{"_id":"677d1929dab293233b0a2b58","slug":"materialism-is-mans-biggest-enemy-harsh-sagar-baghpat-news-c-28-1-bpt1002-124528-2025-01-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"भौतिकता मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन : हर्ष सागर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भौतिकता मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन : हर्ष सागर
विज्ञापन
- कस्बे के पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा का आयोजन
फोटो-चार
संवाद न्यूज एजेंसी
अमीनगर सराय। कस्बे के पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सोमवार को धर्मसभा हुई, जिसमें जैन संत हर्ष सागर महाराज ने कहा कि भौतिकता इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। इसलिए मनुष्य को भौतिकता से दूर रहना चाहिए।
उन्होंने कहा की निस्वार्थ भगवत भक्ति ही फलदाई होती है। अपने भावों को हमें हर क्षण संभालना चाहिए, क्योंकि गति बिगड़ते देर नहीं लगती। कहा कि संतों का समागम बड़े पुण्य उदय से मिलता है। इसलिए हमें मानव जीवन पाकर गुरु के बताए मार्गोंं पर चलकर अपना आत्म कल्याण करना चाहिए। उन्होंने रात्रि भोजन को महापाप बताया। गीता में रात्रि भोजन करने वालों को निशाचर कहा गया है। इंसान को सच्चा पुरुषार्थ करना चाहिए। कहा कि भगवान हमें सच्चा उपदेश देते हैं, उनकी वाणी कभी गलत नहीं हो सकती। हमारी जैसी दृष्टि होती है वैसी सृष्टि हमें नजर आती है। दिनेश जैन ने मेरी भावना का पाठ किया। धर्म सभा में विनोद जैन, अरुण जैन, अशोक जैन, लक्ष्मी जैन, संदीप जैन, उषा जैन, प्रवीण जैन, अशोक जैन व राकेश जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
फोटो-चार
संवाद न्यूज एजेंसी
अमीनगर सराय। कस्बे के पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सोमवार को धर्मसभा हुई, जिसमें जैन संत हर्ष सागर महाराज ने कहा कि भौतिकता इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। इसलिए मनुष्य को भौतिकता से दूर रहना चाहिए।
उन्होंने कहा की निस्वार्थ भगवत भक्ति ही फलदाई होती है। अपने भावों को हमें हर क्षण संभालना चाहिए, क्योंकि गति बिगड़ते देर नहीं लगती। कहा कि संतों का समागम बड़े पुण्य उदय से मिलता है। इसलिए हमें मानव जीवन पाकर गुरु के बताए मार्गोंं पर चलकर अपना आत्म कल्याण करना चाहिए। उन्होंने रात्रि भोजन को महापाप बताया। गीता में रात्रि भोजन करने वालों को निशाचर कहा गया है। इंसान को सच्चा पुरुषार्थ करना चाहिए। कहा कि भगवान हमें सच्चा उपदेश देते हैं, उनकी वाणी कभी गलत नहीं हो सकती। हमारी जैसी दृष्टि होती है वैसी सृष्टि हमें नजर आती है। दिनेश जैन ने मेरी भावना का पाठ किया। धर्म सभा में विनोद जैन, अरुण जैन, अशोक जैन, लक्ष्मी जैन, संदीप जैन, उषा जैन, प्रवीण जैन, अशोक जैन व राकेश जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन