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वैज्ञानिक तौर से अध्ययन कर दें रिपोर्ट ः एनजीटी
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Thu, 08 Sep 2016 01:03 AM IST
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वेस्ट यूपी के छह जिलों में हिंडन और कृष्णा नदी के प्रदूषित जल से फैल रही बीमारियों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने फिर सख्ती दिखाई। दोआबा पर्यावरण समिति की याचिका पर सुनवाई कर सरकार को प्रभावित जिलों की समस्या का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन और समाधान की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। बागपत के एडीएम, सीएमओ और जल निगम के अधिशासी अभियंता ने एनजीटी में पेश होकर जनपद की रिपोर्ट पेश की। अगली सुनवाई के लिए 21 अक्तूबर की तिथि तय की है।
दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष डॉ. चंद्रवीर सिंह की याचिका पर एनजीटी के जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। बागपत के एडीएम, सीएमओ, डिप्टी सीएमओ, जल निगम के मुख्य अभियंता और जल निगम एनजीटी के सामने पहुंचे। जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने सीएमओ से प्रभावित क्षेत्र में लोगों के ब्लड की जांच के विषय में पूछा। सीएमओ ने कहा उन्होंने कैंप लगाए हैं।
डॉ चंद्रवीर सिंह ने बताया एनजीटी ने बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, सहारनपुर और मेरठ की रिपोर्ट वैज्ञानिक तरीके से तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय जल बोर्ड, उप्र जल बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण विभाग को इस बाबत निर्देश जारी किए। अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को होगी। खंडपीठ ने कहा यदि लापरवाही बरती तो एनजीटी इसके लिए कमीशन का गठन कर खुद मामले की जांच कराएगा।
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चार हजार गुणा ज्यादा हैं आर्सेनिक
दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष डॉ. चंद्रवीर सिंह की ओर से एनजीटी में जलालपुर गांव के शाहिद के हैंडपंप से लिए जल की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। सरकार ने वर्ष 2014 में यह जांच कराई थी। इस रिपोर्ट में आर्सेनिक की मात्रा चार हजार गुणा ज्यादा बताई। एनजीटी ने जिले के अधिकारियों को भी यह रिपोर्ट दिखाई।
क्या है प्रशासन का दावा?
जल निगम के अधिशासी अभियंता संजय गौतम का कहना है कि एनजीटी ने जिन गांवों का सूची में रखा है, उनकी संख्या 55 है। इसमें दो नगर पंचायत हैं और दो गैर आबाद गांव। 22 गांवों में निगम से पेयजल योजना संचालित है, इस तरह केवल 29 गांव ऐसे बचते हैं जिनमें समस्या है।
106 हैंडपंपों की हत्थी उतारी
बागपत। जल निगम ने जिले के आधा दर्जन से अधिक गांवों में 106 हैंडपंपों को सील कर उनकी हत्थी उतरवा दी थी। उधर, याचिकाकर्ता ने कहा सहारनपुर में हैंडपंपों पर सिर्फ पेंट किया गया है, हैंडपंप की हत्थी नहीं उतारी गई।
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दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष डॉ. चंद्रवीर सिंह की याचिका पर एनजीटी के जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। बागपत के एडीएम, सीएमओ, डिप्टी सीएमओ, जल निगम के मुख्य अभियंता और जल निगम एनजीटी के सामने पहुंचे। जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने सीएमओ से प्रभावित क्षेत्र में लोगों के ब्लड की जांच के विषय में पूछा। सीएमओ ने कहा उन्होंने कैंप लगाए हैं।
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डॉ चंद्रवीर सिंह ने बताया एनजीटी ने बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, सहारनपुर और मेरठ की रिपोर्ट वैज्ञानिक तरीके से तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय जल बोर्ड, उप्र जल बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण विभाग को इस बाबत निर्देश जारी किए। अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को होगी। खंडपीठ ने कहा यदि लापरवाही बरती तो एनजीटी इसके लिए कमीशन का गठन कर खुद मामले की जांच कराएगा।
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चार हजार गुणा ज्यादा हैं आर्सेनिक
दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष डॉ. चंद्रवीर सिंह की ओर से एनजीटी में जलालपुर गांव के शाहिद के हैंडपंप से लिए जल की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। सरकार ने वर्ष 2014 में यह जांच कराई थी। इस रिपोर्ट में आर्सेनिक की मात्रा चार हजार गुणा ज्यादा बताई। एनजीटी ने जिले के अधिकारियों को भी यह रिपोर्ट दिखाई।
क्या है प्रशासन का दावा?
जल निगम के अधिशासी अभियंता संजय गौतम का कहना है कि एनजीटी ने जिन गांवों का सूची में रखा है, उनकी संख्या 55 है। इसमें दो नगर पंचायत हैं और दो गैर आबाद गांव। 22 गांवों में निगम से पेयजल योजना संचालित है, इस तरह केवल 29 गांव ऐसे बचते हैं जिनमें समस्या है।
106 हैंडपंपों की हत्थी उतारी
बागपत। जल निगम ने जिले के आधा दर्जन से अधिक गांवों में 106 हैंडपंपों को सील कर उनकी हत्थी उतरवा दी थी। उधर, याचिकाकर्ता ने कहा सहारनपुर में हैंडपंपों पर सिर्फ पेंट किया गया है, हैंडपंप की हत्थी नहीं उतारी गई।