसा जनप्रतिनिधि चाहिए जो अंगूठा टेक न हो। बेरोजगारों की भावनाओं को समझे। शिक्षा को बढ़ावा दे। सभी ने एक स्वर से कहा कि बेदाग, ईमानदार और स्वच्छ छवि का जनप्रतिनिधि ही हमें स्वीकार है। कोरे आश्वासन देने वाला जनप्रतिनिधि नहीं चाहिए।