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Baghpat News: कोहरे और पाले से सरसों व सब्जी की फसलों को नुकसान, गेहूं को फायदा
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बागपत। इन दिनों पड़ रहे कोहरे और पाले ने किसानों को भी गहरी चोट पहुंचाई है। शीतलहर के कारण जहां आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। वहीं रबी सीजन की प्रमुख फसल आलू, सरसों के साथ टमाटर, मटर, मिर्च और बैंगन जैसी सब्जी पाले से प्रभावित हो रही हैं। किसानों को फसल बचाने के लिए हल्की सिंचाई करनी होगी और खेत के किनारे धुआं करना होगा।
जिले में आठ हजार हेक्टेयर में आलू, टमाटर, शिमला मिर्च, बैगन, सरसों आदि फसल की बुवाई होती है। रटौल के अलावा गौना, लहचौड़ा, सिंगोली तगा, सरफाबाद, गढ़ी कलंजरी, भागौट, भैड़ापुर, विनयपुर, बड़ागांव, चमरावल आदि गांवों में किसान बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती करते हैं, जो उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत है। मौसम की प्रतिकूलता ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिला उद्यान अधिकारी निधि ने बताया कि इन दिनों मटर, टमाटर, आलू, शिमला मिर्च और गोभी जैसी फसलें तैयार हैं, लेकिन कोहरे और पाले के कारण इन्हें बचाना आवश्यक है। इसके लिए खेतों में नमी बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खेतों में हल्की सिंचाई अवश्य करें।
जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव ने बताया कि यदि सिंचाई नहीं की गई तो फसलों में झुलसा रोग लगने का खतरा बढ़ जाएगा। इस रोग के लगने पर फसल की पत्तियां किनारों से सिकुड़ने लगती हैं और उनका रंग भूरा हो जाता है। फसलें इस रोग के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होती है। किसानों को खेतों के किनारे धुआं करना होगा ताकि फसल को बचाया जा सके। वहीं गेहूं की फसल के लिए पाला फायदेमंद है और जितनी भी ज्यादा ठंड होगी, उतनी ही फसल अच्छी होने की उम्मीद है।
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इस तरह बचाएं फसल
आलू व सब्जियों की फसल में माहू कीट पर नियंत्रण करने के लिए नीम का तेल तीन मिली प्रति लीटर हल्के गरम पानी में घोलकर छिड़काव करें। रसायनिक नियंत्रण के लिए थायक्लोप्रिड 21.7 प्रतिशत एससी या फिप्रोनिल पांच प्रतिशत एससी दवा का पांच मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
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जिले में आठ हजार हेक्टेयर में आलू, टमाटर, शिमला मिर्च, बैगन, सरसों आदि फसल की बुवाई होती है। रटौल के अलावा गौना, लहचौड़ा, सिंगोली तगा, सरफाबाद, गढ़ी कलंजरी, भागौट, भैड़ापुर, विनयपुर, बड़ागांव, चमरावल आदि गांवों में किसान बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती करते हैं, जो उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत है। मौसम की प्रतिकूलता ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिला उद्यान अधिकारी निधि ने बताया कि इन दिनों मटर, टमाटर, आलू, शिमला मिर्च और गोभी जैसी फसलें तैयार हैं, लेकिन कोहरे और पाले के कारण इन्हें बचाना आवश्यक है। इसके लिए खेतों में नमी बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खेतों में हल्की सिंचाई अवश्य करें।
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जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव ने बताया कि यदि सिंचाई नहीं की गई तो फसलों में झुलसा रोग लगने का खतरा बढ़ जाएगा। इस रोग के लगने पर फसल की पत्तियां किनारों से सिकुड़ने लगती हैं और उनका रंग भूरा हो जाता है। फसलें इस रोग के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होती है। किसानों को खेतों के किनारे धुआं करना होगा ताकि फसल को बचाया जा सके। वहीं गेहूं की फसल के लिए पाला फायदेमंद है और जितनी भी ज्यादा ठंड होगी, उतनी ही फसल अच्छी होने की उम्मीद है।
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इस तरह बचाएं फसल
आलू व सब्जियों की फसल में माहू कीट पर नियंत्रण करने के लिए नीम का तेल तीन मिली प्रति लीटर हल्के गरम पानी में घोलकर छिड़काव करें। रसायनिक नियंत्रण के लिए थायक्लोप्रिड 21.7 प्रतिशत एससी या फिप्रोनिल पांच प्रतिशत एससी दवा का पांच मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।