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Baghpat News: गांवों में विकास कार्यों में लाखों का घपला
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अंकित चौहान
बागपत। गांवों में विकास कार्य कैसे हों, जब विकास कार्यों के नाम पर आने वाले बजट को ग्राम पंचायत सचिव ही ठिकाने लगा रहे हैं। बरवाला में इस तरह का घपला सामने आया है, जहां बिना प्रस्ताव व जांच के पंचायत के खातों से 32 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया जबकि जमीन पर कार्य हुए नहीं हुए या अधूरे पड़े हैं। अब डीपीआरओ ने सभी गांवों में विकास कार्यों की जांच शुरू करा दी है।
बरवाला में स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत 32 लाख 83 हजार रुपये का बजट आया था। वहां के ग्राम पंचायत सचिव लोकेंद्र राठी को करीब डेढ़ महीने पहले डीएम ने हटाने के आदेश दिए तो उसने किसी भी सचिव को चार्ज नहीं दिया जबकि खाते से करीब 32 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। मामले की जांच कराई गई तो बड़ौत ब्लॉक के अभियंता गुलफाम अली ने रिपोर्ट में कहा कि सचिव ने बिना किसी प्रस्ताव व जांच के नियम विरुद्ध पैसा जारी किया है। डीपीआरओ ने लोकेंद्र राठी को नोटिस जारी किया लेकिन वह जांच के लिए नहीं पहुंच रहा है। अब उसके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई।
तालाब में आरआरसी सेंटर, अधूरे निर्माण पर पूरा पैसा निकाला
बरवाला में स्वच्छ भारत मिशन के तहत आरआरसी सेंटर बनाया जाना था, जिसे तालाब की भूमि पर बनाया जा रहा है। खास यह है कि इसका निर्माण अभी आधा भी नहीं हुआ है और पूरा भुगतान कर दिया गया है। यह मामला सामने आने के बाद डीपीआरओ ने जांच शुरू कर दी है।
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शहीद स्थल पर झंडा भी 2.30 लाख रुपये में लगा
बिजरौल गांव में शहीद स्थल पर तिरंगा झंडा लगाने में जिस झंडे को पाइप के साथ लगाने की बात कही गई, उसके लिए 2.30 लाख रुपये निकाल लिए गए जबकि गांव में उस तरह की ग्रामीणों ने दूसरा झंडा चंदा एकत्र करके करीब 70 हजार रुपये में लगवाया था।
हिलवाड़ी में भी घपला करने का आरोप
हिलवाड़ी गांव में भी विकास कार्य कराए जाने की बात कहते हुए रुपये निकालने की बात कही गई जबकि वहां पूरे गांव में लाइट नहीं लगवाई गईं हैं तो केवल दो नल लगाए गए हैं। वाटर कूलर लगाने में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए है।
लोकपाल की जांच में मिला था 50 लाख का घपला
यहां पहले बोढा, संतोषपुर, गौरीपुर जवाहरनगर, गाधी, चौहल्दा में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों में घपला मिला था। लोकपाल की जांच में यह घपला दो साल पहले मिला था और करीब पचास लाख रुपये की रिकवरी के लिए प्रधानों व सचिवों को नोटिस जारी किए गए थे। मगर लोकपाल का कार्यकाल खत्म होने के बाद वह फाइलें भी दबा दी गई। हालांकि इस बार घपला करने वालों पर कार्रवाई जरूर करने की बात कही जा रही है।
सचिव पर मुकदमा दर्ज कराने के हो चुके आदेश
जिस तरह से अब घपला मिल रहा है। इस तरह वर्ष 2020 में किशनपुर बराल में करीब 33 लाख रुपये का घपला मिला था। उस मामले में तत्कालीन डीपीआरओ कुमार अमरेंद्र ने जांच के बाद सचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। मगर उनके तबादले के बाद वह फाइल भी दब गई। यहां अधिकारी का तबादला होते ही फाइल दबा दी जाती है।
गांवों में घपले की शिकायत मिली थी, जिसके आधार पर जांच की गई। मामले में सचिव को नोटिस जारी किया गया है, मगर वह कोई कागज नहीं दे रहा है। अगर जल्द ही जवाब नहीं मिलता तो डीएम को कार्रवाई व मुकदमा दर्ज कराने के लिए फाइल भेजी जाएगी। - अरुण अत्री, डीपीआरओ
