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Baghpat News: उत्खनन में निकले मनके महाभारत व हड़प्पाकालीन होने का अनुमान
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-इतिहासकारों ने प्रथम दृष्टया जांच में उन काल के बताए, सिनौली के अलावा चंदायन में भी मिल चुके हैं इस तरह के मनके
फोटो संख्या 3
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। तिलवाड़ा गांव के आला टीला से उत्खनन में निकले दुर्लभ मनको को इतिहासकारों ने महाभारत व हड़प्पाकालीन होने का अनुमान लगाया है। इस तरह के मनके सिनौली के अलावा चंदायन गांव में प्राप्त हो चुके हैं। वहीं सोमवार को किए गए उत्खनन में मृदभांड भी मिले।
पुरातत्वविदों को दुर्लभ मनके भी अन्य पुरावशेषों के साथ प्राप्त हुए हैं। यह मनके अपने आप में बेहद खास हैं, क्योंकि इस तरह के मनके सिनौली और चंदायन साइट से भी प्राप्त हो चुके हैं। खास बात यह है कि तिलवाड़ा में पहले ट्रेंच से जो मृदभांड, सुराईनुमा बर्तन जमीन से मिले हैं, ऐसे मृदभांड सिनौली से प्रथम चरण की खोदाई में प्राप्त हुए थे। इस बात को अधीक्षण पुरातत्वविद विनोद सिंह रावत भी कबूल कर चुके हैं। सिनौली व तिलवाड़ा के तार कहीं न कहीं पुरावशेषों को लेकर जुड़े हुए हैं। वहीं इतिहासकार डॉ़ अमित राय जैन ने कहा कि महाभारतकालीन और हड़प्पाकालीन मनके काफी दुर्लभ हैं, जो सिनौली और चंदायन गांव से मिल चुके हैं। अब तिलवाड़ा में भी उसी तरह की उपलब्धि हासिल हो रही है। यह इस बात को सिद्ध करती है कि पूरी बेल्ट में एक ही तरह की सभ्यता और संस्कृति का बसेरा रहा होगा। बाकी तस्वीर आगे होने वाले उत्खनन के बाद ही साफ हो पाएगी।
वर्जन-- -
तिलवाड़ा का आला टीला अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से प्राप्त हो रहे मृदभांड और मनके सिनौली से प्राप्त हुए मनको, मृदभांड से मेल खाते हैं, जो रोचक व महत्वपूर्ण है। हालांकि इनकी जांच के बाद ही पूरी तरह से काल के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। -विनोद सिंह रावत, अधीक्षण पुरातत्वविद
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फोटो संख्या 3
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। तिलवाड़ा गांव के आला टीला से उत्खनन में निकले दुर्लभ मनको को इतिहासकारों ने महाभारत व हड़प्पाकालीन होने का अनुमान लगाया है। इस तरह के मनके सिनौली के अलावा चंदायन गांव में प्राप्त हो चुके हैं। वहीं सोमवार को किए गए उत्खनन में मृदभांड भी मिले।
पुरातत्वविदों को दुर्लभ मनके भी अन्य पुरावशेषों के साथ प्राप्त हुए हैं। यह मनके अपने आप में बेहद खास हैं, क्योंकि इस तरह के मनके सिनौली और चंदायन साइट से भी प्राप्त हो चुके हैं। खास बात यह है कि तिलवाड़ा में पहले ट्रेंच से जो मृदभांड, सुराईनुमा बर्तन जमीन से मिले हैं, ऐसे मृदभांड सिनौली से प्रथम चरण की खोदाई में प्राप्त हुए थे। इस बात को अधीक्षण पुरातत्वविद विनोद सिंह रावत भी कबूल कर चुके हैं। सिनौली व तिलवाड़ा के तार कहीं न कहीं पुरावशेषों को लेकर जुड़े हुए हैं। वहीं इतिहासकार डॉ़ अमित राय जैन ने कहा कि महाभारतकालीन और हड़प्पाकालीन मनके काफी दुर्लभ हैं, जो सिनौली और चंदायन गांव से मिल चुके हैं। अब तिलवाड़ा में भी उसी तरह की उपलब्धि हासिल हो रही है। यह इस बात को सिद्ध करती है कि पूरी बेल्ट में एक ही तरह की सभ्यता और संस्कृति का बसेरा रहा होगा। बाकी तस्वीर आगे होने वाले उत्खनन के बाद ही साफ हो पाएगी।
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तिलवाड़ा का आला टीला अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से प्राप्त हो रहे मृदभांड और मनके सिनौली से प्राप्त हुए मनको, मृदभांड से मेल खाते हैं, जो रोचक व महत्वपूर्ण है। हालांकि इनकी जांच के बाद ही पूरी तरह से काल के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। -विनोद सिंह रावत, अधीक्षण पुरातत्वविद
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