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बेटे को इंजीनियर बनाने को खुद से दूर रखा, वह सपना भी रह गया अधूरा
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मेरठ के जानीखुर्द स्थित एमआईईटी कॉलेज में छात्र की हत्या के मामले में पिता से घटना की जानकारी लेत
- फोटो : SARDANA
- शिकोहपुर के निखिल की हत्या का पता चलने पर परिवार में मचा कोहराम, परिजन पहुंच गए मेरठ
- पड़ोस में रहने वालों ने बताया कि छुट्टी में गांव आता था निखिल, उसका काफी अच्छा था व्यवहार
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। शिकोहपुर गांव के बीटेक के छात्र निखिल की बुधवार को मेरठ के एमआईईटी कॉलेज में चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। इसकी जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजन तुरंत ही मेरठ पहुंच गए। घर में केवल निखिल की मां मौजूद है, जिसका रो-रोकर बुरा हाल है।
निखिल के पिता पुष्पेंद्र उर्फ पप्पू किनौली शुगर मिल में सुपरवाइजर है। परिवार में मां रेखा के अलावा भाई मुकुल और बहन शिवानी है। भाई मुकुल गांव में खेती संभालता है और बहन बीए में पढ़ती है। निखिल को परिवार वालों ने इंजीनियर बनाने का सपना संजोकर अपने से दूर पढ़ने के लिए भेजा था। दो साल पहले जब निखिल पढ़ने के लिए मेरठ गया था तो मां रेखा के लिए सबसे ज्यादा भावुक पल था। वह बेटों और बेटी को कभी अलग नहीं रहने देती थी। बेटे के बेहतर भविष्य के लिए वह उसे मेरठ में रहने देने के लिए तैयार हो गई। परिजनों को यह नहीं पता था कि एक दिन निखिल इस तरह उनके बिछड़ जाएगा और उनका उसे इंजीनियर बनाने का सपना भी अधूरा रह जाएगा। उधर, पड़ोसियों ने बताया निखिल अधिकतर छुट्टी में घर आता था। उसका व्यवहार भी काफी अच्छा था। गांव में कभी किसी से उसका कोई मनमुटाव भी नहीं हुआ था। इस घटना के बारे में सुनकर पड़ोसी भी चौंक रहे है।
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- पड़ोस में रहने वालों ने बताया कि छुट्टी में गांव आता था निखिल, उसका काफी अच्छा था व्यवहार
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। शिकोहपुर गांव के बीटेक के छात्र निखिल की बुधवार को मेरठ के एमआईईटी कॉलेज में चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। इसकी जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजन तुरंत ही मेरठ पहुंच गए। घर में केवल निखिल की मां मौजूद है, जिसका रो-रोकर बुरा हाल है।
निखिल के पिता पुष्पेंद्र उर्फ पप्पू किनौली शुगर मिल में सुपरवाइजर है। परिवार में मां रेखा के अलावा भाई मुकुल और बहन शिवानी है। भाई मुकुल गांव में खेती संभालता है और बहन बीए में पढ़ती है। निखिल को परिवार वालों ने इंजीनियर बनाने का सपना संजोकर अपने से दूर पढ़ने के लिए भेजा था। दो साल पहले जब निखिल पढ़ने के लिए मेरठ गया था तो मां रेखा के लिए सबसे ज्यादा भावुक पल था। वह बेटों और बेटी को कभी अलग नहीं रहने देती थी। बेटे के बेहतर भविष्य के लिए वह उसे मेरठ में रहने देने के लिए तैयार हो गई। परिजनों को यह नहीं पता था कि एक दिन निखिल इस तरह उनके बिछड़ जाएगा और उनका उसे इंजीनियर बनाने का सपना भी अधूरा रह जाएगा। उधर, पड़ोसियों ने बताया निखिल अधिकतर छुट्टी में घर आता था। उसका व्यवहार भी काफी अच्छा था। गांव में कभी किसी से उसका कोई मनमुटाव भी नहीं हुआ था। इस घटना के बारे में सुनकर पड़ोसी भी चौंक रहे है।
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