अब टीले पर मिले भगवान परशुराम तपस्थली प्रमाण
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रविवार को परशुराम टीले के ऊपर मौजूद शिव मंदिर और परशुराम तपस्थली मंदिर के महंत बाबा सूरज मुनि के निमंत्रण पर शहजाद राय शोध संस्थान की पुरास्थल सर्वेक्षण समिति ने टीले का पुरातात्विक सर्वेक्षण किया। टीम ने पुरातात्विक अवशेषों को एकत्रित किया तो इस बात की पुष्टि हुई कि इस टीले की ऊपरी सतह पर चार हजार वर्ष पहले प्राचीन सभ्यता और संस्कृति के निवासियों का आवास रहा होगा।
इस संबंध में इतिहासकार अमित राय जैन ने बताया चित्रीत धूसर मृद भांड संस्कृति के मृद भांडो के खंडित अवशेष इस स्थल से मिलना, यहां की प्राचीन सभ्यता को सीधे चार हजार वर्ष पीछे ले जाते हैं। दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व महाभारत काल के दौरान इस संस्कृति के अवशेष परशुराम टीले की ऊपरी सतह से मिलना इस बात का द्योतक है कि यह टीला बहु सांस्कृतिक मानव सभ्यताओं का केंद्र रहा होगा।
जैन का दावा है यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग टीले का उत्खनन कराता है तो यहां से परशुराम की तपस्थली होने के प्रमाण और रामायण कालीन संस्कृति के पुरा अवशेष अवश्य की प्राप्त होंगे। इस संबंध में संस्था ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को सूचना दे दी। उन्होंने बताया इसकी प्रमाणिकता ईंटों की माप, लंबाई, चौड़ाई, ईंटों के निर्माण में मिट्टी के मिश्रण पहचान से की , अभिलेखों में टीला परशुराम टीले के नाम से दर्ज है।