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अब टीले पर मिले भगवान परशुराम तपस्थली प्रमाण

Mon, 28 Mar 2016 12:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Mon, 28 Mar 2016 12:49 AM IST
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Evidence found on the mound now Lord Parshuram meditated site
पुरावशेषों को दिखाते अमित जैन। - फोटो : amar ujala
बागपत जनपद  की धरती अपने गर्भ में महाभारत और रामायण काल से जुडे़ कई स्थल छुपाए हैं, वहीं ताजा तरीन शोध और सर्वेक्षण के बाद इतिहासकारों ने दावा किया है कि पुरा महादेव स्थित परशुराम टीले पर महर्षि परशुराम से जुड़ी किवदन्तियों और उस समय की मानव सभ्यता के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन द्वारा प्राचीन टीले के किए स्थल सर्वेक्षण के दौरान टीले की ऊपरी सतह से ही साढे़ तीन हजार वर्ष प्राचीन ईंटें चार हजार वर्ष प्राचीन मृद भांडों के अवशेष समेत अन्य पुरातात्विक प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
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 रविवार को परशुराम टीले के ऊपर मौजूद शिव मंदिर और परशुराम तपस्थली मंदिर के महंत बाबा सूरज मुनि के निमंत्रण पर शहजाद राय शोध संस्थान की पुरास्थल सर्वेक्षण समिति ने टीले का पुरातात्विक सर्वेक्षण किया। टीम ने पुरातात्विक अवशेषों को एकत्रित किया तो इस बात की पुष्टि हुई कि इस टीले की ऊपरी सतह पर चार हजार वर्ष पहले प्राचीन सभ्यता और संस्कृति के निवासियों का आवास रहा होगा।

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इस संबंध में इतिहासकार अमित राय जैन ने बताया चित्रीत धूसर मृद भांड संस्कृति के मृद भांडो के खंडित अवशेष इस स्थल से मिलना, यहां की प्राचीन सभ्यता को सीधे चार हजार वर्ष पीछे ले जाते हैं। दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व महाभारत काल के दौरान इस संस्कृति के अवशेष परशुराम टीले की ऊपरी सतह से मिलना इस बात का द्योतक है कि यह टीला बहु सांस्कृतिक मानव सभ्यताओं का केंद्र रहा होगा। 

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जैन का दावा है यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग टीले का उत्खनन कराता है तो यहां से परशुराम की तपस्थली होने के प्रमाण और रामायण कालीन संस्कृति के पुरा अवशेष अवश्य की प्राप्त होंगे। इस संबंध में संस्था ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को सूचना दे दी। उन्होंने बताया इसकी प्रमाणिकता ईंटों की माप, लंबाई, चौड़ाई, ईंटों के निर्माण में मिट्टी के मिश्रण पहचान से की , अभिलेखों में टीला परशुराम टीले के नाम से दर्ज है।

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