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खेल-खेल में उजड़ गईं दो परिवारों की खुशियां

Sat, 08 May 2021 12:04 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 08 May 2021 12:04 AM IST
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Happiness of two families destroyed in sports
चांदीनगर (बागपत)। सिंगौली तगा गांव में दम घुटने से हुई चार बच्चों की मौत से दो परिवारों की खुशियां उजड़ गईं। यह दर्दनाक हादसा परिजनों को जिंदगी भर का गम दे गया। परिजन बच्चों को याद कर विलाप करते रहे हैं। उनका करुण रुदन देख ग्रामीणों की भी आंखें भर आईं। नियति, वंदना, अक्षय, कृष्णा और शिवांश करीब 11 बजे घर से बाहर खेलने के लिए निकले थे। खेलते-खेलते चारों बच्चे हैप्पी पुत्र राजकुमार के घेर में खड़ी उसकी कार में बैठ गए। खेल-खेल में ही चार जिंदगी हमेशा के लिए खामोश हो गईं। करीब दो बजे घेर में अंकुर पुत्र अनिल अपना ट्रैक्टर खड़ा करने गया तो उसने बच्चों को कार में बेहोशी की हालत में देखकर शोर मचाया। जिससे भीड़ एकत्र हो गई। कार खुलवाकर बच्चों को बाहर निकाला। तब तक नियति, वंदना, अक्षय और कृष्णा की मौत हो चुकी थी। दोनों की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अक्षय और कृष्णा की मां सीमा और नियति व वंदना की मां सविता रोते-रोते बार-बार बेहोश हो रहीं थीं। परिजनों और अन्य महिलाओं ने किसी तरह उन्हें संभाला।
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खाने खिलाने तलाशते रहे परिजन
काल का ग्रास बने चारों बच्चे करीब 11 बजे घर से निकल गए थे। कुछ देर बाद परिजन उन्हें खाना खिलाने के लिए तलाशने निकले तो वे नहीं मिले। जिससे परिजनों की बेचैनी बढ़ गई। परिजन उन्हें पूरे गांव में तलाशते रहे और ग्रामीणों से पूछते रहे। करीब दो बजे जब बच्चों का पता चला तो काफी देर हो चुकी थी।
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अक्षय और कृष्णा थे दो भाई, वंदना व नियति चार बहनें
अक्षय और कृष्णा के पिता विकास मूल रूप से गाजियाबाद जिले के छपरौला गांव के रहने वाला है। सिंगौली तगा गांव में उसकी ससुराल है। करीब सात साल पहले वह यहां रहने लगा और मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने लगा। संदीप भी मूल रूप से ढिकौली गांव का रहने वाला है। वह भी करीब छह साल पहले सिंगौली तगा में अपनी रिश्तेदारी में परिवार समेत आकर रहने लगा था। वह भी मजदूरी करता है। अक्षय और कृष्णा अपने माता-पिता की दो ही संतान थे। जबकि नियति और वंदना चार बहनें थीं। नियति गांव के ही प्राइमरी स्कूल में कक्षा-2 में पढ़ती थी। उससे बड़ी बहन 11 वर्षीय गुड्डी और 9 वर्षीय दीपा हैं। अक्षय और कृष्णा स्कूल नहीं जाते थे।
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