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Azamgarh News: ब्रिगेडियर उस्मान का मनाया शहादत दिवस
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अहरौला। भारत के पहले ब्रिगेडियर उस्मान का शहादत दिवस बुधवार को गोपालगंज निवासी कवि लालबहादुर चौरसिया के आवास पर मनाया गया। इस दौरान श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
लालबहादुर चौरसिया ने कहा कि नौशेरा के शेर के नाम से प्रसिद्ध ब्रिगेडियर उस्मान का बीबीपुर गांव में 15 जुलाई 1912 को हुआ था। वर्तमान में बीबीपुर गांव, मऊ जनपद का हिस्सा हो गया है। उस्मान के बचपन का नाम मोहम्मद उस्मान मसऊदी था। इनके पिता मोहम्मद फारूख खुनमबीर तथा माता का नाम जमीलुन बीबी था। इनका मातृ परिवार (ननिहाल) यूसुफपुर, जनपद गाजीपुर का एक बड़ा जमींदार परिवार था। उस्मान के दो छोटे भाई सुभान और गुफरान थे। 19 मार्च 1935 को उस्मान की नियुक्ति सेना में स्थायी रूप से हो गई। अनेक पदों पर रहने के बाद स्वतंत्र भारत के प्रथम ब्रिगेडियर बना। ब्रिगेडियर उस्मान को पाकिस्तान का सेना प्रमुख बनाने का आमंत्रण मिला था। लेकिन, उन्होंने इसे ठुकरा दिया। तीन जुलाई 1948 को ब्रिगेडियर उस्मान के करीब दुश्मनों द्वारा फेंका गया 25 पाउंड का गोला आकर गिरा और वह शहीद हो गए। मरणोपरांत उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
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लालबहादुर चौरसिया ने कहा कि नौशेरा के शेर के नाम से प्रसिद्ध ब्रिगेडियर उस्मान का बीबीपुर गांव में 15 जुलाई 1912 को हुआ था। वर्तमान में बीबीपुर गांव, मऊ जनपद का हिस्सा हो गया है। उस्मान के बचपन का नाम मोहम्मद उस्मान मसऊदी था। इनके पिता मोहम्मद फारूख खुनमबीर तथा माता का नाम जमीलुन बीबी था। इनका मातृ परिवार (ननिहाल) यूसुफपुर, जनपद गाजीपुर का एक बड़ा जमींदार परिवार था। उस्मान के दो छोटे भाई सुभान और गुफरान थे। 19 मार्च 1935 को उस्मान की नियुक्ति सेना में स्थायी रूप से हो गई। अनेक पदों पर रहने के बाद स्वतंत्र भारत के प्रथम ब्रिगेडियर बना। ब्रिगेडियर उस्मान को पाकिस्तान का सेना प्रमुख बनाने का आमंत्रण मिला था। लेकिन, उन्होंने इसे ठुकरा दिया। तीन जुलाई 1948 को ब्रिगेडियर उस्मान के करीब दुश्मनों द्वारा फेंका गया 25 पाउंड का गोला आकर गिरा और वह शहीद हो गए। मरणोपरांत उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
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