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भगीरथ के इंतजार में पयागपुर की वेटलैंड
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बहराइच। वैसे तो जनपद महाराजा सुहेलदेव की वीरभूमि होने और कतर्नियाघाट जैसी सेंच्युरी होने के कारण पूरे देश में मशहूर है, लेकिन तराई की इस धरती पर एक ऐसी नायाब धरोहर है, जिसके विकसित होने पर जिले को एक और बड़ी पहचान मिल सकती है। यह धरोहर कुछ और नहीं कथित तौर पर प्रदेश का सबसे बड़ा वेटलैंड (आर्द्रभूमि) है। कथित इसलिए क्योंकि सरकारी दस्तावेजों में प्रदेश के सबसे बड़े वेटलैंड में इसका जिक्र ही नहीं है। तालाब बघेल नामक इस वेटलैंड का स्वरूप बदलने के लिए कई वर्षों से क्षेत्र के लोगों द्वारा मांग की जा रही है, लेकिन किसी भी नेता या अधिकारी ने इस धरोहर की प्रासंगिकता जानने की कोशिश नहीं की।
तालाब बघेल नामक इस वेटलैंड का आच्छादन 14 वर्ग किमी. है। तीन दशक पहले वेटलैंड के तटीय क्षेत्रों के रहने वाले मल्लाह और बंगाली समुदाय के परिवारों की जीविका इसी वेटलैंड से चलती थी। बताया जाता है कि सूर्योदय से पूर्व ही सैकड़ों की संख्या में नाव वेटलैंड में उतरती थीं और लोग मछलियों का शिकार करते थे। लोग बताते हैं एक दो नहीं बल्कि हजारों की संख्या में परिवारों की अर्थव्यवस्था इसी वेटलैंड पर चलती थी।
धीरे-धीरे इस वेटलैंड में शैवाल बढ़ने लगा और जलीय वनस्पतियां अधिक पैदा होने से नाव नहीं घुस पाती है। ऐसे में लोगों को दूसरे रोजगार के ओर मुंह मोड़ना पड़ा। इस वेटलैंड में प्रचुर मात्रा में भसीड़, कमल का गट्टा, तिन्ना का चावल व सिंघाड़े के साथ-साथ रोहू, सींघी व सउर जैसी मछलियां मौजूद हैं। यह वेटलैंड पयागपुर और बहराइच सदर विधानसभा क्षेत्रों के बीच है। दोनों क्षेत्र के लोग अपने जनप्रतिनिधि और अधिकारियों से हमेशा मांग करते हैं कि इस वेटलैंड को रोजगारपरक बनाया जाए।
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2021 में बिजनौर के हैदरपुर वेटलैंड को रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिली है। हैदरपुर वेटलैंड देश का 47वां और यूपी का 10वां स्थान हैं। आगरा का सूर सरोवर वेटलैंड सात वर्ग किलोमीटर में है। सरकारी दस्तावेजों में यह प्रदेश का सबसे बड़ा वेटलैंड माना जाता है। इसका चयन रामसर साइट में किया गया है। जब हम पयागपुर के तालाब बघेल की बात करते हैं तो इसका आच्छादन 14 वर्ग किलोमीटर बताया जाता है। यानी यह प्रदेश का सबसे बड़ा वेटलैंड है।
1995 के आसपास जिले के जिलाधिकारी रहे अतुल बगाई ने जब इस वेटलैंड को देखा तो उन्होंने शासन में पैरोकारी कर यहां पर कई योजनाएं चलाईं। वह आगे कुछ और करते इससे पहले उनका तबादला हो गया। सपा सरकार में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पयागपुर पहुंचे थे तो पयागपुर राजघराने के राजा व सपा सरकार में राज्यमंत्री रहे सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने उनसे वेटलैंड का विकास कराने का जिक्र किया था। पयागपुर निवासी वरिष्ठ समाजसेवी अमिताभ त्रिपाठी ने भी कुछ काम शुरू कराया था।
यह क्षेत्र में जलस्तर बनाये रखने में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इसकी विशालता के दृष्टिकोण से इसे वह स्थान नहीं मिल पाया जिसका यह वास्तव में हकदार है। यहां पर कभी भारी संख्या में साइबेरियन पक्षी आते थे, लेकिन अब यहां से ये विदेशी मेहमान रूठ चुके हैं।
- परमेश्वर सिंह, पर्यावरण विद व इतिहासकार
यह अपनी नैसर्गिक सुंदरता व विशालता के कारण पर्यटन व रोजगार की अनेक संभावनाओं से परिपूर्ण है। यहां पैदा होने वाले जलीय उत्पादन पूरे प्रदेश में अलग पहचान बनाये हुए हैं, लेकिन धीरे-धीरे इसकी सीमा सिकुड़ती जा रही हैं जो चिंताजनक है।
- बलदेव प्रसाद पांडेय, सेवानिवृत्त शिक्षक, झाला तरहर
अपने गौरवशाली अतीत को समेटे यह वेटलैंड आज अपनी उपेक्षा पर आंसू बहा रहा है। नब्बे के दशक में तत्कालीन जिलाधिकारी अतुल बगाई के प्रयास से क्षेत्रवासियों में इसके विकास की उम्मीद जगी थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद किसी ने नहीं देखा।
- हरिओम रस्तोगी, वरिष्ठ समाजसेवी पयागपुर
