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पंचायत घर में बसा दिया घर, बांध दिए जानवर
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Thu, 03 Mar 2016 12:52 AM IST
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बागपत में एक ओर जहां शासन ग्राम पंचायतों को मिनी सचिवालयों का रूप देकर गांवों से संबंधित हर सुविधा पंचायत घर मंे देने का प्रयास कर रहा है, कंप्यूटीरीकरण कराया जा रहा है, वहीं बागपत में स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत हो चुकी है। यहां पंचायत घरों में न सिर्फ कब्जा कराया जा रहा है, बल्कि उनमें लोगों ने अपना घर तक बना लिया है। ग्राम पाली में अभी तक ग्राम प्रधान ने पंचायतघर का मुंह तक नहीं देखा।
शासन की मंशा पंचायतघरों को मिनी सचिवालय का रूप देने की है। इन मिनी सचिवालयों पर न सिर्फ बैठकें कराई जाएं, बल्कि गांव के रिकार्ड से लेकर प्रमाण-पत्र तक की सुविधा कंप्यूटरीकरण कराकर मिनी सचिवालयों पर दी जाए। ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम पंचायत से संबंधित सभी कर्मचारी मिनी सचिवालय में बैठेंगे। लेकिन बागपत के अधिकारियों की लापरवाही और ग्राम प्रधान की उदासीनता ने शासन की मंशा पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है।
न सिर्फ पंचायत घरों की हालत खराब हो रही है, बल्कि उन पर कब्जा हो रहा है। ग्राम पाली के पंचायत घर में काफी समय से कब्जा हो चुका है। यह पंचायत घर अब एक निजी आवास में तब्दील हो चुका है। यहां परिवार ही नहीं रह रहे, बल्कि पंचायत घर में पशुओं को भी बांधा जा रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि हाईवे के किनारे स्थित इस पंचायत घर की इस हालत को अधिकारियों ने अनदेखा कर दिया।
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इस पर हो रहे कब्जे से आंखें बंद कर लीं। सचिवालय का रूप देना तो दूर नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान ने आज तक पंचायत घर के गेट पर कदम तक नहीं रखा। प्रधान को यह ही नहीं पता कि पंचायतघर मेें कोई सामान है भी या नहीं। आरोप मढ़ा जा रहा है ग्राम पंचायत सचिव पर। जो प्रधान और अधिकारी पंचायत घर पर ही कब्जा होते देख रहे हैं, तो गांव का क्या होगा।
सचिव ने नहीं दिया कोई सामान
ग्राम प्रधान कमल का कहना है कि पंचायत घर में कुछ लोग पहले से ही रह रहे हैं। उन्होंने पंचायत घर के सामान के बारे में ग्राम पंचायत सचिव से उन्होंने पूछा, लेकिन उसने कोई सामान नहीं दिया है। उसका कहना है कि पूर्व प्रधान से ही पूछें।
मामले की जांच कराई जाएगी
मुख्य विकास अधिकारी जेपी रस्तोगी का कहना है कि जिला पंचायत राज अधिकारी से इसकी जांच कराई जाएगी। पंचायत घर पर किसी का कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। पंचायत सचिव से जवाब तलब किया जाएगा।
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शासन की मंशा पंचायतघरों को मिनी सचिवालय का रूप देने की है। इन मिनी सचिवालयों पर न सिर्फ बैठकें कराई जाएं, बल्कि गांव के रिकार्ड से लेकर प्रमाण-पत्र तक की सुविधा कंप्यूटरीकरण कराकर मिनी सचिवालयों पर दी जाए। ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम पंचायत से संबंधित सभी कर्मचारी मिनी सचिवालय में बैठेंगे। लेकिन बागपत के अधिकारियों की लापरवाही और ग्राम प्रधान की उदासीनता ने शासन की मंशा पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है।
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न सिर्फ पंचायत घरों की हालत खराब हो रही है, बल्कि उन पर कब्जा हो रहा है। ग्राम पाली के पंचायत घर में काफी समय से कब्जा हो चुका है। यह पंचायत घर अब एक निजी आवास में तब्दील हो चुका है। यहां परिवार ही नहीं रह रहे, बल्कि पंचायत घर में पशुओं को भी बांधा जा रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि हाईवे के किनारे स्थित इस पंचायत घर की इस हालत को अधिकारियों ने अनदेखा कर दिया।
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इस पर हो रहे कब्जे से आंखें बंद कर लीं। सचिवालय का रूप देना तो दूर नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान ने आज तक पंचायत घर के गेट पर कदम तक नहीं रखा। प्रधान को यह ही नहीं पता कि पंचायतघर मेें कोई सामान है भी या नहीं। आरोप मढ़ा जा रहा है ग्राम पंचायत सचिव पर। जो प्रधान और अधिकारी पंचायत घर पर ही कब्जा होते देख रहे हैं, तो गांव का क्या होगा।
सचिव ने नहीं दिया कोई सामान
ग्राम प्रधान कमल का कहना है कि पंचायत घर में कुछ लोग पहले से ही रह रहे हैं। उन्होंने पंचायत घर के सामान के बारे में ग्राम पंचायत सचिव से उन्होंने पूछा, लेकिन उसने कोई सामान नहीं दिया है। उसका कहना है कि पूर्व प्रधान से ही पूछें।
मामले की जांच कराई जाएगी
मुख्य विकास अधिकारी जेपी रस्तोगी का कहना है कि जिला पंचायत राज अधिकारी से इसकी जांच कराई जाएगी। पंचायत घर पर किसी का कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। पंचायत सचिव से जवाब तलब किया जाएगा।