{"_id":"57b8ae854f1c1b8f636ec160","slug":"western-civilization-are-broken-because-of-the-extended-family","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाश्चात्य सभ्यता के कारण टूट रहे संयुक्त परिवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पाश्चात्य सभ्यता के कारण टूट रहे संयुक्त परिवार
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 21 Aug 2016 12:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़ौत। विहर्ष सागर महाराज ने कहा पाश्चात्य सभ्यता के कारण देश में संयुक्त परिवार प्रथा खत्म होती जा रही है।
दिगंबर जैन अतिथि भवन में चल रहे भक्तांबर प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने कहा परिवारों के युवा सदस्य विभिन्न विषयों की तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त कर अलग-अलग कार्यों और व्यवसायों में लग जाते हैं। इस कारण उनके विचार परिजनों से कम ही मिलते हैं और विचार नहीं मिलने के कारण वे एकल ही रहना पसंद करते हैं।
उन्होंने कहा पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव के कारण वे अपने बड़े बुजुर्गों को उपेक्षित करते हैं। इसके विपरीत पश्चिमी देश हमारी संस्कृृति को अपना रहे हैं। हमारे परिवार टूट रहे हैं, वहां परिवार जुड़ रहे हैं। हमारी ही संस्कृति है कि श्रीराम ने पिता के वचन के कारण राज तिलक ठुकराकर वन को चले गए।
उन्होंने कहा युवा अपनी संस्कृति न भूलें, क्योंकि जिस देश और परिवार की संस्कृति खत्म हो गई वो देश ही खत्म हो जाता है। इसलिए संगठित रहो, क्योंकि संगठन में ही शक्ति है। जब तक एक हो, तब तक घर परिवार सुरक्षित है। अलग होते ही सब कुछ बिखर जाएगा। संचालन डॉ. आरके जैन ने किया। इसमें पंकज जैन, संजय जैन, सुनील जैन, अखिलेश जैन, संदीप जैन, नवीन जैन, अनीता जैन, इंद्राणी, गीता जैन आदि रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
दिगंबर जैन अतिथि भवन में चल रहे भक्तांबर प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने कहा परिवारों के युवा सदस्य विभिन्न विषयों की तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त कर अलग-अलग कार्यों और व्यवसायों में लग जाते हैं। इस कारण उनके विचार परिजनों से कम ही मिलते हैं और विचार नहीं मिलने के कारण वे एकल ही रहना पसंद करते हैं।
उन्होंने कहा पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव के कारण वे अपने बड़े बुजुर्गों को उपेक्षित करते हैं। इसके विपरीत पश्चिमी देश हमारी संस्कृृति को अपना रहे हैं। हमारे परिवार टूट रहे हैं, वहां परिवार जुड़ रहे हैं। हमारी ही संस्कृति है कि श्रीराम ने पिता के वचन के कारण राज तिलक ठुकराकर वन को चले गए।
विज्ञापन
उन्होंने कहा युवा अपनी संस्कृति न भूलें, क्योंकि जिस देश और परिवार की संस्कृति खत्म हो गई वो देश ही खत्म हो जाता है। इसलिए संगठित रहो, क्योंकि संगठन में ही शक्ति है। जब तक एक हो, तब तक घर परिवार सुरक्षित है। अलग होते ही सब कुछ बिखर जाएगा। संचालन डॉ. आरके जैन ने किया। इसमें पंकज जैन, संजय जैन, सुनील जैन, अखिलेश जैन, संदीप जैन, नवीन जैन, अनीता जैन, इंद्राणी, गीता जैन आदि रहे।
विज्ञापन