बारिश का कहर: काठा में ठोकरें डूबीं, खेतों में कटान शुरू, बर्बाद हो गई मूली और पालक की फसल
यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण किनारों पर खेतों में कटान होने लगा और काठा गांव में बनी नवनिर्मित ठोकरें भी यमुना में डूब गईं।
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यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण किनारों पर खेतों में कटान होने लगा और काठा गांव में बनी नवनिर्मित ठोकरें भी यमुना में डूब गईं। इसके अलावा फैजपुर निनाना व जागोस गांव का अंत्येष्टि स्थल भी जलमग्न रहा। खेतों में यमुना का पानी भरने के कारण किसानों की फसल खराब हो गई। उधर, बारिश के बाद हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। मंगलवार रात से बुधवार रात तक तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी यमुना नदी में छोड़ा गया।

यमुना का जलस्तर बढ़ने से बागपत में डूबीं निवाड़ा और गौरीपुर के किसानों की फसलें।- फोटो : BAGHPAT
बर्बाद हो गई मूली और पालक की फसल
बरसात में यमुना का जलस्तर बढ़ने पर खेतों में उगाई सब्जी की फसल बर्बाद हो गई थी। अब नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने पर मूली व पालक की फसल जलमग्न होने से बर्बाद हो गई। - लख्मीचंद, किसान
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किसानों को दिया जाए मुआवजा
यमुना का जलस्तर बढ़ने से खेतों में खड़ी फसल खराब हो गई। जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हो गया। किसानों ने कर्ज लेकर खेतों में फसल उगाई थी, जिसके बर्बाद होने से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को खराब फसल का मुआवजा दिया जाए। - धर्मवीर कश्यप, किसान।
कटान की संभावना, यमुना से दूर रहे
यमुना में छोड़ा 2.97 लाख क्यूसेक पानी जिले से होकर गुजर चुका है। अब यमुना का जलस्तर घटने पर कटान होने की संभावना ज्यादा हो गई है। जिसके चलते किसान व ग्रामीण यमुना किनारे पर न जाए। - उत्कर्ष भारद्वाज, नोडल अधिकारी बाढ़ राहत एवं नियंत्रण।