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भदौड़ा को मिले जतन सिरोही के शूटर
Baghpat
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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बागपत। उधम करनावल और योगेश भदौड़ा के बीच चल रहे गैंगवार को रोकने के लिए पुलिस को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ेगा। मरने-मारने पर उतारू हो चुके दोनों गैंग ना केवल एक दूसरे के खून के प्यासे हैं बल्कि अपनी ताकत भी लगातार बढ़ा रहे हैं। पुलिस को ताजा जानकारी यह मिली है कि एनकाउंटर में मारे जा चुके जतन सिरोही के शूटर अब योगेश भदौड़ा के लिए काम कर रहे हैं। भदौड़ा बुलंदशहर में छिपने के लिए सिरोही के ठिकानों का भी इस्तेमाल कर रहा है।
योगेश भदौड़ा मेरठ, गाजियाबाद और बागपत में वांटेड है। हालांकि एक के बाद एक वारदात करने के बावजूद उस पर इनाम की राशि अभी तक केवल पांच हजार ही है। गैंगवार के चलते पुलिस उसे मोस्ट वांटेड मान रही है। इसके बावजूद उसका पकड़ा जाना पुलिस के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। इसके दो कारण हैं। एक तो वह अपने ठिकाने लगातार बदलता है। दूसरा उसके पास छिपने के लिए ठिकाने बहुत हैं। सहारनपुर में गंगोह क्षेत्र के एक प्रधान से उसकी दोस्ती है। उसके घर से उसे दो साल पहले पकड़ा गया था।
एनकाउंटर में मारे जा चुके वाराणसी के संतोष उर्फ किट्टू से भी उसका याराना था। इसके अलावा 29 जुलाई 2008 को एनकाउंटर में मारे जा चुके बुलंदशहर के जतन सिरोही से भी उसके तार जुड़े थे। एसओजी के सूत्रों की मानें तो सिरोही के शूटर पहले तो अकेले दम पर क्राइम करते रहे, अब योगेश भदौड़ा से मिल गए हैं। उधम से बदला लेने के लिए वह इनका इस्तेमाल भी कर रहा है। ये शूटर भी भदौड़ा की तरह अपने मोबाइल नंबर और छिपने के ठिकाने बदल रहे हैं। इसके चलते पुलिस इन तक नहीं पहुंच पा रही। इस पर एसपी लव कुमार का कहना है कि योगेश भदौड़ा और उसके शूटरों की तलाश के लिए जहां से भी सूचना मिल रही है, वहीं पुलिस टीम भेजी जा रही है। अभी तक उसके बारे में सटीक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन पुलिस हर संभव कोशिश कर रही है।
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योगेश भदौड़ा मेरठ, गाजियाबाद और बागपत में वांटेड है। हालांकि एक के बाद एक वारदात करने के बावजूद उस पर इनाम की राशि अभी तक केवल पांच हजार ही है। गैंगवार के चलते पुलिस उसे मोस्ट वांटेड मान रही है। इसके बावजूद उसका पकड़ा जाना पुलिस के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। इसके दो कारण हैं। एक तो वह अपने ठिकाने लगातार बदलता है। दूसरा उसके पास छिपने के लिए ठिकाने बहुत हैं। सहारनपुर में गंगोह क्षेत्र के एक प्रधान से उसकी दोस्ती है। उसके घर से उसे दो साल पहले पकड़ा गया था।
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एनकाउंटर में मारे जा चुके वाराणसी के संतोष उर्फ किट्टू से भी उसका याराना था। इसके अलावा 29 जुलाई 2008 को एनकाउंटर में मारे जा चुके बुलंदशहर के जतन सिरोही से भी उसके तार जुड़े थे। एसओजी के सूत्रों की मानें तो सिरोही के शूटर पहले तो अकेले दम पर क्राइम करते रहे, अब योगेश भदौड़ा से मिल गए हैं। उधम से बदला लेने के लिए वह इनका इस्तेमाल भी कर रहा है। ये शूटर भी भदौड़ा की तरह अपने मोबाइल नंबर और छिपने के ठिकाने बदल रहे हैं। इसके चलते पुलिस इन तक नहीं पहुंच पा रही। इस पर एसपी लव कुमार का कहना है कि योगेश भदौड़ा और उसके शूटरों की तलाश के लिए जहां से भी सूचना मिल रही है, वहीं पुलिस टीम भेजी जा रही है। अभी तक उसके बारे में सटीक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन पुलिस हर संभव कोशिश कर रही है।
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