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बजी खतरे की घंटी, दांव पर अशासकीय के तदर्थ शिक्षकों की नौकरी
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आजमगढ़। खुशी और गम। इन्हीं दो पाटों में अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में तैनात सैकड़ों शिक्षकों के दिन-रात कट रहे हैं। उच्चतम न्यायालय का फैसला अब उनकी तकदीर की नई इबारत लिखेगा। यानी नए सिरे से परीक्षा होगी। जो अध्यापक उसमें सफल होगा उसकी नौकरी पक्की होगी। बाकी बाहर हो जाएंगे। हां, विद्यार्थियों के लिए यह खुशी की बात है कि ताजा आदेश में यह भी है कि जिले के स्कूलों में जो पद रिक्त हैं अब वे भी भरे जाएंगे। इससे नए अध्यापकों को अवसर मिलेगा। शासन की गाइडलाइन जारी होते ही डीआईओएस ने 30 दिसंबर 2000 के बाद तदर्थ रूप से नियुक्त शिक्षकों का डाटा मांगा है।
जिले में कुल 97 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी अधिक है। वहीं इसी का फायदा उठाते हुए विद्यालय के प्रबंधक की ओर से दर्जनों तदर्थ शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। ऐसे भी आरोप लगते रहते हैं कि इसके लिए शिक्षकों को भारी रकम भी अदा करनी पड़ती है। विनियमित करने की मांग को लेकर इनका मामला सुप्रीमकोर्ट में चल रहा है। कोर्ट के आदेश पर शासन ने ऐसे शिक्षकों का डाटा तैयार करने के लिए आदेश जारी किए है। डाटा तैयार करने के बाद उनकी परीक्षा कराई जाएगी। पास होने पर उन्हें नौकरी दी जाएगी। फेल होने पर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। डीआईओएस के निर्देश पर आठ तहसीलों में नामित नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। वह अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 30 दिसंबर वर्ष 2000 के बाद नियुक्त शिक्षकों के संबंध में निर्धारित प्रारूप पर अविलंब सूचना कार्यालय में जमा करेंगे।
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2021 तक भरे जाएंगे सभी पद
आजमगढ़। कोर्ट द्वारा जुलाई 2021 तक पदों को भरने के आदेश जारी किए गए हैं। इसमें तदर्थ शिक्षकों को भर्ती में वरीयता मिलेगी। यदि सफल हुए तो उनकी पुरानी सेवा को भी जोड़ा जाएगा। विफल होने पर बाहर हो जाएंगे।
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प्रबंधन की ओर से रखे जाते हैं तदर्थ शिक्षक
स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए तदर्थ शिक्षक रखे जाते हैं। सूत्र बताते हैं इसके लिए उनसे पहले उगाही भी होती है। फिर प्रबंधतंत्र से सहमति में पापड़ बेलने पड़ते हैं। बाद में कोर्ट के चक्कर भी लगाने पड़ जाते हैं। तब कहीं जाकर नियुक्ति मिलती है। अब ऐसे शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनकी अब परीक्षा होगी। इस आदेश की जद में जिले के कई शिक्षक आएंगे।
18 तदर्थ शिक्षकों ने भेजा अपना डाटा
डीआईओएस के निर्देश पर अब तक अशासकीय विद्यालय में तैनात 18 तदर्थ शिक्षकों ने अपना डाटा कार्यालय में भेज दिया है। बाकी के लोगों का डाटा मंगाया जा रहा है। इन सभी शिक्षकों का डाटा माध्यमिक परिषद को भेजा जाएगा। इसके बाद उनकी परीक्षा कराई जाएगी।
30 सितंबर तक नहीं भेजा डाटा तो रुकेगा वेतन
अशासकीय विद्यालय में तैनात तदर्थ शिक्षकों को 30 सितंबर तक डाटा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। डीआईओएस ने सख्ती का रुख अख्तियार करते हुए कहा है कि यदि तदर्थ शिक्षक 30 सितंबर तक डाटा उपलब्ध नहीं कराते हैं तो उनका वेतन रोक दिया जाएगा।
अशासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। इसी का फायदा उठाते हुए प्रबंधकों द्वारा तदर्थ शिक्षकों की भर्ती कर ली गई है। कोर्ट के आदेश पर माध्यमिक परिषद ने इन शिक्षकों का डाटा तैयार करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद उनकी परीक्षा कराई जाएगी। पास होने पर वह नौकरी में बने रहेंगे। यदि फेल हो गए तो उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया जाएगा।
डा. वीके शर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक, आजमगढ़।
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जिले में कुल 97 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी अधिक है। वहीं इसी का फायदा उठाते हुए विद्यालय के प्रबंधक की ओर से दर्जनों तदर्थ शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। ऐसे भी आरोप लगते रहते हैं कि इसके लिए शिक्षकों को भारी रकम भी अदा करनी पड़ती है। विनियमित करने की मांग को लेकर इनका मामला सुप्रीमकोर्ट में चल रहा है। कोर्ट के आदेश पर शासन ने ऐसे शिक्षकों का डाटा तैयार करने के लिए आदेश जारी किए है। डाटा तैयार करने के बाद उनकी परीक्षा कराई जाएगी। पास होने पर उन्हें नौकरी दी जाएगी। फेल होने पर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। डीआईओएस के निर्देश पर आठ तहसीलों में नामित नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। वह अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 30 दिसंबर वर्ष 2000 के बाद नियुक्त शिक्षकों के संबंध में निर्धारित प्रारूप पर अविलंब सूचना कार्यालय में जमा करेंगे।
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2021 तक भरे जाएंगे सभी पद
आजमगढ़। कोर्ट द्वारा जुलाई 2021 तक पदों को भरने के आदेश जारी किए गए हैं। इसमें तदर्थ शिक्षकों को भर्ती में वरीयता मिलेगी। यदि सफल हुए तो उनकी पुरानी सेवा को भी जोड़ा जाएगा। विफल होने पर बाहर हो जाएंगे।
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प्रबंधन की ओर से रखे जाते हैं तदर्थ शिक्षक
स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए तदर्थ शिक्षक रखे जाते हैं। सूत्र बताते हैं इसके लिए उनसे पहले उगाही भी होती है। फिर प्रबंधतंत्र से सहमति में पापड़ बेलने पड़ते हैं। बाद में कोर्ट के चक्कर भी लगाने पड़ जाते हैं। तब कहीं जाकर नियुक्ति मिलती है। अब ऐसे शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनकी अब परीक्षा होगी। इस आदेश की जद में जिले के कई शिक्षक आएंगे।
18 तदर्थ शिक्षकों ने भेजा अपना डाटा
डीआईओएस के निर्देश पर अब तक अशासकीय विद्यालय में तैनात 18 तदर्थ शिक्षकों ने अपना डाटा कार्यालय में भेज दिया है। बाकी के लोगों का डाटा मंगाया जा रहा है। इन सभी शिक्षकों का डाटा माध्यमिक परिषद को भेजा जाएगा। इसके बाद उनकी परीक्षा कराई जाएगी।
30 सितंबर तक नहीं भेजा डाटा तो रुकेगा वेतन
अशासकीय विद्यालय में तैनात तदर्थ शिक्षकों को 30 सितंबर तक डाटा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। डीआईओएस ने सख्ती का रुख अख्तियार करते हुए कहा है कि यदि तदर्थ शिक्षक 30 सितंबर तक डाटा उपलब्ध नहीं कराते हैं तो उनका वेतन रोक दिया जाएगा।
अशासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। इसी का फायदा उठाते हुए प्रबंधकों द्वारा तदर्थ शिक्षकों की भर्ती कर ली गई है। कोर्ट के आदेश पर माध्यमिक परिषद ने इन शिक्षकों का डाटा तैयार करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद उनकी परीक्षा कराई जाएगी। पास होने पर वह नौकरी में बने रहेंगे। यदि फेल हो गए तो उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया जाएगा।
डा. वीके शर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक, आजमगढ़।