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पॉजिटिव मरीज के रिश्तेदारों से 25 लाख मांगने की शुरू हुई जांच, डीएम ने एसपी सिटी को बनाया जांच अधिकारी
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आजमगढ़। राजकीय मेडिकल कालेज चक्रपानपुर में भर्ती कराए गए बलिया जिले के कोरोना पॉजिटिव के रिश्तेदारों से 25 लाख रुपये की मांग मामले में जांच शुरू हो गई है। मंडलायुक्त वीवी पंत के निर्देश पर जिलाधिकारी राजेश कुमार ने एसपी सिटी को जांच अधिकारी नामित किया है। इसके साथ ही मेडिकल कालेज के सीसी टीवी फुटेज को एकत्र किए जाने की कवायद शुरू कर दी गई है।
बलिया जिले के रहने वाला एक व्यक्ति 17 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव आया था। इसके बाद उसे बलिया से रेफर कर राजकीय मेडिकल कालेज चक्रपानपुर पर बने एल-3 अस्पताल पर भर्ती कराया गया। मेडिकल कालेज में भर्ती होने के बाद मरीज ने परिजनों को फोन कर मेडिकल कालेज की व्यवस्था अच्छी होने की बात बताई थी। इसके बाद उसका मोबाइल स्वीच ऑफ हो गया। 19 जुलाई की रात मोबाइल चालू हुआ तो उसके रिश्तेदार ने वीडियो कॉल किया। फोन उठा, लेकिन मरीज नजर नहीं आया। इसके बाद वाट्सएप के माध्यम से रिश्तेदारों व परिजनों को यह संदेश भेजा गया कि तुम्हारे मरीज की हालत काफी गंभीर है, 25 लाख रुपये भेज दो। इसके साथ ही मरीज के हस्ताक्षर किए हुए ब्लैंक चेक की प्रति भी ग्रुप में अपलोड की गई। मरीज से बात न हो पाने व 25 लाख की डिमांड को देख कर परिजनों व रिश्तेदारों के होश उड़ गए। परिजनों ने मामले की जानकारी अमर उजाला के साथ ही बलिया के जिलाधिकारी को दी थी।
अमर उजाला ने सोमवार के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इससे प्रशासनिक अमले के साथ ही मेडिकल कालेज प्रशासन में हड़कंप मचा है। मंडलायुक्त वीवी पंत ने स्वयं इसे गंभीरता से लिया। मरीज गंभीर था और सोमवार देर रात आनन-फानन में उसे बीएचयू रेफर कर दिया। मरीज का गायब मोबाइल भी मिल गया। प्राचार्य आरपी शर्मा का दावा है कि मोबाइल मरीज के पास ही था। वहीं, मंडलायुक्त ने प्रकरण की जांच का निर्देश जारी कर दिया। इस पर डीएम ने एसपी सिटी का जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया। इसके साथ ही मेडिकल कालेज के सीसी टीवी फुटेज आदि को एकत्र करने की कवायद शुरू हो गई है।
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मरीज का हाल न मिलने से परिजन है परेशान
आजमगढ़। बलिया का मरीज मेडिकल कालेज से बीएचयू रेफर किया जा चुका है, लेकिन उसकी मोबाइल अभी भी स्वीच ऑफ है। इसके चलते परिजनों को मरीज का हाल नहीं मिल पा रहा है। परिजन काफी परेशान है। मरीज के पुत्र ने बलिया से फोन पर बताया कि कहीं से कोई हाल नहीं मिल रहा है। बलिया जिले के डीएम, सीएमओ प्रकरण को मजाक समझ रहे है तो वहीं आजमगढ़ के डीएम व सीओ ने फोन कर घटनाक्रम की जानकारी ली है।
परिजन पुलिस से करेंगे शिकायत
आजमगढ़। पॉजिटिव मरीज के परिजन व रिश्तेदारों की माने तो अभी वे मुकदमा दर्ज कराने के लिए बलिया पुलिस के सक्षम प्रयास कर रहे है। बलिया कोतवाली पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की है और अब वे एसपी के यहां जाने की तैयारी कर रहे है। यदि जरूरत पड़ी तो वे आजमगढ़ आकर मंडलायुक्त, डीएम व एसपी के समक्ष भी अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे।
प्राचार्य ने की जांच की संस्तुति
आजमगढ़। राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. आरपी शर्मा का कहना है कि प्रकरण है काफी गंभीर है। ऐसे में इसकी जांच अवश्य होनी चाहिए, क्योंकि इस प्रकरण से मेडिकल कालेज की छवि खराब होगी।ऐसे में मैने स्वयं प्रकरञण के जांच की संस्तुति कर दी है। जहां तक मरीज के हालत की बात है तो सुबह बीएचयू बात हुई थीि। मरीज गंभीर है, लेकिन हालत स्थिर है।
