फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Protests against tannery units started four years ago, agitations were also done

चर्म शोधन इकाइयों का चार साल पहले शुरू हुआ विरोध, आंदोलन भी किए गए

Sun, 08 May 2022 12:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 12:00 AM IST
विज्ञापन
Protests against tannery units started four years ago, agitations were also done
बागपत के दोघट क्षेत्र के भड़ल गांव में चर्म शोधन की इकाइयां ध्वस्त करती जेसीबी। - फोटो : BAGHPAT
- आबादी के बीच में होने के कारण प्रदूषण व बीमारियां फैलने से लगातार विरोध कर रहे थे लोग
विज्ञापन

- इकाइयों को आबादी से बाहर शिफ्ट करने के लिए चौकी के पीछे जमीन व भवन भी प्रशासन ने दिए
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। भड़ल में चर्म शोधन इकाइयों के खिलाफ 25 जुलाई 2018 को अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था। इसमें गांव के अलावा क्षेत्र के काफी लोगों ने 42 दिन तक धरना दिया। इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ तो भड़ल के समाजसेवी जितेंद्र राणा ने इन इकाइयों के खिलाफ एनजीटी का दरवाजा खटखटाया। एनजीटी ने इकाईयों को बंद करने के आदेश 10 अक्टूबर 2018 को जारी कर दिया था। तभी से यह मामला चल रहा है।
इकाई संचालक एनजीटी के आदेश की अवहेलना कर उनका संचालन गांव में ही करते रहे, जबकि लगभग 40 हजार रुपये खर्च कर ग्राम पंचायत व जिला पंचायत ने संयुक्त रूप से गांव के बाहर इकाइयों को शिफ्ट करने के लिए जमीन दी। इस जमीन पर पानी की व्यवस्था, चाहरदीवारी कराई गई, लेकिन इसके बावजूद भी इकाइयों को वहां शिफ्ट नहीं किया गया। 2019 में भी एनजीटी ने दोबारा बंद कराने का आदेश किया, लेकिन उसका भी पालन नहीं किया। फिर इन सभी इकाइयों पर एनजीटी ने 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसके बावजूद भी इकाई संचालकों पर कोई फर्क नही पड़ा। प्रदूषण नियंत्रण विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस ने कई बार काम को बंद कराने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद काम बंद नहीं किया गया। पिछले चार साल से यह खींचतान चल रही थी और अब उन इकाइयों को ध्वस्त कर दिया गया।
विज्ञापन

इकाइयों के पास मकान भी ध्वस्त किया
चर्म शोधन इकाइयों के पास विनोद पुत्र सीताराम का मकान भी बना हुआ है। जब ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई और हंगामा शुरू हुआ तो पुलिस व प्रशासन ने जल्दबाजी में कार्रवाई पूरी की। इससे विनोद का मकान भी ध्वस्त कर दिया गया। विनोद का आरोप है कि उसका चर्म शोधन इकाईयों से कोई लेना देना नहीं था।
विज्ञापन
विज्ञापन

ग्रामीणों को साथ लेकर कार्रवाई करता प्रशासन
भड़ल गांव की प्रधान मीनाक्षी के पति त्रिपाल राणा का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को गांव के जिम्मेदार लोगों को साथ लेकर यह कार्रवाई करनी चाहिए थे। पहले जिम्मेदार लोगों को बुलाना चाहिए था, जिससे इकाई चलाने वालों को समझाया जा सकता। क्योंकि वह काफी समय से इकाइयां बंद कराने का प्रयास कर रहे थे।

एनजीटी के आदेश पर हुई कार्रवाई: एसडीएम
बड़ौत एसडीएम पूजा चौधरी ने बताया कि एनजीटी ने कई बार चर्म शोधन इकाइयों को प्रदूषण फैलाने के कारण बंद करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद उनको बंद नहीं किया जा रहा था, जबकि उनको दूसरी जगह भी दी गई। अब उनको ध्वस्त किया गया है और इकाइयों को दूसरी जगह शुरू कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed