{"_id":"870e50dd44c1e141c2fece38dbfd3db9","slug":"when-would-set-synaphea-of-lacerated-wound-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कब कायम होगी तमसा की रवानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कब कायम होगी तमसा की रवानी
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Fri, 05 Jun 2015 12:09 AM IST
विज्ञापन
पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व में अपने में समेटे तमसा नदी इन दिनों शहर के नालों की गंदगी झेलने के लिए अभिशप्त है। भले ही पर्यावरण दिवस पर तमसा की शान में कुछ संगठनों की ओर से कसीदे गढ़े जाते हों लेकिन स्वच्छता और सफाई के लिए धरातल स्तर पर कुछ नहीं हो रहा है। अब देखना है कि सरकारी प्रयास और संगठनों की कवायद तमसा की रवानी को कायम बनाने में कितने कारगर होते हैं।
42295 वर्ग किमी में फैले जिले में तमसा, घाघरा, छोटी सरयू आदि प्रमुख नदियां हैं। जिले की प्रमुख नदी होने के बावजूद इसमें गंदगी का अंबार लगा हुआ है। कभी इस नदी का जल स्वच्छ और मीठा होता था। लोग इसका इस्तेमाल पीने के लिए करते थे लेकिन पिछले एक दशक से नदी में पड़ोसी जिलों में उद्योगों का कचरा और शहर के नालों का गंदा पानी गिराए जाने से तमसा प्रदूषित हो चुकी है। तमसा के प्रदूषण का आलम यह हैै कि गंदगी और प्रदूषण के चलते न केवल नदी काली पड़ चुकी है, बल्कि मछलियों के लिए भी काल साबित हुई।
फूलपुर तहसील क्षेत्र में कई बार मछलियों के मरने और आए दिन तमसा के काला पड़ने की सूचनाएं आती रहती हैं। यह अलग बात है कि कभी-कभी शहर में तमसा बचाओ आंदोलन जैसी संस्थाएं नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए आवाज उठा रही थी। तमसा के प्रदूषित होने में नगरपालिका कम जिम्मेदार नहीं है। शहर की पूरी गंदगी नालों के जरिए नदी में गिराई जाती है। इनमें धरमूनाला, कोट मुहल्ला, कोलघाट, हरिबंशपुर, नरौली, सिधारी, दौलतपुर आदि नाले प्रमुख हैं, जिनसे होकर शहर की गंदगी तमसा में गिरती है।
विज्ञापन
यह सब कुछ जल प्रदूषण नियंत्रण एवं निवारण कानून 1974 के खिलाफ है। इस नियम के अनुसार, शहर के गंदे जल को पहले ट्रीटमेंट प्लान के जरिए शुद्धीकरण के बाद ही जल नदी, झील, तालाब आदि में गिराया जाना चाहिए लेकिन पालिका प्रशासन द्वारा ऐसा कोई भी कार्य नहीं किया जाता।
जिले में ट्रीटमेंट प्लान जैसी कोई योजना नहीं है। जल निगम विभाग द्वारा सीवर लाइन बनाया गया है लेकिन सीवर के जरिए गंदा पानी नाले में जाता है। नाले के जरिए पुन: नदी में मिल जाता है। गंदे पानी को साफ करने के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लान तैयार करने का प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। - ओमप्रकाश, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका
अस्तित्व खो रहे हैं शहर के पोखरे ः कचरे आदि से न केवल तमसा नदी प्रदूषित हुई बल्कि शहर के ज्योति निकेतन स्कूल के पास अतलस तालाब भी अपना अस्तित्व खो रहा है। यह सभी स्थानीय लोगों द्वारा उत्पन्न कचरे के ढेर से पाटे जा रहे हैं। जबकि कभी इस पोखरे का बड़ा महत्व था।
बता दें कि केवल शहर में दर्जनों पोखरे हुआ करते थे, जिनके ऊपर शहरवासियों का जीवन निर्भर था लेकिन धीरे-धीरे आबादी बढ़ने के साथ-साथ ही पोखरों का पाटने की लिप्सा के चलते पोखरे तालाबों में तब्दील हो चुके हैं और भविष्य में वह अट्टालिकाओं में तब्दील हो जाएं तो हमें हैरानी नहीं होनी चाहिए।