प्रकरण गंभीर प्रवृति का है। हो सकता है कि इस प्रकरण में अस्पताल का कोई स्टाफ शामिल हो। इसलिए इस प्रकरण की जांच अत्यंत ही जरूरी है। चूंकि मामला क्राइम से जुड़ा हुआ है इसलिए जांच की जिम्मेदारी पुलिस विभाग को ही सौंपते हुए एसपी सिटी को जांच अधिकारी नामित किया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - राजेश कुमार, जिलाधिकारी
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बलिया जिले के रहने वाला एक व्यक्ति 17 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव आया था। इसके बाद उसे बलिया से रेफर कर राजकीय मेडिकल कालेज चक्रपानपुर पर बने एल-3 अस्पताल पर भर्ती कराया गया। मेडिकल कालेज में भर्ती होने के बाद मरीज ने परिजनों को फोन कर मेडिकल कालेज की व्यवस्था अच्छी होने की बात बताई थी। इसके बाद उसका मोबाइल स्वीच ऑफ हो गया। 19 जुलाई की रात मोबाइल चालू हुआ तो उसके रिश्तेदार ने वीडियो कॉल किया। फोन उठा, लेकिन मरीज नजर नहीं आया। इसके बाद वाट्सएप के माध्यम से रिश्तेदारों व परिजनों को यह संदेश भेजा गया कि तुम्हारे मरीज की हालत काफी गंभीर है, 25 लाख रुपये भेज दो। इसके साथ ही मरीज के हस्ताक्षर किए हुए ब्लैंक चेक की प्रति भी ग्रुप में अपलोड की गई। मरीज से बात न हो पाने व 25 लाख की डिमांड को देख कर परिजनों व रिश्तेदारों के होश उड़ गए। परिजनों ने मामले की जानकारी अमर उजाला के साथ ही बलिया के जिलाधिकारी को दी थी।
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अमर उजाला ने सोमवार के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इससे प्रशासनिक अमले के साथ ही मेडिकल कालेज प्रशासन में हड़कंप मचा है। मंडलायुक्त वीवी पंत ने स्वयं इसे गंभीरता से लिया। मरीज गंभीर था और सोमवार देर रात आनन-फानन में उसे बीएचयू रेफर कर दिया। मरीज का गायब मोबाइल भी मिल गया। प्राचार्य आरपी शर्मा का दावा है कि मोबाइल मरीज के पास ही था। वहीं, मंडलायुक्त ने प्रकरण की जांच का निर्देश जारी कर दिया। इस पर डीएम ने एसपी सिटी का जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया। इसके साथ ही मेडिकल कालेज के सीसी टीवी फुटेज आदि को एकत्र करने की कवायद शुरू हो गई है।
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मरीज का हाल न मिलने से परिजन है परेशान
आजमगढ़। बलिया का मरीज मेडिकल कालेज से बीएचयू रेफर किया जा चुका है, लेकिन उसकी मोबाइल अभी भी स्वीच ऑफ है। इसके चलते परिजनों को मरीज का हाल नहीं मिल पा रहा है। परिजन काफी परेशान है। मरीज के पुत्र ने बलिया से फोन पर बताया कि कहीं से कोई हाल नहीं मिल रहा है। बलिया जिले के डीएम, सीएमओ प्रकरण को मजाक समझ रहे है तो वहीं आजमगढ़ के डीएम व सीओ ने फोन कर घटनाक्रम की जानकारी ली है।
परिजन पुलिस से करेंगे शिकायत
आजमगढ़। पॉजिटिव मरीज के परिजन व रिश्तेदारों की माने तो अभी वे मुकदमा दर्ज कराने के लिए बलिया पुलिस के सक्षम प्रयास कर रहे है। बलिया कोतवाली पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की है और अब वे एसपी के यहां जाने की तैयारी कर रहे है। यदि जरूरत पड़ी तो वे आजमगढ़ आकर मंडलायुक्त, डीएम व एसपी के समक्ष भी अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे।
प्राचार्य ने की जांच की संस्तुति
आजमगढ़। राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. आरपी शर्मा का कहना है कि प्रकरण है काफी गंभीर है। ऐसे में इसकी जांच अवश्य होनी चाहिए, क्योंकि इस प्रकरण से मेडिकल कालेज की छवि खराब होगी।ऐसे में मैने स्वयं प्रकरञण के जांच की संस्तुति कर दी है। जहां तक मरीज के हालत की बात है तो सुबह बीएचयू बात हुई थीि। मरीज गंभीर है, लेकिन हालत स्थिर है।
प्रकरण गंभीर प्रवृति का है। हो सकता है कि इस प्रकरण में अस्पताल का कोई स्टाफ शामिल हो। इसलिए इस प्रकरण की जांच अत्यंत ही जरूरी है। चूंकि मामला क्राइम से जुड़ा हुआ है इसलिए जांच की जिम्मेदारी पुलिस विभाग को ही सौंपते हुए एसपी सिटी को जांच अधिकारी नामित किया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - राजेश कुमार, जिलाधिकारी