तालाब बघेल कभी अपने स्वच्छ जल व जलीय उत्पादों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन शासकीय उपेक्षा के कारण अपनी पहचान खोता जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय तक पत्र देकर इसके विकास के लिए गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हो पा रही है।
- अमिताभ त्रिपाठी, समाजसेवी, पयागपुर
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तालाब बघेल नामक इस वेटलैंड का आच्छादन 14 वर्ग किमी. है। तीन दशक पहले वेटलैंड के तटीय क्षेत्रों के रहने वाले मल्लाह और बंगाली समुदाय के परिवारों की जीविका इसी वेटलैंड से चलती थी। बताया जाता है कि सूर्योदय से पूर्व ही सैकड़ों की संख्या में नाव वेटलैंड में उतरती थीं और लोग मछलियों का शिकार करते थे। लोग बताते हैं एक दो नहीं बल्कि हजारों की संख्या में परिवारों की अर्थव्यवस्था इसी वेटलैंड पर चलती थी।
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धीरे-धीरे इस वेटलैंड में शैवाल बढ़ने लगा और जलीय वनस्पतियां अधिक पैदा होने से नाव नहीं घुस पाती है। ऐसे में लोगों को दूसरे रोजगार के ओर मुंह मोड़ना पड़ा। इस वेटलैंड में प्रचुर मात्रा में भसीड़, कमल का गट्टा, तिन्ना का चावल व सिंघाड़े के साथ-साथ रोहू, सींघी व सउर जैसी मछलियां मौजूद हैं। यह वेटलैंड पयागपुर और बहराइच सदर विधानसभा क्षेत्रों के बीच है। दोनों क्षेत्र के लोग अपने जनप्रतिनिधि और अधिकारियों से हमेशा मांग करते हैं कि इस वेटलैंड को रोजगारपरक बनाया जाए।
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2021 में बिजनौर के हैदरपुर वेटलैंड को रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिली है। हैदरपुर वेटलैंड देश का 47वां और यूपी का 10वां स्थान हैं। आगरा का सूर सरोवर वेटलैंड सात वर्ग किलोमीटर में है। सरकारी दस्तावेजों में यह प्रदेश का सबसे बड़ा वेटलैंड माना जाता है। इसका चयन रामसर साइट में किया गया है। जब हम पयागपुर के तालाब बघेल की बात करते हैं तो इसका आच्छादन 14 वर्ग किलोमीटर बताया जाता है। यानी यह प्रदेश का सबसे बड़ा वेटलैंड है।
1995 के आसपास जिले के जिलाधिकारी रहे अतुल बगाई ने जब इस वेटलैंड को देखा तो उन्होंने शासन में पैरोकारी कर यहां पर कई योजनाएं चलाईं। वह आगे कुछ और करते इससे पहले उनका तबादला हो गया। सपा सरकार में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पयागपुर पहुंचे थे तो पयागपुर राजघराने के राजा व सपा सरकार में राज्यमंत्री रहे सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने उनसे वेटलैंड का विकास कराने का जिक्र किया था। पयागपुर निवासी वरिष्ठ समाजसेवी अमिताभ त्रिपाठी ने भी कुछ काम शुरू कराया था।
यह क्षेत्र में जलस्तर बनाये रखने में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इसकी विशालता के दृष्टिकोण से इसे वह स्थान नहीं मिल पाया जिसका यह वास्तव में हकदार है। यहां पर कभी भारी संख्या में साइबेरियन पक्षी आते थे, लेकिन अब यहां से ये विदेशी मेहमान रूठ चुके हैं।
- परमेश्वर सिंह, पर्यावरण विद व इतिहासकार
यह अपनी नैसर्गिक सुंदरता व विशालता के कारण पर्यटन व रोजगार की अनेक संभावनाओं से परिपूर्ण है। यहां पैदा होने वाले जलीय उत्पादन पूरे प्रदेश में अलग पहचान बनाये हुए हैं, लेकिन धीरे-धीरे इसकी सीमा सिकुड़ती जा रही हैं जो चिंताजनक है।
- बलदेव प्रसाद पांडेय, सेवानिवृत्त शिक्षक, झाला तरहर
अपने गौरवशाली अतीत को समेटे यह वेटलैंड आज अपनी उपेक्षा पर आंसू बहा रहा है। नब्बे के दशक में तत्कालीन जिलाधिकारी अतुल बगाई के प्रयास से क्षेत्रवासियों में इसके विकास की उम्मीद जगी थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद किसी ने नहीं देखा।
- हरिओम रस्तोगी, वरिष्ठ समाजसेवी पयागपुर
तालाब बघेल कभी अपने स्वच्छ जल व जलीय उत्पादों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन शासकीय उपेक्षा के कारण अपनी पहचान खोता जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय तक पत्र देकर इसके विकास के लिए गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हो पा रही है।
- अमिताभ त्रिपाठी, समाजसेवी, पयागपुर