Baghpat News: मिट्टी की सेहत सुधारने वाला महकमा खुद ‘बीमार’, किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ा
बड़ौत में मिट्टी की सेहत सुधारने वाला महकमा खुद बीमार है। तकरीबन 50 हजार से अधिक किसान लाखों रुपये खर्च करके खुद मिट्टी परीक्षण करा चुके हैं।
विस्तार
बागपत जनपद में तीन सालों से मिट्टी की सेहत की जांच ठप है। जिससे किसानों को खेतों की मिट्टी के परीक्षण के लिए सरकारी और निजी लैब का सहारा लेना पड़ा। हालांकि तीन सालों में पंजीकृत सवा लाख किसानों में से 50 हजार से अधिक किसान लाखों रुपये खर्च करके खुद मिट्टी की जांच करा चुके हैं।
अब शासन ने जनपद के छह ब्लॉक से 12 गांव चिह्नित किए हैं। इसमें मिली बीमार मिट्टी की जांचकर सेहत सुधारने के लिए वैज्ञानिक निकलेंगे। जांच के बाद रिपोर्ट लखनऊ मांगी गई है। वर्ष 2019 में छह गांवों में मिट्टी की जांच में परिणाम चौंकाने वाले थे।
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कुछ साल पहले प्रधानमंत्री मृदा परीक्षण योजना शुरूआत की गई थी। इसके मुताबिक सरकारी खर्च पर किसानों के खेतों की मिट्टी में मौजूद तत्वों की जांच की जाती थी। उनके मुताबिक बुआई के लिए फसलों की सलाह दी जाती थी।
इसके साथ ही किसानों को स्वाइन हेल्थ कार्ड भी दिए जाते थे। इस योजना पर सरकार ने शुरू में लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से तीन साल से मिट्टी की जांच नहीं हो रही है। जिस कारण ये योजनाएं पूरी तरह धड़ाम हो गई हैं।
विभागीय रिकार्ड के अनुसार जनपद में सवा लाख किसान पंजीकृत हैं। यह योजना धड़ाम होने के बाद लगभग 50 हजार किसानों ने 102 रुपये खर्च करके खेतों की मिट्टी की जांच गौरीपुर स्थित सरकारी लैब एवं दिल्ली, मेरठ सहित अन्य स्थानों पर निजी लैब पर खुद के खर्च पर मिट्टी की जांच कराई थी। एक अनुमान लगाए तो तीन साल से 50 हजार किसानों का लगभग 50 लाख रुपये से अधिक खर्च मृदा परीक्षण कराने में आया। जिस कारण किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
इन तत्वों का होगा परीक्षण
सामान्य तौर पर मिट्टी के तीन तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश की जांच की जाती है। किसान चाहे तो वे 12 पैरामीटर पर तत्वों की जांच करा सकते हैं। जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ ही आयरन, जिंक, कॉपर, मैग्नीशियम, कैल्शियम, बोरान भी शामिल हैं। इसलिए तीन तत्वों की जांच पर किसानों को 37 रुपये व सभी तत्वों की जांच के लिए किसानों को 102 रुपये खर्च करना होगा।
मिल चुके हैं चौंकाने वाले परिणाम
वर्ष 2019 में कराए गए मिट्टी परीक्षण में पता चला कि मिट्टी की सेहत खराब हो रही है। इसमें पोषक तत्वों की कमी है। यह कमी जीवांश कार्बन, सल्फर और जिक सूक्ष्म पोषक तत्व में पाई गई। जिक की कमी से धान, गेहूं, आलू, मक्का आदि फसलों को झुलसा रोग लगने का अंदेशा रहता है। सल्फर के अभाव में पौधे पीले पड़ जाते हैं। यहां अधिकतर धान, गेहूं की फसलों में देखने को मिलता है।
इन गांवों को किया गया चिह्नित
ब्लॉक गांव
छपरौली सौंटी, ककौरकलां
बड़ौत अफरफाबाद थल, बरवाला
बिनौली गैडबरा, आदमपुर
खेकड़ा फखरपुर, फिरोजपुर
पिलाना रोशनगढ़, संकलपुटठी
बागपत बिचपड़ी, कानौली
ये बोले प्राविधिक सहायक
राजकीय बीज भंडार बड़ौत पर तैनात प्राविधिक सहायक हरेंद्र सिंह ने बताया कि इस मद में तीन साल से बजट नहीं आ रहा है। जिस कारण मिट्टी की जांच नहीं हो पा रही है। अब शासन ने फिर से मृदा की निशुल्क जांच के लिए जनपद के 12 गांवों को चिह्नित किया है। जिनमें जल्द ही जांच शुरू कर दी जाएगी और जांच रिपोर्ट लखनऊ भेजी जाएगी।