सुविधा विहीन है प्रदूषण नियंत्रण विभाग ः मंडल में होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए मंडलीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय स्थापित किया गया है लेकिन यह कार्यालय प्रदूषण पर रोक लगाने में बिल्कुल असहाय है। इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि प्रदूषण नापने के लिए वायु प्रदूषण मापने की मशीन (हाई वाल्यूम सेंपलर) उपलब्ध नहीं है, ना ही वायु प्रदूषण या फिर जल प्रदूषण की जांच के लिए भी कोई यंत्र मौजूद है।
ऐसे में मामूली जांच के लिए भी कार्यालय को गोरखपुर या वाराणसी जैसे बड़े शहरों में स्थापित कार्यालयों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में रिपोर्ट आने में हफ्तों समय लग जाता है। इतने दिनों में दोषी व्यक्ति अपनी खामियां कुछ दिनों के लिए छिपा देता है। सुविधाओं से वंचित इस कार्यालय के अधिकारी अपने अधिकार के मामले में भी खुद को असहाय है। प्रदूषण कार्यालय दोषियों को नोटिस तो भेजता है, लेकिन कार्रवाई चूंकि प्रशासन को करनी होती है। इसलिए दर्जनों प्रतिष्ठानों और कार्यालयों को भेजा गया नोटिस कार्रवाई के अभाव में प्रतीकात्मक ही बनकर रह जाता है।
प्रदूषण फैलाने में जेनरेटर निभा रहे प्रमुख भूमिका ः जेनरेटर के जरिए प्रदूषण फैलाने वालों में शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठान ही नहीं सरकारी कार्यालय भी शामिल है। नियमत: इन स्थानों में साइलेंसर युक्त जेनरेटर लगा होना चाहिए लेकिन इसका उल्लंघन किया जाता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय द्वारा जेनरेटर से प्रदूषण फैलाने वालों की तैयार सूची में कलेक्ट्रेट के बाहर स्थित फोटो स्टेट की दूकानें, नगरपालिका कार्यालय, मुख्य चौक क्षेत्र में स्थित दूकानें, शिब्ली कालेज के आसपास की दूकानें, एलआईसी बिल्डिंग रैदोपुर, बेलईसा, सिधारी क्षेत्र में स्थित प्रतिष्ठान, और कई होटल व्यवसायी शामिल हैं। इनमें से कई लोगों को चेतावनी भी दी गई है लेकिन कोई सुधरने को तैयार नहीं है।
तमसा तट पर कभी क्रौच वध की हृदय विदारक घटना साहित्यकारों के लिए मूलमंत्र ‘वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान, निकल कर आंखों से चुपचाप, बही होगी कविता अनजान’ बन गया। इससे जाहिर होता है कि कभी तमसा में जल की रवानी और हरियाली इतनी रही होगी कि अमृत समान इस जल से लोगबाग के अलावा पशु-पक्षी अपनी प्यास बुझाने के लिए आते थे लेकिन आज शहरों की गंदगी और कचरे से वही जल विष के मानिंद हो गया।
विज्ञापन
42295 वर्ग किमी में फैले जिले में तमसा, घाघरा, छोटी सरयू आदि प्रमुख नदियां हैं। जिले की प्रमुख नदी होने के बावजूद इसमें गंदगी का अंबार लगा हुआ है। कभी इस नदी का जल स्वच्छ और मीठा होता था। लोग इसका इस्तेमाल पीने के लिए करते थे लेकिन पिछले एक दशक से नदी में पड़ोसी जिलों में उद्योगों का कचरा और शहर के नालों का गंदा पानी गिराए जाने से तमसा प्रदूषित हो चुकी है। तमसा के प्रदूषण का आलम यह हैै कि गंदगी और प्रदूषण के चलते न केवल नदी काली पड़ चुकी है, बल्कि मछलियों के लिए भी काल साबित हुई।
विज्ञापन
फूलपुर तहसील क्षेत्र में कई बार मछलियों के मरने और आए दिन तमसा के काला पड़ने की सूचनाएं आती रहती हैं। यह अलग बात है कि कभी-कभी शहर में तमसा बचाओ आंदोलन जैसी संस्थाएं नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए आवाज उठा रही थी। तमसा के प्रदूषित होने में नगरपालिका कम जिम्मेदार नहीं है। शहर की पूरी गंदगी नालों के जरिए नदी में गिराई जाती है। इनमें धरमूनाला, कोट मुहल्ला, कोलघाट, हरिबंशपुर, नरौली, सिधारी, दौलतपुर आदि नाले प्रमुख हैं, जिनसे होकर शहर की गंदगी तमसा में गिरती है।
विज्ञापन
यह सब कुछ जल प्रदूषण नियंत्रण एवं निवारण कानून 1974 के खिलाफ है। इस नियम के अनुसार, शहर के गंदे जल को पहले ट्रीटमेंट प्लान के जरिए शुद्धीकरण के बाद ही जल नदी, झील, तालाब आदि में गिराया जाना चाहिए लेकिन पालिका प्रशासन द्वारा ऐसा कोई भी कार्य नहीं किया जाता।