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बागपत। गांवों में विकास कार्य कैसे हों, जब विकास कार्यों के नाम पर आने वाले बजट को ग्राम पंचायत सचिव ही ठिकाने लगा रहे हैं। बरवाला में इस तरह का घपला सामने आया है, जहां बिना प्रस्ताव व जांच के पंचायत के खातों से 32 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया जबकि जमीन पर कार्य हुए नहीं हुए या अधूरे पड़े हैं। अब डीपीआरओ ने सभी गांवों में विकास कार्यों की जांच शुरू करा दी है।
बरवाला में स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत 32 लाख 83 हजार रुपये का बजट आया था। वहां के ग्राम पंचायत सचिव लोकेंद्र राठी को करीब डेढ़ महीने पहले डीएम ने हटाने के आदेश दिए तो उसने किसी भी सचिव को चार्ज नहीं दिया जबकि खाते से करीब 32 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। मामले की जांच कराई गई तो बड़ौत ब्लॉक के अभियंता गुलफाम अली ने रिपोर्ट में कहा कि सचिव ने बिना किसी प्रस्ताव व जांच के नियम विरुद्ध पैसा जारी किया है। डीपीआरओ ने लोकेंद्र राठी को नोटिस जारी किया लेकिन वह जांच के लिए नहीं पहुंच रहा है। अब उसके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई।
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तालाब में आरआरसी सेंटर, अधूरे निर्माण पर पूरा पैसा निकाला
बरवाला में स्वच्छ भारत मिशन के तहत आरआरसी सेंटर बनाया जाना था, जिसे तालाब की भूमि पर बनाया जा रहा है। खास यह है कि इसका निर्माण अभी आधा भी नहीं हुआ है और पूरा भुगतान कर दिया गया है। यह मामला सामने आने के बाद डीपीआरओ ने जांच शुरू कर दी है।
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शहीद स्थल पर झंडा भी 2.30 लाख रुपये में लगा
बिजरौल गांव में शहीद स्थल पर तिरंगा झंडा लगाने में जिस झंडे को पाइप के साथ लगाने की बात कही गई, उसके लिए 2.30 लाख रुपये निकाल लिए गए जबकि गांव में उस तरह की ग्रामीणों ने दूसरा झंडा चंदा एकत्र करके करीब 70 हजार रुपये में लगवाया था।
हिलवाड़ी में भी घपला करने का आरोप
हिलवाड़ी गांव में भी विकास कार्य कराए जाने की बात कहते हुए रुपये निकालने की बात कही गई जबकि वहां पूरे गांव में लाइट नहीं लगवाई गईं हैं तो केवल दो नल लगाए गए हैं। वाटर कूलर लगाने में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए है।
लोकपाल की जांच में मिला था 50 लाख का घपला
यहां पहले बोढा, संतोषपुर, गौरीपुर जवाहरनगर, गाधी, चौहल्दा में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों में घपला मिला था। लोकपाल की जांच में यह घपला दो साल पहले मिला था और करीब पचास लाख रुपये की रिकवरी के लिए प्रधानों व सचिवों को नोटिस जारी किए गए थे। मगर लोकपाल का कार्यकाल खत्म होने के बाद वह फाइलें भी दबा दी गई। हालांकि इस बार घपला करने वालों पर कार्रवाई जरूर करने की बात कही जा रही है।
सचिव पर मुकदमा दर्ज कराने के हो चुके आदेश
जिस तरह से अब घपला मिल रहा है। इस तरह वर्ष 2020 में किशनपुर बराल में करीब 33 लाख रुपये का घपला मिला था। उस मामले में तत्कालीन डीपीआरओ कुमार अमरेंद्र ने जांच के बाद सचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। मगर उनके तबादले के बाद वह फाइल भी दब गई। यहां अधिकारी का तबादला होते ही फाइल दबा दी जाती है।
गांवों में घपले की शिकायत मिली थी, जिसके आधार पर जांच की गई। मामले में सचिव को नोटिस जारी किया गया है, मगर वह कोई कागज नहीं दे रहा है। अगर जल्द ही जवाब नहीं मिलता तो डीएम को कार्रवाई व मुकदमा दर्ज कराने के लिए फाइल भेजी जाएगी। - अरुण अत्री, डीपीआरओ