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युवाओं ने हिलवाड़ी केदृष्टिहीन मां व बेटे को गोद लिया
Updated Thu, 13 Sep 2018 01:13 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
हिलवाड़ी गांव में जन्म से दृष्टिहीन मां और बेटा शासन से आर्थिक मदद मांगते थक गए, लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिली। अब बाबली के युवाओं ने गोद लेकर आजीवन तक दोनों का पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी ली।
हिलवाड़ी गांव मेें शिमला (60) पत्नी स्वर्गीय विजयपाल और उसका बेटा विकास (30) जन्मजात दृष्टिहीन हैं, शिमला के पति की पांच साल पहले मौत हो चुकी है। इस कारण दोनों (मां और बेटा ) आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, काफी समय से वे डीएम, एसडीएम व अन्य अधिकारियों के चक्कर काटते थक चुके हैं, लेकिन उन्हें आर्थिक सहारा नहीं मिला, अब दोनों गांव में मांगकर पेट भरते थे, इसकी जानकारी जब बोबी बावली को मिली तो वह बुधवार को युवाओं के साथ हिलवाड़ी गांव में पहुंचा और उसने मां और बेटे को गोद लिया और उनका जीवन भर पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी उठानी की बात कही। दोनों की हर समस्या को प्रथामिकता के साथ हल किया जाएगा। युवाओं के साहसिक निर्णय की दोनों गांवों के लोगों ने सराहना की है।
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हिलवाड़ी गांव में जन्म से दृष्टिहीन मां और बेटा शासन से आर्थिक मदद मांगते थक गए, लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिली। अब बाबली के युवाओं ने गोद लेकर आजीवन तक दोनों का पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी ली।
हिलवाड़ी गांव मेें शिमला (60) पत्नी स्वर्गीय विजयपाल और उसका बेटा विकास (30) जन्मजात दृष्टिहीन हैं, शिमला के पति की पांच साल पहले मौत हो चुकी है। इस कारण दोनों (मां और बेटा ) आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, काफी समय से वे डीएम, एसडीएम व अन्य अधिकारियों के चक्कर काटते थक चुके हैं, लेकिन उन्हें आर्थिक सहारा नहीं मिला, अब दोनों गांव में मांगकर पेट भरते थे, इसकी जानकारी जब बोबी बावली को मिली तो वह बुधवार को युवाओं के साथ हिलवाड़ी गांव में पहुंचा और उसने मां और बेटे को गोद लिया और उनका जीवन भर पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी उठानी की बात कही। दोनों की हर समस्या को प्रथामिकता के साथ हल किया जाएगा। युवाओं के साहसिक निर्णय की दोनों गांवों के लोगों ने सराहना की है।
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