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अफसरों ने खुद माना, गांवों में घपला हो रहा
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बागपत। गांवों में घोटाले हो रहे हैं। यह खुद अधिकारी मान रहे हैं। बिना कार्य कराए फर्जी बिल वाउचर से धनराशि निकाली जा रही है। इसलिए ग्राम पंचायतों में अब अचानक निरीक्षण किया जाएगा और फोन पर केवल एक दिन पहले जानकारी दी जाएगी। जिससे जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मिल सकें।
गांवों में विकास कार्यों के नाम पर घोटाले सामने आते रहे हैं। अधिकारियों के पास शिकायतें भी पहुंच रही हैं। वहीं, अब सीडीओ रंजीत सिंह ने पत्र जारी किया है। उसमें कहा कि मनरेगा, राज्य वित्त व 15वां वित्त आयोग अंतर्गत ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इनके लिए काफी धनराशि दी जा रही है। इसके बावजूद केवल नाली, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग, हैंडपंप रिबोर, वाटर कूलर, स्ट्रीट लाइट, चैनल आदि कार्य किए जा रहे हैं। अन्य कार्य नहीं किए जा रहे हैं। कई ग्राम पंचायतों में बिना कार्य कराए ही फर्जी बिल वाउचर से धनराशि निकाली जा रही है। इस तरह सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे में जांच जरूर की जानी चाहिए। नियमानुसार कार्य कराकर संबंधित अधिकारियों से अनुमति के बाद ही भुगतान होना चाहिए। ग्राम पंचायतों में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसलिए ग्राम पंचायतों का निरीक्षण किया जाएगा। इसकी जानकारी एक दिन पहले फोन से दी जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को वहां मौजूद रहना होगा। इस तरह से खुद सीडीओ ने घोटाले होना मान रहे हैं।
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गांवों में विकास कार्यों के नाम पर घोटाले सामने आते रहे हैं। अधिकारियों के पास शिकायतें भी पहुंच रही हैं। वहीं, अब सीडीओ रंजीत सिंह ने पत्र जारी किया है। उसमें कहा कि मनरेगा, राज्य वित्त व 15वां वित्त आयोग अंतर्गत ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इनके लिए काफी धनराशि दी जा रही है। इसके बावजूद केवल नाली, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग, हैंडपंप रिबोर, वाटर कूलर, स्ट्रीट लाइट, चैनल आदि कार्य किए जा रहे हैं। अन्य कार्य नहीं किए जा रहे हैं। कई ग्राम पंचायतों में बिना कार्य कराए ही फर्जी बिल वाउचर से धनराशि निकाली जा रही है। इस तरह सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे में जांच जरूर की जानी चाहिए। नियमानुसार कार्य कराकर संबंधित अधिकारियों से अनुमति के बाद ही भुगतान होना चाहिए। ग्राम पंचायतों में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसलिए ग्राम पंचायतों का निरीक्षण किया जाएगा। इसकी जानकारी एक दिन पहले फोन से दी जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को वहां मौजूद रहना होगा। इस तरह से खुद सीडीओ ने घोटाले होना मान रहे हैं।
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