{"_id":"620fe4f9979d93264a00fe83","slug":"dalit-and-gurjar-most-important-bsp-and-congress-votes-can-also-spoil-maths-baghpat-news-mrt577416061","type":"story","status":"publish","title_hn":"दलित व गुर्जर सबसे अहम तो बसपा व कांग्रेस के वोट बिगाड़ सकते है गणित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दलित व गुर्जर सबसे अहम तो बसपा व कांग्रेस के वोट बिगाड़ सकते है गणित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागपत विधानसभा सीट
- दलित व गुर्जरों ने हाथी को सहारा देने की जगह फूल को चुना तो उसकी राह होगी आसान
- बसपा और कांग्रेस को ज्यादा वोट मिले तो कमल के फूल के लिए खड़ी होगी बड़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जनपद में मतदान होने के बाद सभी जातीय समीकरण व विपक्षियों को मिलने वाले वोट का आंकलन लगाते हुए हार-जीत का गणित लगा रहे है। मगर, बागपत विधानसभा सीट पर दलित व गुर्जर वोटर सबसे अहम साबित होंगे। इसके साथ ही बसपा व कांग्रेस को मिलने वाले वोट भी भाजपा और रालोद के गणित बिगाड़ सकते है।
बागपत की तीनों विधानसभा सीटों बागपत, बड़ौत व छपरौली में दस फरवरी को पहले ही चरण में मतदान हो गया था। इसके बाद से हर कोई प्रत्याशियों की हार-जीत का आंकलन करने में लगा है। हर जगह यही चर्चा होती दिख रही है कि आखिर इस बार किस सीट से किसकी जीत होगी। बागपत विधानसभा सीट पर तीन लाख 13 हजार 929 वोटर है, जिनमें से दो लाख 12 हजार 784 ने वोट डाला है। इनमें एक लाख 18 हजार 693 पुरुषों व 94 हजार 90 महिलाओं ने मतदान किया। यह माना जा रहा है कि मुस्लिम वोट डालने के लिए खूब आगे आए तो ठाकुर, गुर्जर, दलितों ने भी मतदान में खूब रुचि दिखाई है। ऐसे में इस सीट पर भी चुनाव पूरी तरह से फंसा हुआ दिख रहा है।
माना जा रहा है कि इस सीट पर दलित व गुर्जर का वोट अहम भूमिका में है। क्योंकि बसपा ने यहां से गुर्जर प्रत्याशी को उतारा हुआ था। अगर दलित व गुर्जरों ने हाथी को सहारा दिया होगा तो कमल का फूल मुरझा सकता है। यदि गुर्जर व दलितों ने कमल का फूल चुना तो उसकी राह काफी आसान हो जाएगी। ऐसे में हैंडपंप को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। ऐसे में हर कोई सबसे ज्यादा यह आंकलन कर रहा है कि बसपा व कांग्रेस को आखिर कितना वोट मिल सकता है। इन दोनों के वोट पर ही भाजपा व रालोद दोनों की हार-जीत का गणित टिका हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
- दलित व गुर्जरों ने हाथी को सहारा देने की जगह फूल को चुना तो उसकी राह होगी आसान
- बसपा और कांग्रेस को ज्यादा वोट मिले तो कमल के फूल के लिए खड़ी होगी बड़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जनपद में मतदान होने के बाद सभी जातीय समीकरण व विपक्षियों को मिलने वाले वोट का आंकलन लगाते हुए हार-जीत का गणित लगा रहे है। मगर, बागपत विधानसभा सीट पर दलित व गुर्जर वोटर सबसे अहम साबित होंगे। इसके साथ ही बसपा व कांग्रेस को मिलने वाले वोट भी भाजपा और रालोद के गणित बिगाड़ सकते है।
बागपत की तीनों विधानसभा सीटों बागपत, बड़ौत व छपरौली में दस फरवरी को पहले ही चरण में मतदान हो गया था। इसके बाद से हर कोई प्रत्याशियों की हार-जीत का आंकलन करने में लगा है। हर जगह यही चर्चा होती दिख रही है कि आखिर इस बार किस सीट से किसकी जीत होगी। बागपत विधानसभा सीट पर तीन लाख 13 हजार 929 वोटर है, जिनमें से दो लाख 12 हजार 784 ने वोट डाला है। इनमें एक लाख 18 हजार 693 पुरुषों व 94 हजार 90 महिलाओं ने मतदान किया। यह माना जा रहा है कि मुस्लिम वोट डालने के लिए खूब आगे आए तो ठाकुर, गुर्जर, दलितों ने भी मतदान में खूब रुचि दिखाई है। ऐसे में इस सीट पर भी चुनाव पूरी तरह से फंसा हुआ दिख रहा है।
विज्ञापन
माना जा रहा है कि इस सीट पर दलित व गुर्जर का वोट अहम भूमिका में है। क्योंकि बसपा ने यहां से गुर्जर प्रत्याशी को उतारा हुआ था। अगर दलित व गुर्जरों ने हाथी को सहारा दिया होगा तो कमल का फूल मुरझा सकता है। यदि गुर्जर व दलितों ने कमल का फूल चुना तो उसकी राह काफी आसान हो जाएगी। ऐसे में हैंडपंप को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। ऐसे में हर कोई सबसे ज्यादा यह आंकलन कर रहा है कि बसपा व कांग्रेस को आखिर कितना वोट मिल सकता है। इन दोनों के वोट पर ही भाजपा व रालोद दोनों की हार-जीत का गणित टिका हुआ है।
विज्ञापन