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महामारी ने बेटियों व बहनों को डिजीटल माध्यम से दी जा रही ईदी
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अग्रवाल मंडी टटीरी। कोरोना महामारी में कई तरह की बंदिश लगीं तो त्योहार मनाने के तौर-तरीकों में भी बदलाव आ गया। ईद पर बेटियों की ससुराल में परिजनों की ओर से काफी सामान ईदी के रूप में भेजा जाता था। मौजूदा हालातों को देखते हुए लोग रिश्तेदारी में जाने से भी बच रहे हैं। कोरोना कर्फ्यू की वजह से लोगों ने जरूरी कार्यों के लिए दूसरे तरीके अपना लिये हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में अब ईदी भी ऑनलाइन भेजी जाने लगी।
ऑनलाइन ईदी भेजने वालों का कहना है कि कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ऐसे में अपनी और अपनों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। मुस्लिम समाज के लिए ईद-उल-फितर पर्व बेहद खास होता है। इस त्योहार पर समाज के लोग जमकर खरीदारी करते हैं। रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां तोहफे भिजवाते हैं। बहनों, बेटियों और बहुओं के यहां ईदी भेजने की परंपरा है। ईदी के तौर पर कपड़े, घरेलू सामान, कई तरह की मेवा, सिवइयां आदि काफी सामान भेजा जाता है। कोरोना ने इस परंपरा को भी काफी बदल दिया है। अब ज्यादातर लोग अपनों के यहां ऑनलाइन रुपये भेज रहे हैं। जिससे संक्रमण की चपेट में आने से बचा जा सके। त्योहार हर साल आएंगे, सभी सुरक्षित रहने चाहिए।
कस्बा निवासी मोहम्मद उर्फ काले ने बताया कि उनकी बेटी की ससुराल मुरादनगर में है। ऐसे माहौल में वहां जाना मुमकिन नहीं हो पाया। इसलिए बेटी को ईदी के रूप में ऑनलाइन रुपये भेज दिए हैं। निसार अहमद कस्सार ने बताया कि उनकी बेटी की ससुराल बनवारीपुर में है। इन दिनों कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। सरकार ने कोरोना कर्फ्यू भी लगा रखा है। जिसके चलते ऑनलाइन रुपये भेज रहे हैं। कस्बा निवासी सलीम ने बताया कि उनकी बेटी की ससुराल दिल्ली में है। कोरोना की वजह से दिल्ली में बहुत ज्यादा सख्ती की जा रही है। वहां जाना मुमकिन नहीं हुआ तो बेटी के खाते में ऑनलाइन रुपये भेजकर मुबारकबाद दी।
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ऑनलाइन ईदी भेजने वालों का कहना है कि कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ऐसे में अपनी और अपनों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। मुस्लिम समाज के लिए ईद-उल-फितर पर्व बेहद खास होता है। इस त्योहार पर समाज के लोग जमकर खरीदारी करते हैं। रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां तोहफे भिजवाते हैं। बहनों, बेटियों और बहुओं के यहां ईदी भेजने की परंपरा है। ईदी के तौर पर कपड़े, घरेलू सामान, कई तरह की मेवा, सिवइयां आदि काफी सामान भेजा जाता है। कोरोना ने इस परंपरा को भी काफी बदल दिया है। अब ज्यादातर लोग अपनों के यहां ऑनलाइन रुपये भेज रहे हैं। जिससे संक्रमण की चपेट में आने से बचा जा सके। त्योहार हर साल आएंगे, सभी सुरक्षित रहने चाहिए।
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कस्बा निवासी मोहम्मद उर्फ काले ने बताया कि उनकी बेटी की ससुराल मुरादनगर में है। ऐसे माहौल में वहां जाना मुमकिन नहीं हो पाया। इसलिए बेटी को ईदी के रूप में ऑनलाइन रुपये भेज दिए हैं। निसार अहमद कस्सार ने बताया कि उनकी बेटी की ससुराल बनवारीपुर में है। इन दिनों कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। सरकार ने कोरोना कर्फ्यू भी लगा रखा है। जिसके चलते ऑनलाइन रुपये भेज रहे हैं। कस्बा निवासी सलीम ने बताया कि उनकी बेटी की ससुराल दिल्ली में है। कोरोना की वजह से दिल्ली में बहुत ज्यादा सख्ती की जा रही है। वहां जाना मुमकिन नहीं हुआ तो बेटी के खाते में ऑनलाइन रुपये भेजकर मुबारकबाद दी।
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