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Azamgarh News: जिला अस्पताल परिसर में फेंकी मिली जीवन रक्षक दवाएं

Sun, 23 Jul 2023 11:59 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jul 2023 11:59 PM IST
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Life saving medicines found thrown in the district hospital premises
जिला अस्पताल परिसर स्थित शव गृह के पीछे रविवार को भारी संख्या में एक्सपायरी जीवन रक्षक दवाएं फेंकी मिली। ऐसे में स्वास्थ्य महकमें में हड़कंप मच गया। जहां सीएमओ ने जिला अस्पताल की दवाएं होने की बात कह कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा तो वहीं अस्पताल की मुखिया जांच कर कार्रवाई की बात कह रही हैं। सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी न हो इसके लिए शासन स्तर से पर्याप्त संख्या में दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं लेकिन अस्पताल के डॉक्टर कमीशन के चक्कर में मरीजों को अस्पताल की दवाएं देने के बजाए बाहर की लिख रहे है। जिसके चलते अस्पताल की सरकारी दवाएं एक्सपायर हो जा रही है और उन्हें अस्पताल प्रशासन इधर-उधर फेंक कर निपटा रहा है। रविवार को शव गृह के पीछे फेंकी गई एक्सपायरी दवाओं में कई दवाएं ऐसी भी थी, जो अभी अगस्त माह में एक्सपायर होने वाली हैं। दवाओं के मिलने पर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। सीएमओ डॉ. आईएन तिवारी ने कहा कि जहां दवा फेंकी हुई है वह अस्पताल प्रशासन के अधीन आता है, कहां की और कैसी दवाएं फेंकी गई हैं यह अस्पताल प्रशासन ही बता सकता है। सीएमओ ने बयान देकर अपने जिम्मेदारी से पल्ला तो झाड़ लिया लेकिन मौके के आसपास सीएमओं का ही स्टोर मौजूद है। यह अलग बात है कि जहां दवां फेंकी मिली है वह स्थान अस्पताल प्रशासन के अधीन आता है। सीएमओ के बयान के बाद प्रभारी एसआईसी डॉ. रीता दुबे ने ऐसे किसी मामले के प्रति अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि यदि सरकारी दवाएं फेंकी हुई हैं तो निश्चित तौर पर उसकी जांच कराई जाएगी और संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शासन को पत्र भी लिखा जाएगा। सरकारी अस्पतालों पर इलाज के लिए गरीब तबका पहुंचता है। जिन्हें अस्पताल से ही दवा उपलब्ध कराने का शासन ने दिशा निर्देश दे रखा है। इतना ही नहीं शासन द्वारा अस्पताल इलाज को आने वाले मरीजों के लिए कुल 104 तरह की दवाएं उपलब्ध करा रखा है। इन्हीं दवाओं में फेकी मिली दवाएं भी शामिल है। अस्पताल पर तैनात डॉक्टर अपनी कमाई के चक्कर में बाहर की दवाएं लिखते हैं। जिससे उन्हें मोटा कमीशन मिलता है। गरीब मरीज मजबूरी में प्राइवेट व महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर होता है। शासन से नि:शुल्क वितरण के लिए आयी दवाएं ऐसे ही इधर-उधर फेंक दी जाती हैं।
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