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हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी भाषा : कुलपति

Fri, 12 Sep 2025 11:56 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 12 Sep 2025 11:56 PM IST
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Hindi is the third largest language in the world: Vice Chancellor
14 विवि में हिंदी भाषा के वैश्विक महत्व और पूर्वांचल की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत पर अंतर्राष - फोटो : credit
महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग की ओर से अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी पूर्वांचल का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अवदान में हिंदी भाषा के वैश्विक महत्व और आजमगढ़ की साहित्यिक-सांस्कृतिक धरोहर पर चर्चा हुई। कुलपति ने कहा कि हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है।
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संगोष्ठी की शुरूआत मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और वंदना से हुआ। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि हिंदी आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है और इसका प्रयोग विदेशों में भी तेजी से बढ़ रहा है।
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उन्होंने अमेरिका, मारिशस, फिजी, सूरीनाम और रूस में हिन्दी के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख किया और विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी विभाग खुलने की बात साझा की।
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मुख्य वक्ता डॉ. मीरा सिंह, अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य परिषद की संस्थापक ने लोकगीतों को नारी मनोविज्ञान और सशक्तता का दर्पण बताया। डॉ. शिव कुमार निगम, संयुक्त निदेशक राजभाषा, ने संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा हिंदी को विश्व की सातवीं भाषा का दर्जा देने और विदेशों में भारतीय मूल के लोगों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
प्रो. दीपक कुमार त्यागी, दीन दयाल विश्वविद्यालय ने आजमगढ़ के ऐतिहासिक और साहित्यिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में आजमगढ़ की भूमिका और यहां के साहित्यकारों के योगदान पर चर्चा की।
प्रो. प्रभाशंकर सिंह, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने आजमगढ़ को साहित्यिक-सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र बताया। राहुल सांकृत्यायन के यात्रा साहित्य और बौद्ध धर्म पर शोध को युगांतरकारी बताया।

उन्होंने प्रो. तुलसी राम की रचनाओं मुरदहिया और मणिकर्णिका को दलित साहित्य की अमूल्य धरोहर कहा। संगोष्ठी में प्रो. प्रत्यूष दुबे, डॉ. विनम सेन, प्रो. गीता सिंह, प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह और प्रो. अखिलेश चंद्र ने संबोधित किया।
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