जिले में ट्रीटमेंट प्लान जैसी कोई योजना नहीं है। जल निगम विभाग द्वारा सीवर लाइन बनाया गया है लेकिन सीवर के जरिए गंदा पानी नाले में जाता है। नाले के जरिए पुन: नदी में मिल जाता है। गंदे पानी को साफ करने के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लान तैयार करने का प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। - ओमप्रकाश, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका
अस्तित्व खो रहे हैं शहर के पोखरे ः कचरे आदि से न केवल तमसा नदी प्रदूषित हुई बल्कि शहर के ज्योति निकेतन स्कूल के पास अतलस तालाब भी अपना अस्तित्व खो रहा है। यह सभी स्थानीय लोगों द्वारा उत्पन्न कचरे के ढेर से पाटे जा रहे हैं। जबकि कभी इस पोखरे का बड़ा महत्व था।
बता दें कि केवल शहर में दर्जनों पोखरे हुआ करते थे, जिनके ऊपर शहरवासियों का जीवन निर्भर था लेकिन धीरे-धीरे आबादी बढ़ने के साथ-साथ ही पोखरों का पाटने की लिप्सा के चलते पोखरे तालाबों में तब्दील हो चुके हैं और भविष्य में वह अट्टालिकाओं में तब्दील हो जाएं तो हमें हैरानी नहीं होनी चाहिए।
सुविधा विहीन है प्रदूषण नियंत्रण विभाग ः मंडल में होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए मंडलीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय स्थापित किया गया है लेकिन यह कार्यालय प्रदूषण पर रोक लगाने में बिल्कुल असहाय है। इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि प्रदूषण नापने के लिए वायु प्रदूषण मापने की मशीन (हाई वाल्यूम सेंपलर) उपलब्ध नहीं है, ना ही वायु प्रदूषण या फिर जल प्रदूषण की जांच के लिए भी कोई यंत्र मौजूद है।
ऐसे में मामूली जांच के लिए भी कार्यालय को गोरखपुर या वाराणसी जैसे बड़े शहरों में स्थापित कार्यालयों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में रिपोर्ट आने में हफ्तों समय लग जाता है। इतने दिनों में दोषी व्यक्ति अपनी खामियां कुछ दिनों के लिए छिपा देता है। सुविधाओं से वंचित इस कार्यालय के अधिकारी अपने अधिकार के मामले में भी खुद को असहाय है। प्रदूषण कार्यालय दोषियों को नोटिस तो भेजता है, लेकिन कार्रवाई चूंकि प्रशासन को करनी होती है। इसलिए दर्जनों प्रतिष्ठानों और कार्यालयों को भेजा गया नोटिस कार्रवाई के अभाव में प्रतीकात्मक ही बनकर रह जाता है।
प्रदूषण फैलाने में जेनरेटर निभा रहे प्रमुख भूमिका ः जेनरेटर के जरिए प्रदूषण फैलाने वालों में शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठान ही नहीं सरकारी कार्यालय भी शामिल है। नियमत: इन स्थानों में साइलेंसर युक्त जेनरेटर लगा होना चाहिए लेकिन इसका उल्लंघन किया जाता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय द्वारा जेनरेटर से प्रदूषण फैलाने वालों की तैयार सूची में कलेक्ट्रेट के बाहर स्थित फोटो स्टेट की दूकानें, नगरपालिका कार्यालय, मुख्य चौक क्षेत्र में स्थित दूकानें, शिब्ली कालेज के आसपास की दूकानें, एलआईसी बिल्डिंग रैदोपुर, बेलईसा, सिधारी क्षेत्र में स्थित प्रतिष्ठान, और कई होटल व्यवसायी शामिल हैं। इनमें से कई लोगों को चेतावनी भी दी गई है लेकिन कोई सुधरने को तैयार नहीं है।
तमसा तट पर कभी क्रौच वध की हृदय विदारक घटना साहित्यकारों के लिए मूलमंत्र ‘वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान, निकल कर आंखों से चुपचाप, बही होगी कविता अनजान’ बन गया। इससे जाहिर होता है कि कभी तमसा में जल की रवानी और हरियाली इतनी रही होगी कि अमृत समान इस जल से लोगबाग के अलावा पशु-पक्षी अपनी प्यास बुझाने के लिए आते थे लेकिन आज शहरों की गंदगी और कचरे से वही जल विष के मानिंद हो गया।