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सिनौली के सीने में दफन हैं राज, जल्द घोषित होगा संरक्षित स्मारक

Wed, 29 Jan 2020 11:42 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jan 2020 11:42 PM IST
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सिनौली के सीने में दफन हैं राज, जल्द घोषित होगा संरक्षित स्मारक
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बागपत। सिनौली से खुदाई में मिले पुरावशेषों के 38 सौ साल पुराने होने की पुष्टि भारतीय पुरातत्व विभाग ने की है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संयुक्त महानिदेशक डॉ. संजय मंजुल का कहना है कि जीपीएस के सर्वे से स्पष्ट हो चुका है कि आसपास के खेतों में भी इतिहास छिपा है। सिनौली को पुरातत्व स्थल घोषित करने की तैयारी चल रही है, जल्द ही प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
बुधवार को डॉ. संजय मंजुल ने बताया कि कार्बन डेटिंग से यहां मिले पुरावशेष के करीब 38 सौ साल पुराने होने का अनुमान है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सिनौली को संरक्षित करने की तैयारी में जुटा है। पुरातत्व स्थल घोषित करने के लिए पिछले वर्ष ही नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका है, जल्द ही सिनौली को संरक्षित स्थल घोषित कर दिया जाएगा। डॉ. मंजुल ने बताया कि यह सर्किल का 267वां संरक्षित स्मारक होगा। जिस खेत के उत्खनन में पुरावशेष मिले हैं, उसके आसपास महत्वपूर्ण इतिहास छिपा है। जीपीएस सर्वे से जो जानकारी मिली है, उन पर पुरातत्व विभाग काम कर रहा है। पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ एसके मंजुल ने बताया कि इस बात की पुष्टि हुई है कि योद्धा के साथ उसके रथ और शस्त्रों को भी दफना दिया जाता था।
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कंकाल के पास मिला था कॉपर का शीशा
बागपत। सिनौली में शाही ताबूत, प्राचीन रथ, महिला का कंकाल, धनुष, और तांबे की तलवार और मृदभांड सामने आ चुके हैं। महिला के कंकाल के पास कॉपर का शीशा और हड्डियों से बना कंघा मिला है, इससे स्पष्ट है कि महिलाएं श्रृंगार की बेहद शौकीन रहीं। अंतिम संस्कार के दौरान इनके पास कंघा और शीशा रखा जाता है। इस काल के लोग भी पुर्नजन्म को मानते थे।
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बागपत। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम ने सिनौली में उत्खनन कार्य किया । करीब 15 साल पहले सादिकपुर सिनौली में ही हड़प्पा कालीन सभ्यता के संकेत मिले , अब यहीं पर करीब 38 सौ साल पहले के काल की पुष्टि हो चुकी है।

सिनौली में खुल चुके कर्इं राज
बागपत। वर्ष 2005 में सिनौली और वर्ष 2015 में चंदायन गांव में उत्खनन का कार्य केंद्र सरकार करा चुकी है। जिले में चित्रित धूसर मृदभांड संस्कृति, कुषाण, गुप्त और राजपूत सभ्यताओं के प्रमाण पहले से प्राप्त होते रहे हैं। यही नहीं सिनौली मेें हड़प्पा कालीन सभ्यता का शवादान गृह मिल चुका है।
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