फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   520 patients received three months of TB

तीन माह में मिले टीबी के 520 मरीज

Mon, 02 May 2016 01:21 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत Updated Mon, 02 May 2016 01:21 AM IST
विज्ञापन
बागपत। टीबी का प्रकोप जिले में बढ़ता जा रहा है। हर दिन पांच नए व्यक्ति टीबी के मरीज हो रहे हैं। लापरवाही के चलते यह बीमारी लोगों में घर कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार तीन माह में 520 लोगों में टीबी के लक्षण मिले हैं। वर्ष 2015 में 1766 लोग टीबी से ग्रस्त पाए गए थे।
विज्ञापन


जनपद बागपत में टीबी का प्रकोप दिनों दिन बढ़ता जा रहा है, हालत ऐसे पैदा हो गए हैं कि हर एक दिन पांच व्यक्ति टीबी रोग से ग्रस्त होता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनवरी, फरवरी और मार्च माह में जनपद भर से 520 लोगों में टीबी के लक्षण मिले हैं। इनका उपचार जिला अस्पताल में शुरू हो गया है। 
विज्ञापन


स्वास्थ्य विभाग के अनुसार परिवार में यदि एक को व्यक्ति को भी अगर टीबी हो जाए तो संक्रमण के कारण अन्य सदस्य में भी यह बीमारी फैलने का खतरा अधिक रहता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार तीन माह के अंतराल में जनपदभर के 520 लोगों में टीबी के सकारात्मक लक्षण मिले हैं। वर्ष 2015 में 1766 लोगों ग्रस्त थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक मान रहे हैं टीबी का रोग लापरवाही एवं जागरूकता के अभाव में फैलता जा रहा है। टीबी का मरीज मुंह पर कपड़ा लगाते हुए शर्म महसूस करता है। इसका खामियाजा दूसरे को भुगतना पड़ रहा है। एसीएमओ डॉ. रामेश्वर दयाल ने बताया टीबी से बचाव को लगातार जागरूकता अभियान एवं स्कूल कॉलेजों में गोष्ठियां कराई जाती हैं। इसके बाद भी लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देख लोगों को जागरूक कराया जाएगा। 

q टीबी से बचाव को स्वास्थ्य विभाग की अपील
स्वास्थ्य विभाग का प्रत्येक चिकित्सक टीबी के मरीजों से अपील कर रहे हैं कि वह अपने मुंह पर रुमाल या कोई ओर कपड़ा ढक कर रखें। खांसी या छींक आने पर मुंह पर हाथ कपड़ा या हाथ रख लें, क्योंकि उसकी एक लापरवाही से दूसरा व्यक्ति को भी टीबी हो सकता है। यात्रा करते समय सावधानियां बरते। 

q डौला में एक्सडीआर श्रेणी का मरीज
जनपद के डौला गांव में ही एक्सडीआर (एक्सट्रीबली ड्रग्स रजिस्टर) कैटेगिरी  का एक मरीज है। इसके उपचार के लिए चिकित्सकों ने एक व्यक्ति की तैनाती की हुई है। जो लखनऊ से दवा लाकर मरीज को देता है।


 तीन तरह की होती है टीबी की बीमारी
टीवी विभाग में तैनात जिला कार्यक्रम समन्वयक मनीष पांडेय ने बताया टीबी तीन तरह की होती है। पहली कैटेगिरी  नार्मल होती है। इसमें मरीजों को छह से आठ माह तक डॉट्स दवा से रोकथाम हो जाती है। दूसरी कैटेगिरी  एमडीआर (मल्टी ड्रग्स रजिस्टर) होती है। यह कैटेगिरी ऐसी होती है कि इसमें दवा भी असर नहीं करती। दवा के साथ-साथ इंजेक्शन भी लगाया जाता है। तीसरी कैटेगिरी  एक्सडीआर (एक्सट्रीबली ड्रग्स रजिस्टर) होती है। यह कैटेगिरी  सबसे खतरनाक होती है। इस कैटेगिरी  के मरीज की दवा केवल लखनऊ से आती हैं। इसमें मरते दम तक दवा खानी पड़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed