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भागोट में तैयार की जा रही हॉकी खिलाड़ियों की पौध
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बागपत। जौहड़ी गांव का नाम आते निशानेबाज और मलकपुर नाम आते पहलवानों का जिक्र होता है। इसी तरह भागोट गांव में हॉकी खिलाड़ियों की पौध को तैयार किया जा रहा है। यहां पर हॉकी की नई प्रतिभाओं को तैयार किया जा रहा है। कोच कृपाल सिंह अंडर -16 वर्ग के बालक और बालिका वर्ग की हॉकी टीम तैयार करने में जुटे हैं।
गाजियाबाद की सीमा से सटे भागोट गांव के बालक और बालिकाओं में हॉकी के प्रति जुनून सिर चढ़कर बोल रहा है। खेल विभाग से सेवानिवृत्त कोच कृपाल सिंह ने यहां पर हॉकी का माहौल तैयार करना शुरू कर दिया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान पर वह खिलाड़ियों की पौध को तैयार करने में जुटे हैं। वर्तमान में खेल के मैदान पर 50 खिलाड़ी (बालक और बालिका) अंडर -16 वर्ग के रोजाना हॉकी का अभ्यास कर रहे हैं। कृपाल सिंह ने खिलाड़ियों के लिए हॉकी की किट और ड्रेस का वितरण किया। अब हॉकी के खेल का जज्बा पैदा हो गया है। हर रोज अभ्यास करने के लिए बालक और बालिका समय पर मैदान पर पहुंच जाते हैं। कोच कृपाल सिंह कहते हैं कि वह चाहते हैं कि भागोट गांव को हॉकी के नाम जाना जाए। इसलिए गांव के बालक और बालिकाओं में हॉकी खेल प्रति जागरूक कर रहे हैं, फिलहाल काफी संख्या में बच्चे खेल का नियमित अभ्यास कर रहे हैं, इसी गति से बालक बालिकाओं ने रुचि ली तो गांव के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गांव का नाम रोशन करेंगे।
मेरठ की टीम को किया पराजित
कोच ने बताया कि हॉकी भागोट गांव के नाम से अंडर -16 वर्ग की टीम तैयार की गई है। हॉकी की टीम ने मेरठ में जाकर मेरठ की टीम को हराया। इसके बाद मेरठ की टीम भागोट आई तो यहां भी उस टीम को हराया। इससे टीम के हौसले बढ़े हैं। साथ ही खिलाड़ियों के अभिभावक भी बच्चों में खेल की भावना जागृत कर रहे हैं।
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क्या कहते हैं खिलाड़ी
हॉकी सीख रहे शिवा का कहना है कि हॉकी सीखकर उन्हें खुशी मिल रही है। वह हॉकी में देश का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं।
प्रशिक्षु खिलाड़ी राहुल कहते हैं कि हॉकी का गांव में माहौल बन रहा है। वह भी देश के लिए हॉकी खेलना चाहते हैं।
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गाजियाबाद की सीमा से सटे भागोट गांव के बालक और बालिकाओं में हॉकी के प्रति जुनून सिर चढ़कर बोल रहा है। खेल विभाग से सेवानिवृत्त कोच कृपाल सिंह ने यहां पर हॉकी का माहौल तैयार करना शुरू कर दिया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान पर वह खिलाड़ियों की पौध को तैयार करने में जुटे हैं। वर्तमान में खेल के मैदान पर 50 खिलाड़ी (बालक और बालिका) अंडर -16 वर्ग के रोजाना हॉकी का अभ्यास कर रहे हैं। कृपाल सिंह ने खिलाड़ियों के लिए हॉकी की किट और ड्रेस का वितरण किया। अब हॉकी के खेल का जज्बा पैदा हो गया है। हर रोज अभ्यास करने के लिए बालक और बालिका समय पर मैदान पर पहुंच जाते हैं। कोच कृपाल सिंह कहते हैं कि वह चाहते हैं कि भागोट गांव को हॉकी के नाम जाना जाए। इसलिए गांव के बालक और बालिकाओं में हॉकी खेल प्रति जागरूक कर रहे हैं, फिलहाल काफी संख्या में बच्चे खेल का नियमित अभ्यास कर रहे हैं, इसी गति से बालक बालिकाओं ने रुचि ली तो गांव के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गांव का नाम रोशन करेंगे।
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मेरठ की टीम को किया पराजित
कोच ने बताया कि हॉकी भागोट गांव के नाम से अंडर -16 वर्ग की टीम तैयार की गई है। हॉकी की टीम ने मेरठ में जाकर मेरठ की टीम को हराया। इसके बाद मेरठ की टीम भागोट आई तो यहां भी उस टीम को हराया। इससे टीम के हौसले बढ़े हैं। साथ ही खिलाड़ियों के अभिभावक भी बच्चों में खेल की भावना जागृत कर रहे हैं।
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क्या कहते हैं खिलाड़ी
हॉकी सीख रहे शिवा का कहना है कि हॉकी सीखकर उन्हें खुशी मिल रही है। वह हॉकी में देश का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं।
प्रशिक्षु खिलाड़ी राहुल कहते हैं कि हॉकी का गांव में माहौल बन रहा है। वह भी देश के लिए हॉकी खेलना चाहते हैं।