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अंहकार ही दूखों का मूल कारण है- अरूण मुनि
Updated Thu, 17 Aug 2017 02:12 AM IST
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बड़ौत (बागपत)। जैन आचार्य अरुण मुनि ने कहा अहंकार ही दुख का मूल कारण होता है। इससे दूरी बढ़ जाती है, आपसी रिश्तों में दरार आ जाती हैं।
बुधवार को जैन स्थानक नया बाजार में आयोजित धर्मसभा मेें उन्होंने कहा क्रोध को यदि राजा मान लिया जाए तो मान उसका महामंत्री होता है। मनुष्य को जितना अधिक अहंकार होगा, उतना ही वह अपने आप को बड़ा मान लेता है। कहा मनुष्य के भटकने का कारण सिर्फ अहंकार होता है कि वह समझता है कि मैं भी कुछ हूं। मेरे जैसा दूसरा नहीं है। मनुष्य को चाहिए वह अपने अंदर के अहम को त्याग दें। अपने आपको छोड़ा जाएगा तो क्रोध की ज्वाला सारे स्वास्थ्य को राख कर देगा। उन्होंने कहा आत्मा और परमात्मा के बीच अहम ही एक ऐसी दीवार है, जो दोनों को मिलने नहीं देती है। इसमें जयप्रकाश, सोहन पाल, राजीव जैन, प्रवीण जैन, अजय जैन, हंस कुमार, दीपक जैन, शैल बाला, इंद्राणी, कमलेश, गीता, श्वेता आदि रहे।
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बुधवार को जैन स्थानक नया बाजार में आयोजित धर्मसभा मेें उन्होंने कहा क्रोध को यदि राजा मान लिया जाए तो मान उसका महामंत्री होता है। मनुष्य को जितना अधिक अहंकार होगा, उतना ही वह अपने आप को बड़ा मान लेता है। कहा मनुष्य के भटकने का कारण सिर्फ अहंकार होता है कि वह समझता है कि मैं भी कुछ हूं। मेरे जैसा दूसरा नहीं है। मनुष्य को चाहिए वह अपने अंदर के अहम को त्याग दें। अपने आपको छोड़ा जाएगा तो क्रोध की ज्वाला सारे स्वास्थ्य को राख कर देगा। उन्होंने कहा आत्मा और परमात्मा के बीच अहम ही एक ऐसी दीवार है, जो दोनों को मिलने नहीं देती है। इसमें जयप्रकाश, सोहन पाल, राजीव जैन, प्रवीण जैन, अजय जैन, हंस कुमार, दीपक जैन, शैल बाला, इंद्राणी, कमलेश, गीता, श्वेता आदि रहे।