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निराश्रित गोवंश से मुक्त होंगी सभी ग्राम पंचायतें
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बहराइच। जिलेभर में 40 हजार से भी अधिक निराश्रित गोवंश हैं, जिनमें से लगभग 10 हजार गोवंश को गो आश्रय स्थलों में पहले ही संरक्षित किया जा चुका है। शेष बचे लगभग 30 हजार गोवंश को संरक्षित करने के लिए जिले में दस दिवसीय गोवंश संरक्षण अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत जिले की सभी 1045 ग्राम पंचायतों में निराश्रित घूम रहे गोवंश को स्थायी व अस्थायी गोआश्रय स्थलों में संरक्षित किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में विचरण कर रहे निराश्रित गोवंश किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत साबित हो रहे हैं। निराश्रित मवेशियों के चलते किसानों को पूस की ठंडी में रातभर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। अधिकांश किसान खेतों में मचान बनाकर रातें गुजार रहे हैं। किसानों को अब इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है। शासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में विचरण कर रहे निराश्रित गोवंश को पकड़ने का फरमान जारी किया गया है।
इसके लिए ब्लॉक स्तर पर खंड विकास अधिकारी व तहसील स्तर पर तहसीलदार को नोडल बनाया गया है। अभियान के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत से कम से कम 10 निराश्रित गोवंश को नजदीकी आश्रय स्थल में संरक्षित करने और ग्राम पंचायत को निराश्रित गोवंश मुक्त करने का निर्देश दिया गया है। शासन की ओर से यह निर्देश किसानों की फसल सुरक्षा, मार्ग दुर्घटनाओं से गोवंशों को बचाने, ठंड से गोवंशों से सुरक्षित करने आदि के लिए जारी किया गया है।
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दस दिवसीय गोवंश संरक्षण अभियान की शुरुआत एक जनवरी से हुई है जो आगामी 10 जनवरी तक चलेगी। अभियान की शुरुआत हुए चार दिन बीत गए हैं, लेकिन अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंश को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी नहीं मिली है। वहीं, बहराइच-बलरामपुर मार्ग पर भारी संख्या में छुट्टा मवेशी घूमते देखे जा रहे हैं। जो कहीं न कहीं अभियान के कागजों तक सीमित रहने की ओर इशारा करता है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में विचरण कर रहे निराश्रित गोवंश किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत साबित हो रहे हैं। निराश्रित मवेशियों के चलते किसानों को पूस की ठंडी में रातभर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। अधिकांश किसान खेतों में मचान बनाकर रातें गुजार रहे हैं। किसानों को अब इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है। शासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में विचरण कर रहे निराश्रित गोवंश को पकड़ने का फरमान जारी किया गया है।
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इसके लिए ब्लॉक स्तर पर खंड विकास अधिकारी व तहसील स्तर पर तहसीलदार को नोडल बनाया गया है। अभियान के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत से कम से कम 10 निराश्रित गोवंश को नजदीकी आश्रय स्थल में संरक्षित करने और ग्राम पंचायत को निराश्रित गोवंश मुक्त करने का निर्देश दिया गया है। शासन की ओर से यह निर्देश किसानों की फसल सुरक्षा, मार्ग दुर्घटनाओं से गोवंशों को बचाने, ठंड से गोवंशों से सुरक्षित करने आदि के लिए जारी किया गया है।
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दस दिवसीय गोवंश संरक्षण अभियान की शुरुआत एक जनवरी से हुई है जो आगामी 10 जनवरी तक चलेगी। अभियान की शुरुआत हुए चार दिन बीत गए हैं, लेकिन अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंश को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी नहीं मिली है। वहीं, बहराइच-बलरामपुर मार्ग पर भारी संख्या में छुट्टा मवेशी घूमते देखे जा रहे हैं। जो कहीं न कहीं अभियान के कागजों तक सीमित रहने की ओर इशारा करता है।