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Azamgarh News: दो पीढ़ियों से मूर्तियों को आकार दे रहे कोलकाता के कलाकार
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16 रानी की सराय में कोलकाता के मूर्ति कलाकारों द्वारा बनाई गई मूर्ति। संवाद
रानी की सराय। जगत जननी दुर्गा और देवों में प्रथम पूज्य गणपति बप्पा और मां लक्ष्मी की मूर्तियां नवरात्र व दीपावली के लिए रानी की सराय बाजार में कोलकाता के हस्तशिल्पी तैयार कर रहे हैं। कई मूर्तियों के आर्डर इनके पास हैं। इसलिए ये दिन-रात काम में जुटे हुए हैं।
चेक पोस्ट से रानी सराय कस्बा सेमरहां मोड तक तक छह जगह मूर्तियां बनती हैं। जून माह शुरु होते ही वह अपने परिवार संग यहां आ जाते हैं। बेस्ट बंगाल के नदियां कोलकाता जनपद के किसना नगर निवासी बी पाल मामा ने बताया कि वह दो पीढि़यों से यहां मूर्ति बनाने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि जून में वह अपने परिवार संग यहां आते हैं। छठ बाद यहां से चले जाते हैं। इस बीच पड़ने वाले गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, दशहरा, दीपावली और छठ पर मूर्ति बनाकर रोजगार करते हैं।
मिट्टी मिलने में होती परेशानी
रानी की सराय। मूर्ति कलाकार बी पाल मामा ने बताया कि हर साल दीपावली से पहले लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं बनती हैं। इस बार पहले से ही मिट्टी का संकट (खनन पर सख्ती के कारण) था और हाल में हुई बारिश ने इसे और बढ़ा दिया। आलम ये है कि 1200 रुपये प्रति ट्रैक्टर-टॉली वाली चिकनी मिट्टी इस बार 1500 से 2000 रुपये में मिल रही है।
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बड़हलगंज से मंगाई जा रही शृंगार सामग्री
रानी की सराय। मूर्ति बनाने के लिए बांस का प्रयोग होता है। बांस तो यहीं मिल जाते लेकिन पेंट और शृंगार की सामग्री यहां नहीं मिलती। बढ़हलगंज बाजार से पेंट और शृंगार से सामग्री मंगाई जाती है। कलाकारों ने बताया कि पेंट भी महंगा हो गया है। 500 से 800 रुपये लीटर तक पेंट मिल रहा है।
पांच से 12 फीट तक की बनाई जा रहीं मूर्तियां
रानी की सराय। मूर्तिकार बी पाल मामा ने बताया कि सभी मूर्तियों को आर्डर के हिसाब से बनाया जाता है। सबसे अधिक पांच फीट की मूर्तियों की मांग होती है। बाकी बड़ी मूर्तियां नवरात्र व दशहरा पर बिकती हैं। बताया कि वह इस बार पांच से 12 फीट तक की मूर्तियां बना रहे हैं। करीब 300 मूर्तियों के आर्डर मिल चुके हैं।
इन त्योहाराें में बनाई जाती हैँ इतनी मूर्तियां
रानी की सराय। हस्तशिल्पकार बी पाल मामा ने बताया कि जन्माष्टमी, दशहरा, छठ पूजा, गणेश चतुर्दशी और दीपावली में टोटल 300 मूर्तियां खुद बनाकर व बनवाकर बेचते हैं। बाकी के अन्य साथी भी कस्बे में दुकान लगाए हुए हैं। वह भी इतनी ही मूर्तियां बेच लेते हैं। बताया कि दुर्गा पूजा में 10 हजार से 30 हजार तक की 100 पीस मूर्तियां बिकती हैं। दीपावली में गणेश-लक्ष्मी, सरस्वती की मूर्तियां छह हजार से 30 हजार रुपये तक बेची जाती हैं। तीन से चार लाख रुपये तक की बचत होती है।
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चेक पोस्ट से रानी सराय कस्बा सेमरहां मोड तक तक छह जगह मूर्तियां बनती हैं। जून माह शुरु होते ही वह अपने परिवार संग यहां आ जाते हैं। बेस्ट बंगाल के नदियां कोलकाता जनपद के किसना नगर निवासी बी पाल मामा ने बताया कि वह दो पीढि़यों से यहां मूर्ति बनाने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि जून में वह अपने परिवार संग यहां आते हैं। छठ बाद यहां से चले जाते हैं। इस बीच पड़ने वाले गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, दशहरा, दीपावली और छठ पर मूर्ति बनाकर रोजगार करते हैं।
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मिट्टी मिलने में होती परेशानी
रानी की सराय। मूर्ति कलाकार बी पाल मामा ने बताया कि हर साल दीपावली से पहले लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं बनती हैं। इस बार पहले से ही मिट्टी का संकट (खनन पर सख्ती के कारण) था और हाल में हुई बारिश ने इसे और बढ़ा दिया। आलम ये है कि 1200 रुपये प्रति ट्रैक्टर-टॉली वाली चिकनी मिट्टी इस बार 1500 से 2000 रुपये में मिल रही है।
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बड़हलगंज से मंगाई जा रही शृंगार सामग्री
रानी की सराय। मूर्ति बनाने के लिए बांस का प्रयोग होता है। बांस तो यहीं मिल जाते लेकिन पेंट और शृंगार की सामग्री यहां नहीं मिलती। बढ़हलगंज बाजार से पेंट और शृंगार से सामग्री मंगाई जाती है। कलाकारों ने बताया कि पेंट भी महंगा हो गया है। 500 से 800 रुपये लीटर तक पेंट मिल रहा है।
पांच से 12 फीट तक की बनाई जा रहीं मूर्तियां
रानी की सराय। मूर्तिकार बी पाल मामा ने बताया कि सभी मूर्तियों को आर्डर के हिसाब से बनाया जाता है। सबसे अधिक पांच फीट की मूर्तियों की मांग होती है। बाकी बड़ी मूर्तियां नवरात्र व दशहरा पर बिकती हैं। बताया कि वह इस बार पांच से 12 फीट तक की मूर्तियां बना रहे हैं। करीब 300 मूर्तियों के आर्डर मिल चुके हैं।
इन त्योहाराें में बनाई जाती हैँ इतनी मूर्तियां
रानी की सराय। हस्तशिल्पकार बी पाल मामा ने बताया कि जन्माष्टमी, दशहरा, छठ पूजा, गणेश चतुर्दशी और दीपावली में टोटल 300 मूर्तियां खुद बनाकर व बनवाकर बेचते हैं। बाकी के अन्य साथी भी कस्बे में दुकान लगाए हुए हैं। वह भी इतनी ही मूर्तियां बेच लेते हैं। बताया कि दुर्गा पूजा में 10 हजार से 30 हजार तक की 100 पीस मूर्तियां बिकती हैं। दीपावली में गणेश-लक्ष्मी, सरस्वती की मूर्तियां छह हजार से 30 हजार रुपये तक बेची जाती हैं। तीन से चार लाख रुपये तक की बचत होती है।