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कटें जाएंगे 9500 पेड़
अमर उजाला ब्यूरो/श्रावस्ती
Updated Fri, 20 May 2016 10:51 PM IST
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काटे जाएंगे हरे वृक्ष
- फोटो : अमर उजाला
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सरयू नहर निर्माण के लिए 6.5 किलोमीटर लंबे व सौ मीटर चौड़े जंगल पर आरा चलेगा। नहर निर्माण के लिए 95 सौ पेड़ काटने की तैयारी ककरदरी रेंज ने शुरू कर दी है। इसके लिए पेड़ों पर छपान भी शुरू कर दी गई है। काटे जाने वाले पेड़ों में सागौन, साखू की प्रजातियां सबसे ज्यादा है।
एक नदी को दूसरी नदी से नहरों के माध्यम से जोड़ने की योजना जिले के पर्यावरण पर अब भारी पड़ रही है। जमीन अधिग्रहण के झंझटों से बचने के लिए सिंचाई विभाग जंगल को विरान करने जा रहा है।
इसके लिए तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं। जमुनहा के राप्ती बैराज से निकलने वाली सरयू योजक नहर को पूरा करने में सात किलोमीटर जंगल अभी तक रुकावट बना हुआ था। इसमें 6.5 किलोमीटर ककरदरी वन क्षेत्र व आधा किलोमीटर का हिस्सा भिनगा वन क्षेत्र में पड़ता है।
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इसके चलते नहर निर्माण को वन विभाग ने रोक दिया था। 180 मीटर चौड़ाई में बनने वाले नहर निर्माण में लगभग 16,800 पेड़ काटने का प्रस्ताव सिंचाई विभाग ने वन विभाग को दिया था। इतनी भारी मात्रा में पेड़ काटने की सहमति वन विभाग ने नहीं दी।
तीन साल तक मामला केंद्रीय वन मंत्रालय व सिंचाई विभाग के बीच लटकता रहा। बाद में वन विभाग ने जंगल के अंदर 180 के बजाय 100 मीटर चौड़ाई में नहर खोदने की सहमति जताते हुए पेड़ काटने की अनुमति जारी कर दी। चौड़ाई घटने के बाद भी ककरदरी क्षेत्र के 6.50 किलोमीटर परिक्षेत्र में 9500 पेड़ काटे जाएंगे।
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एक नदी को दूसरी नदी से नहरों के माध्यम से जोड़ने की योजना जिले के पर्यावरण पर अब भारी पड़ रही है। जमीन अधिग्रहण के झंझटों से बचने के लिए सिंचाई विभाग जंगल को विरान करने जा रहा है।
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इसके लिए तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं। जमुनहा के राप्ती बैराज से निकलने वाली सरयू योजक नहर को पूरा करने में सात किलोमीटर जंगल अभी तक रुकावट बना हुआ था। इसमें 6.5 किलोमीटर ककरदरी वन क्षेत्र व आधा किलोमीटर का हिस्सा भिनगा वन क्षेत्र में पड़ता है।
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इसके चलते नहर निर्माण को वन विभाग ने रोक दिया था। 180 मीटर चौड़ाई में बनने वाले नहर निर्माण में लगभग 16,800 पेड़ काटने का प्रस्ताव सिंचाई विभाग ने वन विभाग को दिया था। इतनी भारी मात्रा में पेड़ काटने की सहमति वन विभाग ने नहीं दी।
तीन साल तक मामला केंद्रीय वन मंत्रालय व सिंचाई विभाग के बीच लटकता रहा। बाद में वन विभाग ने जंगल के अंदर 180 के बजाय 100 मीटर चौड़ाई में नहर खोदने की सहमति जताते हुए पेड़ काटने की अनुमति जारी कर दी। चौड़ाई घटने के बाद भी ककरदरी क्षेत्र के 6.50 किलोमीटर परिक्षेत्र में 9500 पेड़ काटे जाएंगे।