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हिंसा का रास्ता बनता है सर्वनाश का कारण : विशाल मुनि
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-जैन समाज के लोगों ने दीक्षार्थी बहनों को तिलक किया
फोटो संख्या 5
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के विभिन्न घरों में जैन समाज के लोगों ने सोमवार को दीक्षार्थी बहनों को तिलक किया। वहीं जैन संत विशाल मुनि ने धर्मसभा में कहा कि डरपोक व हिंसक व्यक्ति भक्त नहीं हो सकता है। व्यक्ति को सबसे बड़ा भय मृत्यु का होता है।
दीक्षा महोत्सव के तिलकोत्सव के चलते सोमवार को विभिन्न घरों में जैन समाज के लोगों ने दीक्षार्थी बहन समृद्धि, वागीशा व वंशिका को तिलक किया। इससे पूर्व नगर की जैन स्थानक मंडी में एक धर्मसभा को संबोधित करत हुए जैन संत ने कहा कि जब व्यक्ति के सभी डर खत्म हो जाते हैं, ऐसे भक्त के आगे यदि मदमस्त हाथी भी आ जाए तो उसे डर नहीं लगता है। यह तभी संभव है, जब व्यक्ति में अहिंसा, संयम और तप होता है। इसलिए इंसान को डरपोक व हिंसक नहीं होना चाहिए। बच्चों को भी ऐसी शिक्षा देनी चाहिए, जिससे बच्चे साहसी बनें और हिंसा के रास्ते पर नहीं चलें। हिंसा का रास्ता सर्वनाश का कारण बन सकता है। अहिंसा का पुजारी बनकर हर कार्य संभव हो सकता है। हिंसा के कार्यों के परिणाम हमेशा गलत ही होते हैं। भक्ति में लीन होने से पूर्व बहुत कुछ छोड़ना पड़ता है। सबके अंदर त्याग करने कि हिम्मत नहीं होती है। यह धार्मिक प्रवृति के लोगों के अंदर ही आती है।
-केसर रस्म व भक्ति संध्या आज होगी
नगर के अजितनाथ सभागार के पांडुकशिला मैदान में संतों के सानिध्य में केसर संस्कार रस्म का मंगलवार को आयोजन किया जाएगा। इसमें दीक्षार्थी बहनों को वैराग्य के दौरान धारण करने वाले कपड़ों व अन्य वस्तुओं पर केसर का छिड़काव किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के विभिन्न घरों में जैन समाज के लोगों ने सोमवार को दीक्षार्थी बहनों को तिलक किया। वहीं जैन संत विशाल मुनि ने धर्मसभा में कहा कि डरपोक व हिंसक व्यक्ति भक्त नहीं हो सकता है। व्यक्ति को सबसे बड़ा भय मृत्यु का होता है।
दीक्षा महोत्सव के तिलकोत्सव के चलते सोमवार को विभिन्न घरों में जैन समाज के लोगों ने दीक्षार्थी बहन समृद्धि, वागीशा व वंशिका को तिलक किया। इससे पूर्व नगर की जैन स्थानक मंडी में एक धर्मसभा को संबोधित करत हुए जैन संत ने कहा कि जब व्यक्ति के सभी डर खत्म हो जाते हैं, ऐसे भक्त के आगे यदि मदमस्त हाथी भी आ जाए तो उसे डर नहीं लगता है। यह तभी संभव है, जब व्यक्ति में अहिंसा, संयम और तप होता है। इसलिए इंसान को डरपोक व हिंसक नहीं होना चाहिए। बच्चों को भी ऐसी शिक्षा देनी चाहिए, जिससे बच्चे साहसी बनें और हिंसा के रास्ते पर नहीं चलें। हिंसा का रास्ता सर्वनाश का कारण बन सकता है। अहिंसा का पुजारी बनकर हर कार्य संभव हो सकता है। हिंसा के कार्यों के परिणाम हमेशा गलत ही होते हैं। भक्ति में लीन होने से पूर्व बहुत कुछ छोड़ना पड़ता है। सबके अंदर त्याग करने कि हिम्मत नहीं होती है। यह धार्मिक प्रवृति के लोगों के अंदर ही आती है।
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-केसर रस्म व भक्ति संध्या आज होगी
नगर के अजितनाथ सभागार के पांडुकशिला मैदान में संतों के सानिध्य में केसर संस्कार रस्म का मंगलवार को आयोजन किया जाएगा। इसमें दीक्षार्थी बहनों को वैराग्य के दौरान धारण करने वाले कपड़ों व अन्य वस्तुओं पर केसर का छिड़काव किया जाएगा।
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