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अनफिट स्कूली वाहन से हुआ हादसा तो स्कूल प्रबंधक व प्रधानाचार्य पर होगी एफआईआर
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आजमगढ़। आरटीओं विभाग ने स्कूली वाहन जिनकी फिटनेस नहीं है उन्हे नोटिस दिया है और कहा है कि अगर स्कूली वाहनों की फिटनेस दो दिन में नहीं कराई तो पंजीकरण निरस्त किया जाएगा। इसके साथ ही लापरवाही को देखते हुए साफ शब्दों में कह दिया गया है कि अगर स्कूली वाहनों से कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी स्कूल के प्रबंधन व प्रधानाचार्य की होगी। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराया जाएगा।
गाजियाबाद में हुई दुर्घटना के बाद भले ही शासन सख्त है, लेकिन अभी भी जनपद में ऐसे तमाम स्कूल वाहन हैं, जो मानक विहीन हैं और सड़कों पर धड़ल्ले से फराटा भर रहे हैं। इतना ही नहीं पैसा अधिक कमाने की चक्कर में सवारी बस की तरह बच्चों को भी ठूंस-ठूंस कर बैठाते हैं। खिड़की खुली होने के कारण बच्चों की जान को हमेशा खतरा बना रहता है। ऐसा ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में ही नहीं शहर के बड़े-बड़े स्कूलों की हालत है। सहायक संभागीय परिवहन विभाग से फिटनेस को लेकर कभी-कभी कार्रवाई की जाती है, लेकिन कोरम पूरा कर छोड़ दिया जाता है। जिले में 1853 वाहन स्कूली वाहन के नाम से पंजीकृत हैं। इसमें 800 से अधिक अनफिट वाहन सड़कों पर दौड़ रही हैं। अधिकतर स्कूल संचालक अपने विद्यालय के छात्र-छात्राओं को आवागमन के लिए पुराने वाहनों को लगाए हुए हैं। इन वाहनों में किसी के पर्दे नहीं है तो बच्चों की सुरक्षा के लिए दरवाजे खिड़की के पास जाली नहीं लगी हैं। इससे बच्चे खिड़की से बाहर सिर निकालकर ताक झांक करते रहते हैं। अधिकतर स्कूलों में वाहन मानक को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं, जो किसी दिन बड़ी दुर्घटना की वजह बन सकती है।
एआरटीओ प्रशासन सतेंद्र कुमार यादव ने कहा कि यदि वाहन अनफिट है तो उस दौरान दुर्घटना बीमा का लाभ नहीं दिया जाएगा। वहीं कोई मानवीय क्षति होती है तो संबंधित विद्यालय के प्रबंधक व प्रधानाचार्यों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वाहन फिटनेस कराने के लिए निर्देश दे दिए हैं।
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गाजियाबाद में हुई दुर्घटना के बाद भले ही शासन सख्त है, लेकिन अभी भी जनपद में ऐसे तमाम स्कूल वाहन हैं, जो मानक विहीन हैं और सड़कों पर धड़ल्ले से फराटा भर रहे हैं। इतना ही नहीं पैसा अधिक कमाने की चक्कर में सवारी बस की तरह बच्चों को भी ठूंस-ठूंस कर बैठाते हैं। खिड़की खुली होने के कारण बच्चों की जान को हमेशा खतरा बना रहता है। ऐसा ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में ही नहीं शहर के बड़े-बड़े स्कूलों की हालत है। सहायक संभागीय परिवहन विभाग से फिटनेस को लेकर कभी-कभी कार्रवाई की जाती है, लेकिन कोरम पूरा कर छोड़ दिया जाता है। जिले में 1853 वाहन स्कूली वाहन के नाम से पंजीकृत हैं। इसमें 800 से अधिक अनफिट वाहन सड़कों पर दौड़ रही हैं। अधिकतर स्कूल संचालक अपने विद्यालय के छात्र-छात्राओं को आवागमन के लिए पुराने वाहनों को लगाए हुए हैं। इन वाहनों में किसी के पर्दे नहीं है तो बच्चों की सुरक्षा के लिए दरवाजे खिड़की के पास जाली नहीं लगी हैं। इससे बच्चे खिड़की से बाहर सिर निकालकर ताक झांक करते रहते हैं। अधिकतर स्कूलों में वाहन मानक को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं, जो किसी दिन बड़ी दुर्घटना की वजह बन सकती है।
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एआरटीओ प्रशासन सतेंद्र कुमार यादव ने कहा कि यदि वाहन अनफिट है तो उस दौरान दुर्घटना बीमा का लाभ नहीं दिया जाएगा। वहीं कोई मानवीय क्षति होती है तो संबंधित विद्यालय के प्रबंधक व प्रधानाचार्यों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वाहन फिटनेस कराने के लिए निर्देश दे दिए हैं।
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