यूपी की जमीन का नहीं किया बंदोबस्त
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रेत खनन के विवाद ने इस प्रकरण का खुलासा कर दिया। हरियाणा-यूपी सीमा में दीक्षित अवार्ड के बाद यमुना के दूसरी ओर गई फैजपुर निनाना के किसानों की भूमि को अभी तक निनाना के किसान अपनी ही मान रहे थे। करीब 168 हेक्टेयर भूमि में कुछ भूमि सरकारी भी शामिल है। इसमें से कुछ जमीन किसान खेती भी कर रहे थे। लेकिन, सोनीपत के अधिकारियों ने इस जमीन में खेल कर दिया। यूपी के किसानों जमीन को लावारिस दिखाकर उस जमीन को धीरे-धीरे कर हरियाणा के किसानों के नाम दर्ज करना शुरू कर दिया। ग्राम टांडा में भी यही खेल किया गया।
इस भूमि पर हरियाणा सरकार द्वारा यमुना खादर में रेत खनन का पट्टा दे दिया। जैसे ही रेत खनन शुरू हुआ फैजपुर निनाना के किसानों ने हंगामा खड़ा कर दिया, जिससे इस बड़े गोलमाल का खुलासा हुआ। हरियाणा के रिकार्ड की जांच की गई तो पता लगा कि नो मैन्स में भूमि दर्ज है। बागपत के किसानों की जमीन का कोई बंदोबस्त ही नहीं किया गया। इससे फैजपुर निनाना के किसान बौखला गए।
पैमाइश में भी दिखाई जल्दबाजी
बागपत। हरियाणा के अधिकारियों ने गोलमाल की पोल खुलती देख तुरंत ही बिना बागपत के अधिकारियों को लिए पैमाइश कर डाली और चोरी ऊपर से सीना जोरी करते हुए हरियाणा के किसानों की जमीन यूपी सीमा में दिखाते हुए पिलर भी लगा दिए। बागपत के अधिकारियों ने भी उनकी मंशा भांपते हुए अपनी ओर से पैमाइश करते हुए 168 हेक्टेयर भूमि का बंदोबस्त मांग लिया।
हाईकोर्ट जाएंगे किसान
बागपत। हरियाणा के अधिकारियों की कारगुजारी को लेकर फैजपुर निनाना के लोग अब हरियाणा हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। फैजपुर निनाना के प्रधान हरेंद्र चौधरी का कहना है कि सोनीपत के अधिकारियों की नीयत साफ नहीं हैं। इसलिए अब हरियाणा हाईकोर्ट में वाद दायर करना पड़ेगा।
किसानों को दस्तावेज उपलब्ध कराएंगे
बागपत। पैमाइश पर हुए विवाद को लेकर हरियाणा हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे किसानों को बागपत के अधिकारी सहयोग करने के लिए पत्रावलियां तैयार करा रहे हैं। एसडीएम राकेश कुमार ने बताया कि किसानों को जो भी पत्रावलियों की जरूरत होगी, उपलब्ध कराई जाएगी।