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स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहा दमकल विभाग
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बागपत। जिले का दमकल विभाग स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। विभाग के पास आग बुझाने के लिए जिले में सिर्फ चार गाड़ी हैं। इनमें 5-5 हजार लीटर की क्षमता की दो गाड़ी हैं। एक बड़ौत में और एक खेकड़ा में रहती है। 25 लीटर क्षमता की भी दो गाड़ियां हैं, जिनमें एक बागपत और दूसरी खेकड़ा में रहती है। इसके अलावा 350 लीटर क्षमता की वाटर मिस्ट है, जो कोरोना संक्रमण के दौरान सैनिटाइजर छिड़कने के काम में आई थी। एक फायर बुलेट खेकड़ा में है।
शासन को भेजी गई मांग
स्टाफ की बात करें तो दमकल विभाग के पास 11 सिपाही बागपत में, नौ बड़ौत में और सात खेकड़ा में हैं। एक हवलदार बागपत, दो बड़ौत और एक खेकड़ा में है। सेकेंड अफसर एक बागपत में हैं, जो बड़ौत का काम भी देखते हैं। एक सेकेंड अफसर खेकड़ा में है।
निकायों और शुगर मिल से लिया जाता है पानी
आग लगने की घटना होने पर दमकल विभाग अक्सर नजदीकी नगर पालिका व नगर पंचायतों के नलकूपों से पानी लेता है। इसके अलावा शुगर मिलों से भी पानी लिया जाता है। यहां मुख्य द्वारों पर हाइड्रेंट का निर्माण कराया गया है।
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प्राथमिक स्कूलों में अग्निशमन यंत्र नहीं
जिले में 555 प्राइमरी स्कूल हैं। इनमें ज्यादातर में अग्निशमन यंत्र नहीं है। दमकल विभाग के निरीक्षण में इसका खुलासा हुआ। जबकि लगभग सभी स्कूलों में मिड-डे मिल के लिए रसोई है। ऐसे में स्कूलों में आग लगने की घटना होने पर बड़ा हादसा हो सकता है। इसके अलावा बाजारों की तंग गलियों में भी ज्यादातर व्यापारी अग्निशमन यंत्र नहीं रखते।
आग लगने के ये हैं कारण
शहरी क्षेत्रों में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट सामने आता है। इसके अलावा देहात क्षेत्रों में जर्जर विद्युत लाइन, फसल के अवशेषों को जलाने और कूड़े के ढेर व बिटौड़ों में आग लगने की घटनाएं होती हैं। यदि लोग सावधानी बरतें तो आग लगने से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
स्टाफ और संस्थानों की कमी से शासन को अवगत कराते हुए मांग की गई है। इसके अलावा बीएसए को स्कूलों में अग्निशमन यंत्र लगवाने को पत्र लिखा गया है। समय-समय पर गोष्ठी कर लोगों को आग से बचाव के तरीके बताकर जागरूक किया जाता है। - नरेंद्र सिंह, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी, बागपत।
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शासन को भेजी गई मांग
स्टाफ की बात करें तो दमकल विभाग के पास 11 सिपाही बागपत में, नौ बड़ौत में और सात खेकड़ा में हैं। एक हवलदार बागपत, दो बड़ौत और एक खेकड़ा में है। सेकेंड अफसर एक बागपत में हैं, जो बड़ौत का काम भी देखते हैं। एक सेकेंड अफसर खेकड़ा में है।
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निकायों और शुगर मिल से लिया जाता है पानी
आग लगने की घटना होने पर दमकल विभाग अक्सर नजदीकी नगर पालिका व नगर पंचायतों के नलकूपों से पानी लेता है। इसके अलावा शुगर मिलों से भी पानी लिया जाता है। यहां मुख्य द्वारों पर हाइड्रेंट का निर्माण कराया गया है।
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प्राथमिक स्कूलों में अग्निशमन यंत्र नहीं
जिले में 555 प्राइमरी स्कूल हैं। इनमें ज्यादातर में अग्निशमन यंत्र नहीं है। दमकल विभाग के निरीक्षण में इसका खुलासा हुआ। जबकि लगभग सभी स्कूलों में मिड-डे मिल के लिए रसोई है। ऐसे में स्कूलों में आग लगने की घटना होने पर बड़ा हादसा हो सकता है। इसके अलावा बाजारों की तंग गलियों में भी ज्यादातर व्यापारी अग्निशमन यंत्र नहीं रखते।
आग लगने के ये हैं कारण
शहरी क्षेत्रों में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट सामने आता है। इसके अलावा देहात क्षेत्रों में जर्जर विद्युत लाइन, फसल के अवशेषों को जलाने और कूड़े के ढेर व बिटौड़ों में आग लगने की घटनाएं होती हैं। यदि लोग सावधानी बरतें तो आग लगने से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
स्टाफ और संस्थानों की कमी से शासन को अवगत कराते हुए मांग की गई है। इसके अलावा बीएसए को स्कूलों में अग्निशमन यंत्र लगवाने को पत्र लिखा गया है। समय-समय पर गोष्ठी कर लोगों को आग से बचाव के तरीके बताकर जागरूक किया जाता है। - नरेंद्र सिंह, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी, बागपत।